Tags » Female Foeticide

मैं ही कहानी

मैं उस पार की कहानी हुं.

हर गलत राह मुड़ कर देखी है,

हर गलत चाह कर के देखी है,

फ़िर सही गलत की परिभाषा भी,

Poetry

Why I stopped using the term 'female foeticide'

After reading Nivedita Menon two years back, I realised that I’ve been using the term ‘female foeticide’ – and it wasn’t ideal. I made the move to using the words ‘abortion of the female foetus’. 536 more words

Gender

बेटी बचाओ...

कन्या भ्रूण हत्या का विचार
मुझे झकझोर देता है,
चीर देता है अंदर तक
मेरी यह कृति, यह रचना –
कविता नहीं, क्रंदन है –
एक करुण क्रंदन !
उन अजन्मी आत्माओं के लिये –
जो कोख में ही उजड़ गईं
और पैदा हो भी गईं तो
माँ की गोद न मिली
फेंक दी गईं किसी कचरेदान में.
यह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा
कितना खोखला है
यदि बेटी को बचा भी लिया
तो क्या गारंटी कि आगे भी बच पायेगी?
कोई बलात्कारी आ कर बलात्कार करेगा
या फिर दहेज की अग्नि जलायेगी
क्या पता कोई एसिड ही डाल दे?
या हार कर खुद ही भस्म हो जायेगी.

कन्या पूजन ( कविता )



नवरात्रि की अष्टमी तिथि ,
प्रौढ़ होते, धनवान दम्पति ,
अपनी दरिद्र काम वालियों
की पुत्रियों के चरण
अपने कर कमलों से
प्यार से प्रक्षालन कर रहे थे.

अचरज से कोई पूछ बैठा ,
यह क्या कर रहें हैं आप दोनों ?

अश्रुपूर्ण नत नयनों से कहा –
“काश, हमारी भी प्यारी संतान होती.”
सब कुछ है हमारे पास ,
बस एक यही कमी है ,

एक ठंडी आह के साथ कहा –
प्रायश्चित कर रहें है ,
आती हुई लक्ष्मी को
गर्भ से ही वापस लौटाने का.

Source: कन्या पूजन ( कविता )

Let Me Live

Dadda and Momma were so happy and ecstatic, so was I. I loved them both so much, just as I loved my brother, so fiercely. I loved Dadda’s tender voice and Momma’s soothing touch, it made me feel precious. 310 more words

Literature

The Precious Champakali

 

The Characters:

  1. Narrator
  2. Munna
  3. Mother
  4. Manager
  5. Chunna
  6. Champakali

Scene 1: At Home

Narrator: Good Morning, Everyone!

The skit ‘The Precious Champakali –  I’m sure you would enjoy watching it and laugh aloud until you cry, that’s my guarantee( a little stressed). 1,652 more words

Future Reality

कितनी हसरत थी हमें.....

कितनी हसरत थी हमें,
अपनी बेटी को गोद में खिलाने की।
ईश्वर ने दिया वो वरदान,
मेरे घर आया फिर से किशन कन्हैया जैसा नन्हा शैतान।

देवी लक्ष्मी तो न आईं मेरे आँगन में,
पर आए नारायण लेकर कृष्ण का रूप।
खुशकिस्मत हैं वो जिनके घर होता है बेटी का आगमन,
मेरी ईच्छा अधूरी रह गई और बेटी के अभाव में सूना रह गया मेरा घर-आँगन।

बेटी को बचाओ और न करो कन्या भ्रूण हत्या।
खुशी मनाओ कि मिली है या मिलने वाली है तुम्हे बेटी,
क्योंकि बेटी के रोम-रोम में बसा होता है अपने माता-पिता के लिए प्यार।
इसलिए मत करो बेटी रूपी वरदान का बहिष्कार और तिरस्कार।

कन्या को भी दो जीने का अधिकार,
करो उसकी भी ईच्छाएँ पूरी और समाज में दो उसे भी सम्मान।
लड़की को भी दो बराबरी का दर्जा, रूढ़िवादी का चश्मा उतार।
बेटी भी बन सकती है तुम्हारे बुढापे का सहारा बन कर श्रवण कुमार।

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