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गर्म मौसम और संघर्ष

बड़ा अजीब सा होता है ये गर्मी का मौसम भी न….

फाल्गुन महीने के समय से चलने वाली सुबह शाम की मंद मंद हवा ही तो होती है….

जो धीरे धीरे लू के थपेड़ों मे बदल जाती है….

हर साल गर्म मौसम मे बड़े बुजुर्गों और बच्चों की बात का मुद्दा,जलवायु परिवर्तन और बढ़ते हुये तापमान पर आ कर टिकता है….

एक नंबर के कामचोर लोग भी पसीने मे डूबे दिखते हैं…..

मेहनत के साथ निकले हुए पसीने की अहमियत को,अपने ही अंदाज मे बतलाते जाते हैं….

हर शहर,महानगर, गांव और कस्बों की इस मौसम की अपनी अलग ही कहानी होती है

गांव की तरफ देखो तो, खेत अपनी गेहूं की फसल को उतारकर, चैन से कुछ समय के लिये ही आराम फरमाते नज़र आते हैं…..

बढ़ता हुआ तापमान, फसलों से अनाज को अलग करने में मुश्किल करता है…..

तो कहीं बेमौसम का आंधी तूफान, किसानो को चिंता मे डालता है……

दूसरी तरफ शहरी जीवन को जीने वाले लोगों के पास, ज्यादा समय तक उपलब्ध रहने वाली बिजली, एयर कंडीशनर, कूलर के साथ सुकून दे जाती है…

लेकिन घर से बाहर निकलते ही तमतमाते हुए सूरज की किरणें अपना प्रभाव दिखाती हैं….

घर से बाहर आवागमन के साधनों के जरिए रास्तों का साथ मिलता है….

दिन की दुपहरी रास्तों पर मृग मरीचिका का दर्शन कराती है….

लंबी-लंबी सड़क पर दिखती हुई मृग मरीचिका, परिंदों और जानवरों को भ्रम मे डालती है…

रास्तों के किनारों पर बिकते हुए तरबूज,नारियल पानी, नीबू पानी का ठेला लगा कर खड़े लोग, तपती गर्मी मे खुद पसीने से नहाकर दूसरों को राहत देते नज़र आते हैं…..

लेकिन ये बात सत्य है कि, मौसम की बेरुखी मे भी जीवन कभी नही रुकता है….

तपन के बाद भी निर्माण स्थलों पर, काम तीव्रता से अपनी गति पकड़ता है ….

ऐसी जगहों पर पेड़ों की छाँव, शीतलता का एहसास कराती है …….

हरे भरे पेड़ों और वनस्पतियों की अहमियत, सूर्य की तपती हुई किरणें बतला जाती हैं…….

गर्म मौसम मे छांव मे फैले हुए कपड़े भी कड़क ,और गमलों मे लगी हुयी वनस्पतियाँ मुरझायी सी दिख जाती है…..

“अति सर्वत्र वर्जयेत”वाली बात यहां पर सत्य लगती है….

विकास की दौड़ मे घटती हुई हरियाली,और जमीन की उथल पुथल पर्यावरण परिर्वतन का मुख्य कारण है ….

अक्लमंद इंसान तो खुद को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव से बचा लेता है…. लेकिन निरीह पक्षी और जानवर व्याकुल दिख जाते हैं….

शायद यह समय हमे ठहरकर, विकास कीअंधाधुन्ध दौड़ के दूसरे पक्ष पर सोचने पर मजबूर करता है….

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#environment

Because You're Radioactive, Mate!

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