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भारत के प्रमुख व्यक्ति एवं उनके कार्य

1.” ओउम जय जगदीश हरे “आरती के लेखक- श्रद्धाराम फिल्लौरी

2.वन महोत्सव के जनक – के.एम. मुंशी

3.सिनेमा के जनक – दादा साहब फाल्के

4.पंचायती राज के जनक – बलवन्त राय मेहता 93 more words

General Knowledge

देशभक्त अच्युत पटवर्धन

5 फरवरी/जन्म-दिन

भारत को स्वतन्त्र कराने हेतु अनेक जेलयात्राएँ करने वाले अच्युत पटवर्धन का जन्म 5 फरवरी, 1905 को हुआ था। स्नातकोत्तर उपाधि पाने के बाद इन्होंने 1932 तक अर्थशास्त्र पढ़ाया। अर्थशास्त्र के अध्ययन के दौरान इनके ध्यान में आया कि अंग्रेजों ने भारत की अर्थव्यवस्था को किस प्रकार योजनाबद्ध रूप से चौपट किया है। इससे वे गांधी जी के विचारों की ओर आकर्षित हुए। उनका मत था कि देश को स्वतन्त्र कराने के लिए कोई भी मार्ग अनुचित नहीं है। अतः वे क्रान्तिकारियों का भी सहयोग करने लगे।
गांधी जी द्वारा प्रारम्भ किये गये अनेक आन्दोलनों में वे जेल गये। 1942 में ‘भारत छोड़ो’ आन्दोलन के समय जब अधिकांश नेता पकड़े गये, तो श्री पटवर्धन भूमिगत हो गये और स्थान-स्थान पर जाकर आन्दोलन को गति देते रहे। सरकार ने इन पर तीन लाख रु0 का पुरस्कार घोषित किया; पर ये तीन साल तक पुलिस-प्रशासन की पकड़ में नहीं आये।
उन्होंने मुख्यतः महाराष्ट्र में सतारा, नन्दुरवार और महाड़ में ‘लोकशक्ति’ के नाम से आन्दोलन चलाया। एक समय तो यह आन्दोलन इतना प्रबल हो उठा था कि सतारा में समानान्तर सरकार ही गठित हो गयी। इसलिए उस समय उन्हें ‘सतारा के शेर’ और ‘सत्याग्रह के सिंह’ जैसी उपाधियाँ दी गयीं।
स्वाधीनता प्राप्ति के बाद श्री अच्युत पटवर्धन को कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया गया; पर कुछ समय बाद ही उनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया। अब वे समाजवादी विचारों की ओर आकर्षित हुए और सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्य बने; पर यहाँ भी उनका मन नहीं लगा और 1950 में उन्होंने राजनीति को सदा के लिए अलविदा कह दिया।
उन दिनों श्री जयप्रकाश नारायण भी सर्वोदय के माध्यम से देश परिवर्तन का प्रयास कर रहे थे। श्री पटवर्धन की उनसे अच्छी मित्रता हो गयी। उन्होंने जयप्रकाश जी को एक पत्र लिखा, जिससे उनकी मनोभावना प्रकट होती है – ‘‘अब तो सत्ता की राजनीति ही हमारा ध्येय हो गयी है। हमारा सामाजिक चिन्तन सत्तावादी चिन्तन हो गया है। दल के अन्दर और बाहर यही भावना जाग रही है। उसके कारण व्यक्ति पूजा पनप रही है और सारा सामाजिक जीवन कलुषित हो गया है। सत्ता पाने के लिए लोकजीवन में निर्दयता और निष्ठुरता पनप रही है। भाईचारा और दूसरों के प्रति उदारता समाप्त सी हो रही है। इसे बदलने का कोई तात्कालिक उपाय भी नहीं दिखता।’’
चन्द्रशेखर धर्माधिकारी की एक पुस्तक की प्रस्तावना में उन्होंने लिखा, ‘‘हम यह अनदेखा नहीं कर सकते कि समाज में जो निहित स्वार्थ और अन्ध श्रद्धाएँ हैं, उनके दबाव में सारी प्रगति ठिठक रही है। लाखों भारतीय अमानवीय परिस्थितियों में जीते-मरते हैं।’’
उन पर जे.कृष्णमूर्ति और ऐनी बेसेण्ट के विचारों का व्यापक प्रभाव था। एक बार जब किसी ने उनसे कहा कि उन्होंने देश के लिए जो कष्ट सहे हैं, उनकी चर्चा क्यों नहीं करते; उन्हें लिखते क्यों नहीं ? तो उन्होंने हँस कर कहा कि अनेक लोग ऐसे हैं, जिन्होंने देश की स्वतन्त्रता के लिए मुझसे भी अधिक कष्ट सहे हैं।
जीवन के अन्तिम दिनों में वे महाराष्ट्र में बन्धुता और समता के आधार पर आदर्श ग्राम निर्माण के प्रयास में लगे थे। निर्धन, निर्बल और सरल चित्त वनवासियों को उन्होंने अपना आराध्य बनाया। 1992 में लखनऊ विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम में उन्होंने अपने न्यास का सारा काम श्री नानाजी देशमुख को सौंपने की बात उनसे कही; पर इसे कार्यरूप में परिणत होने से पूर्व ही काशी में उनका देहावसान हो गया।
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Indian History

I want my Death to mean something

I wish I was born during the Freedom Struggle of the Country. Not because I wanted to see how we got independence, but because I wanted to meet the death of the same kind as our Freedom Fighters had met. 324 more words

Best Of Me

आधुनिक भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण तिथियाँ

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1.भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की
स्थापना→→→1885 ई.
2. बंग-भंग आंदोलन(स्वदेशी आंदोलन)→→→1905
ई.
3. मुस्लिम लीग की
स्थापना→→→1906 ई.
4.कांग्रेस का बंटवारा→→→1907 ई.
5. होमरूल आंदोलन1916 ई.
6. लखनऊ पैक्ट→→→दिसंबर 1916 ई.
7. मांटेग्यू घोषणा→→→20 अगस्त 1917 ई.
8. रौलेट एक्ट→→→19 मार्च 1919 ई.
9. जालियांवाला बाग हत्याकांड→→→13 अप्रैल 1919 ई.
10. खिलाफत आंदोलन→→→1919 ई.
11. हंटर कमिटी की रिपोर्ट
प्रकाशित→→→18 मई 1920 ई.
12. कांग्रेस का नागपुर अधिवेशन→→→दिसंबर 1920 ई.
13. असहयोग आंदोलन की शुरुआत→→→1
अगस्त 1920 ई.
14. चौरी-चौरा कांड→→→5 फरवरी
1922 ई.
15. स्वराज्य पार्टी की स्थापना→→→1
जनवरी 1923 ई.
16. हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन→→→अक्टूबर 1924 ई.
17. साइमन कमीशन की
नियुक्ति→→→8 नवंबर 1927 ई.
18. साइमन कमीशन का भारत आगमन→→→3
फरवरी 1928 ई.
19. नेहरू रिपोर्ट→→→अगस्त 1928 ई.
20. बारदौली सत्याग्रह→→→अक्टूबर 1928 ई.
21. लाहौर पड्यंत्र केस→→→8 अप्रैल 1929 ई.
22. कांग्रेस का लाहौर अधिवेशनदिसंबर 1929 ई.
23. स्वाधीनता दिवस की घोषणा→→→2
जनवरी 1930 ई.
24. नमक सत्याग्रह→→→12 मार्च 1930 ई. से 5 अप्रैल
1930ई. तक
25. सविनय अवज्ञा आंदोलन→→→6 अप्रैल 1930 ई.
26. प्रथम गोलमेज आंदोलन→→→12 नवंबर 1930 ई.
27. गांधी-इरविन समझौता→→→8 मार्च 1931 ई.
28.द्वितीय गोलमेज सम्मेलन→→→7 सितंबर 1931
ई.
29. कम्युनल अवार्ड (साम्प्रदायिक पंचाट)→→→16 अगस्त
1932 ई.
30.पूना पैक्ट→→→सितंबर 1932 ई
31. तृतीय गोलमेज सम्मेलन→→→17 नवंबर
1932 ई.
32. कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का गठन→→→मई
1934 ई.
33. फॉरवर्ड ब्लाक का गठन→→→1 मई 1939 ई.
34. मुक्ति दिवस→→→22 दिसंबर 1939 ई.
35. पाकिस्तान की मांग→→→24 मार्च 1940 ई.
36. अगस्त प्रस्ताव→→→8 अगस्त 1940 ई.
37. क्रिप्स मिशन का प्रस्ताव→→→मार्च 1942 ई.
38. भारत छोड़ो प्रस्ताव→→→8 अगस्त 1942 ई.
39. शिमला सम्मेलन→→→25 जून 1945 ई.
40. नौसेना का विद्रोह→→→19 फरवरी 1946 ई.
41. प्रधानमंत्री एटली की
घोषणा→→→15 मार्च 1946 ई.
42. कैबिनेट मिशन का आगमन→→→24 मार्च 1946 ई.
43. प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस→→→16 अगस्त
1946 ई.
44. अंतरिम सरकार की स्थापना→→→2 सितंबर
1946 ई.
45. माउंटबेटन योजना→→→3 जून 1947 ई.

Do You Know

#AmazingFact : The three-day long Republic Day celebrations in India end on January 29 with the Beating Retreat ceremony.

Amazing Facts

2015 GSI MAINS Q

How different would have been the achievement of Indian independence without Mahatma Gandhi? Discuss.

2015 MAINS QUESTIONS GS1 SOLVED

Liberty cannot be preserved without general knowledge among the people.
– John Adams
# JohnAdams

Thought Of The Day