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Target, Toilette

Jillian was under the impression that, like Nancy Spungen, she had learned how to handle her hangovers. She had perfected the method of morning self-care, a science that consisted of combining a refreshing orange juice, two ibuprofen and a splash of coconut water to follow. 1,027 more words

Genna Rivieccio

DEJA VU [EPISODE THREE]

Decades ago, a lady had just bagged her bachelors degree in economics with honours. Months later, she begun to apply for jobs with her qualification. 1,210 more words

FICTIONS

DEJA VU [EPISODE TWO]

And then there was Amanda. Ohh such a ravishing deity. Our hearts beat alike. Amanda promised she was never gonna leave cause she always thought we were made for each other. 919 more words

FICTIONS

सिगरेट

बहुत देर तक जब उनकी चुप्पी और मेरी खामोशी बातें कर के थक जाते, तो कबीर चले जाने का इशारा कर देते थे। मैंने कभी रोका नहीं उन्हें। अपना सामान उठाते और बस चले जाते कबीर। ऐशट्रे और उसमे रखी उनकी आधी फूँकी हुई सिगरेटे संभाल लेती थी।

जब भी कोई पूछता ये सिगरेट की आदत कहाँ से लगी, मैं उनकी यादों में फूँकी उनकी आधी रखी सिगरेट गिना देती थी।

सिगरेट को जब मैं अपने लबों पर रखती थी, एक उनके साथ होने का एहसास पा लेती थी। उठते धुएं में उनकी ख़ुशबू रहती थी| अब बस आदतें ही बाकि हैं|

Fictions

A JOB FOR THE BOYS -by Linda Angel

The interview scene was typical: one besuited man, one potentially impressive woman, one office.

“You know there’s an easy way to – let’s say … … 72 more words

FICTIONS

Broken promises..

Hey there.! Greetings to you Tomboy.

Only a few days have passed since I parted from you and already it is as though I had been a decade away from you, although I can avow that not one hour has passed without your memory which has become a very much close companion to my thoughts. 231 more words

Life

लेट हो जाऊंगा

टिक टिक टिक… घड़ी जब रात के अँधेरे में बात कर रही थी, रचित का टेक्स्ट आया मोबाइल पर।

“मैं लेट हो जाऊंगा। तुम सो जाओ।”

अभी इंतज़ार से थक कर सोने ही लगी थी के दरवाज़े पर दस्तक हुई। पाऊ अपनी ही आहत से डर रहे थे, और जैसे सारा शहर मुझे ही सुनाई दे रहा हो। दरवाज़े से झाँका तो, रचित खड़ा था। फिर उसने अपने ही फ़ोन से कॉल किया, ये अजीब लगा।

“हेल्लो, आप रचित गुप्ता के घर से बोल रही हैं। अभी कुछ देर पहले रिंग रोड पर बाइक का एक्सीडेंट हुआ हैं, आप आ कर यहाँ रचित की बॉडी की शनास्त कर लीजिए।” दूसरी ओर से इंस्पेक्टर ने कहा।

रचित ने वादा भी निभाया आने का, और मैं पूछ भी न सकी उसके सर पर चोट कैसे लगी।

Fictions