Tags » Eyes

To hide, or to face?

We cover our eyes when things get rough, waiting for the storm to pass without even staring it in the eye.

We cover ourselves up, to protect ourselves from the pain. 175 more words

Newblog

Building a Makeup Collection For Under $150

Over the years I have accumulated so many makeup products, most of which have gotten set aside and never used up. It’s hard trying to find the perfect products that you don’t get tired of. 398 more words

Feature

Magical Eyes

Doing the Harry Potter CAL I have come across some amazing edits and fun designs by those in Crafty Ridge Crochet. One of my favorite edits are these eyes! 436 more words

Crochet

Casual Cut Crease..

One of my favourite looks is a good cut crease and I wanted to create a cut crease that could be worn more casually. Usually a cut crease is quite dramatic but I created this look using more neutral tones so that every body can have a go! 361 more words

Makeup

ब्रेन डेड व्यक्ति ने दिया चार को जीवनदान, महज 81 मिनट में सूरत से मुंबई पहुंचाया गया दिल

जीते जी इंसान किसी के लिए कुछ भी न कर पाए तो वो अलग बात है. मगर मरने के बाद कोई इंसान किसी के लिए बहुत कुछ कर के जाए इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है. सूरत में ब्रेन डेड हुए 34 वर्षीय राजू भाई देसाई नाम के व्यक्ति के शारीरिक अंगों का दान करके 4 लोगों को जीवन दान दिया गया है. ब्रेन डेड राजू देसाई के शरीर से हार्ट, लीवर, किडनी और आंखें दान की गई.

ब्रेन डेड राजू भाई के लीवर का ट्रांसप्लांट अहमदाबद निवासी सुभाष भाई देसाई के शरीर में किया गया था और किडनी गुजरात के ही सोमनाथ निवासी 25 वर्षीय लड़के के शरीर में ट्रांसप्लांट की गई. जबकि आंखे सूरत चक्षु बैंक को दान की गई थी.

दिल ले जाने के लिए बनाया गया कॉरिडोर
सूरत के पुलिस कमिश्नर और जिला कलेक्टर की अनुमति से सूरत के आयुष अस्पताल से सूरत एयरपोर्ट तक ले जाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था. महज 81 मिनट में धड़कते दिल को सूरत के आयुष अस्पताल से मुंबई के फोर्टिस अस्पताल तक पहुंचाया गया. मुंबई के इतिहास में अब तक 23 हार्ट ट्रांसप्लांट किए गए हैं जिनमें से 6 तो सूरत की डोनेट लाइफ संस्था द्वारा उपलब्ध करवाये गए हैं.

अंगदान के लिए प्रेरित करती है संस्था
संस्था के संचालक नीलेश भाई मांडलेवाला का मानना है कि लोगो में जागृति लाकर उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित करना आसान नहीं होता है मगर फिर भी उनका प्रयास सफल होता है. ब्रेन डेड लोगों से अंग लेकर जिंदा लोगों को अंगदान कर उन्हें नया जीवन दान मिलने से अंदरूनी खुशी मिलती है.

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