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Three glorious months...

It’s been a busy start to the year, so I’ll have to bring you up to speed very briefly!

So far I’ve performed at the friendly folk afternoon, Slack Space in Colchester, and featured at Silence Found a Tongue at Waterloo, following the Lunar Poetry podcast that David Turner came to record, interviewing myself and my poetic partner in crime, Leanne Moden, as well as the current (for one day only now!) Fenland Poet Laureate, Poppy Kleiser.   486 more words

वह मेरी मां नहीं है ?

बचपन के दिनों में मैं अपनी मां के साथ ज्यादा समय गुजारा करता था , जैसा कि आमतौर पर सब लोग करते है.साथ में एक साथ रहना , हसना,खेलना,कुदना और कई तरह की हरकतें करना ,जो आज यादों में हिं दफन है.चाहकर भी उन पुरानी यादों को फ़िर से रियल लाइफ में अनुभव नहीं ले सकता.

समय काफ़ी तेजी से गुजरता जा रहा था,मेरी उम्र तेजी से मैच्यूरिटी की ओर अग्रसर थी.कुछ दिनों बाद समय ने ऐसा करवट बदला कि मुझे हमेशा लिये मां से दूर रहना पडा.बचपन की यादें मुझे काफ़ी परेसान कर देती थी ,साथ हिं मां की वो बातें जो मुझे काफ़ी प्रोत्साहित करती थी मुझे दूर रहने के लिये काफ़ी मजबूत कर दिया था.

कुछ दिनों बाद मुझे एक व्यक्ति से मुलाकात हुयी,जिसका अब तक का सारा समय उसकी अपनी मां के साथ गुजरा था,उन्होनों ने अपने लाइफ की एक विशेष बात share की.

वे बोले , मैने अपनी मां से एक सवाल पुछा, ” मां मेरा अधिकांस समय तुम्हारे साथ गुजरा है,तुम्हारी उम्र भी गिरती जा रही है और समय के साथ शरीर भी कमजोर होती जा रही है,प्रकृति अपना काम तो करेगा ही,अगर तुम ईस दुनिया में नहीं रहोगी तो मेरा क्या होगा और मैं कैसे रह पाउन्गा ”
फिर मैने पुछा आपकी मां ने क्या जवाब दिया,उन्होनों जो बात मुझे बताई वह मेरे दिल को छू गयी.

उनकी मां बोली , ” बेटा प्रकृति सब समस्या का समाधान खोज करके रखी हुयी है, कुछ दिनों बाद तुम्हारी शादी होगी,तबतक तुम्हारे लाइफ में मेरा रोल पुरा हो चुका होगा और मेरी कमी को पुरा करने के लिये तुम्हारे लाइफ मे एक दूसरी महिला का आगमन हो जायेगा,जो तुम्हारे हर बातों का ख्याल रखेगी,साथ ही वो तुम्हारी हर जरुरतों को पुरा करेगी,जो मैं भी नहीं कर सकती हुं.”

ये बातें मेरे दिल को भी इतना तसल्ली दी की मैं चाहकर भी अपनी मां की सलाह को ठुकरा नहीं सकता.

मैं गर्व से कहता हुं कि वह मेरी मां है,जिसकी कमी को कोई पुरा नहीं कर सकता.

Emotionally Short Story

प्यार का आइनाऔर इसके रुप-1

लक्ष्मी(बदला हुया नाम),
उम्र अभी सोलह साल भी पुरी नहीं हुई है.
कद-पांच फीट छ: इंच
रंग-गोरा
गरीबी की मार झेल रहा यह परिवार अपने परेशानी को दुर करने के लिये आज खड़ा है,अपनी अबला मासूम के साथ.
जाहां इज्जत के साथ ,औरत की आबरू नीलाम की जाती है.

नीलामी का सिलसिला शुरू होता है,लेकिन कोई खरिददार हिं नहीं मिलता,शाम होने लगती है,लोग अपने घरों की तरफ़ जाने लगते हैं,सन्नाटा छाने लगता है,पक्षियों का कलरव अपने घोसलों में लौटने के उपरांत और तेज हो जाती है,कुत्ते भोंकने लगते हैं,आस पास के बुजुर्गों की मंडली बैठ जाती है और सभी लगभग अपनी कामों मे व्यस्त हो जाते हैं.

तभी कहीं से एक थका हारा हुया मुसाफिर आता है और अपनी मासूका को देखकर दर्द भरी आवाज से चिल्लाता है,लेकिन उसकी बात सुनने वाला वहा कोई नहीं होता क्योंकि’ लक्ष्मी ‘ की आखिरी बोली लग चुकी होती है और मुसाफिर के पास बोली लगाने के लिये मिन्नत के अलावा कुछ नहीं होता है.
प्यार का एक रुप
शानदार,बहुत खुब,हमारे समाज के इज्जतदार लोग….
इतनी अवाज गुंजने के बाद गमगिन माहौल मे थोरी गर्माहट आती है,मुसाफिर आशा भरी नजरों से उस मशहूर शायर की तरफ़ देखने लगता है,शायर अपने हिं अन्दाज में अपने व्यक्तित्व को परिचय देते हुये बोलता है……

“मैं तुम्हें प्यार नहीं करती हुं न ! मैं तुम्हें प्यार नहीं करती हुं.
फिर भी मैं उदास रहती हुं जब तुम पास नहीं होते हो!
और मैं उस चमकदार नीले आकाश से भी ईर्ष्या करती हुं
जिसके नीचे तुम खडे होगे और जिसके सितारें तुम्हें देख सकते हैं….

मैं तुम्हें प्यार नहीं करती हुं-फिर भी तुम्हारी बोलती हुयी आंखें ;
जिनकी निलिमा में गहराई , चमक और अभिव्यक्ति है
मेरी निर्निमेश पलकों और जागते अर्ध्ररात्री के आकाश में नाच जाती है!
और किसी के आखों के बारे मे ऐसा नहीं होता….

न मुझे मालूम है कि मैं तुम्हे प्यार नाहिने करती हुं,लेकिन फिर भी,
कोई मेरे साफ़ दिल पर विश्वास नहीं करेगा.
और अक्सर मैने देखा है कि लोग मुझे देखकर मुसकुरा देते हैं,
क्योंकि मैं उधर एकटक देखती हुं जिधर से तुम आया करते हो. “

इतना बोलने के बाद शायर उस मुसाफिर की ओर देखते हुये बोला,

“ये आज फिजा खामोश है क्यों,हर जर्रे को आखिर होश है क्यों?
या तुम हिं किसी के हो एन सके,या कोई तुम्हारा हो न सका,
मौजें भी हमारी हो न सकी, तुफां भी हमारा हो एन सका.”

इतना कहने के बाद शायर वहा से चला जाता है.
मुसाफिर अपनी बातों को उदास चेहरे के द्वारा सरोज को पाहुंचाने के उद्देश्य से कहता है,” भाइजान आप पैसों वाले है आप इसके जैसा कई खूबसूरत महिला को खरिद सकते है,इसे भगवान के लिये छोड़ दे.
सरोज- मुसाफिर तूने केवल पैसों वालों के बारे मे सुना है , देखा नहीं ,आओ मेरे साथ तुमको दिखाता हुं हम कैसे होते है….

आप इसका अगला भाग कुछ दिनों में पा सकेंगे,उस मुसाफिर के साथ आगे क्या हुया ?
क्या लक्ष्मी मिल पायी उसे?
समाज क्या कहता है ईस बारे मे?
इन सारी सवालों का जवाब बहुत जल्द मिलेगा अगले भाग मे,इन्तेजार करें…..

साथ हिं आप पायेन्गे प्यार के विभ्भिन रुपों को….

Emotionally Short Story