Tags » Fair And Lovely

My dark friend.

When I was small during my summer holidays I use to go to meet my grandma and spend my holidays there. During those days I made a friend her name was “Rajkumari”. 353 more words

Celebrates

Satya's Yellow Shirt

It was sometime in March-April of 2001. Prem was in his standard ninth; and he was very sad. Not because he was leaving the school and his friends but because he won’t be seeing his lover. 579 more words

#BeBold #BeBeautiful

“Mirror mirror on the wall, who’s the fairest of them all?”- How many of us have asked this question? I guess pretty much all of us have done it at some point or the other in our life. 467 more words

Beautiful

An Ode to Advertising

Advertisements have always had a distinct charm of a story untold, a narrative waiting to be told. I have been particularly fascinated by the world of advertisements and the power of storytelling, be it 24 frames per second or a picture etched in our minds for eternity. 497 more words

हम काले है तो क्या हुआ दिलवाले है!

It all starts when you are young. That moment when you are born, it’s sometimes your loving relatives or over-friendly neighbors who compare you with your siblings and how you would have looked a little better with a lighter skin. 609 more words

India

बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद 

हेलो दोस्तों ! आपका तिकड़मबाज आपके लिए आज एक और झुंझलाहट लेकर आया है। माफ़ कीजिएगा मुझे बाज़ार में और कुछ मिलता ही नहीं है। हाँ तो मैं आपको यह बताना चाह रहा था की आज एस्ट्रो मुझसे कह रही थी की लबोटा अगर तुम बाज़ार जाओ तो मेरे लिए फेयर एंड लवली लेकर आना। मैंने भी कह दिया की तुम कितनी भी क्रीम लगा लो लेकिन एक बात याद रखना मैडम की क्रीम लगा लेने से चोंच जैसा मुहँ ठीक नहीं होता। मैडम चिढ़ कर बोलीं – “ बन्दर क्या जाने अदरक का स्वाद ” । इस मुहावरे के अनुसार मैं एक ऐसा बन्दर हूँ जिसे अदरक का स्वाद नहीं मालूम है। अब आप ही बताओ यारों की बन्दर को अदरक का स्वाद जानने की जरुरत ही क्या है। अगर उसे अदरक का स्वाद जानने की जरुरत होती तो वह सारा दिन इस पेड़ से उस पेड़ के चक्कर क्यों काटता ?  अदरक फ्री में तो मिलता नहीं है बेचारे को कोई ना कोई काम करना पड़ता। 

 

अब सोचने की बात यह है की बन्दर ऐसा क्या काम करे जिससे वो बेचारा अदरक का स्वाद जानने के काबिल हो जाये। काम ढूंढेगा तो उसको मिलेगा तमाशा करने का काम। लो जी अदरक का स्वाद जानने के लिए बन्दर को सारे दिन नाचना पड़ेगा तब जाकर उसे पांच छः रुपये मिलेंगे। फिर बन्दर जाएगा बाज़ार। बाज़ार में बन्दर को देख सारे दूकान वाले इतना असुरक्षित महसूस करते हैं जितना महमूद गजनवी के आक्रमण के समय भारत की जनता महसूस करती होगी। बनते हैं धन्ना सेठ। उनके डंडो से बचते बचाते जैसे तैसे बन्दर अदरक खरीद के लाये। अब उसे कैसे समझ आएगा की अदरक का करना क्या है। इतनी मेहनत करके भी वो उसे खायेगा नहीं बल्कि तोड़ ताड़ कर फेंक देगा। 

 

 

कुल मिलाकर यह बात भी साबित होती है की अगर बन्दर अदरक का स्वाद नहीं जानता तो अदरक भी बन्दर का मिजाज नहीं जानता।जनता को इतनी सीधी सी बात समझाने के लिए मुझे इतनी मेहनत करनी पड़ेगी , मुझे यह नहीं पता था। फिलहाल मैं एस्ट्रो से इस बात पर पिछले दो घंटे से बहस कर रहा हूँ और मैंने उसको क्रीम लाकर नहीं दी है। 

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