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Avalon expands to India with Ganges cruises

For 2019, Avalon Waterways has packaged Ganges River cruises in several itineraries.

For the cruise portion, guests board the 56-passenger Ganges Voyager for a six-day, roundtrip cruise from Kolkata. 152 more words

Avalon Waterways

रिश्तों की शाम

वो बस एक शाम नहीं थी, वो एक ऐसी शाम थी जो फिर कभी मेरी जिंदगी में नहीं आने वाली थी। अस्सी घाट पे पिज़्ज़ेरिया की बगल वाली सीढ़ियों पे बैठा मैं सोच रहा था, उन बीतें पलों के बारे में, जब यहीं इसी जगह बैठे मैं घंटों तक उनका इंतजार करता था, उन्हें दूर से आता देख मैं इंतजार का ग़म भूल कुछ ऐसे खुश होता जैसे किसी प्यासे को नदी का किनारा दिख जाए।
हम अक्सर घाट पर घंटो बैठ बातें करते या कभी कभी नाव ले उस पर चले जाते या दशाश्वमेध तक एक चक्कर लगा आते। मुझे गंगा जी का किनारा, नाव, घाट और ‘वो’ ऐसे लगते जैसे इन सब के बिना मेरा अस्तित्व ही नहीं।

आज फिर से एक बार मैं उनके इन्तेजार में बैठा था पर आज ये वक़्त बहुत तेजी से गुजर रहा था, मैं अस्सी की उन्ही सीढ़ियों पे बैठा उस भीड़ में उनको ढूढ़ने का प्रयास करने लगा पर आज उनके मिल जाने का डर भी था।
फरवरी के आखरी दिन चल रहे थे, महादेव का महापर्व आने को था – शिवरात्रि, शाम को इस वक़्त ठंड तो नहीं थी पर हवा में सिहरन थी। ढलते हुए सूर्य की किरणें घाटो पे बने बड़े बड़े मकानों से बचती हुई गंगा जी पे पड़ रही थी, व लाली ऐसी थी जैसे किसी सुहागन के मांग का सिंदूर। मुझे छोड़ कर उस वक़्त घाट पे सब कुछ सामान्य ही था, मेरे अंदर की कसमकश से बाहर के उस बनारस पर कोई असर नहीं था। उस शाम भी हर कोई अपने आप में, अपनी मस्ती में चला जा रहा था। दूर घाट के किनारे कुछ श्रद्धालुओं की भीड़ थी वो संध्या स्नान कर पूजन की थाली सजा माँ गंगा की पूजा करने की तैयारी में थे।
वही पास में एक अंग्रेज जोड़ा अपने महँगे कैमरे की लेंसों से उन घटनाओं को कैद करते हुए सदा के लिए संजोने में लगा हुआ था, दूसरी ओर एक साधु शायद रामायण या गीता का पाठ कर रहा था और पास ही कुछ स्कूली बच्चे घाट किनारे क्रिकेट खेल रहे थे। थोड़ा दूर उस भीड़ से जरा हटकर कुछ प्रेमी जोड़े बैठे थे वो इश्क़ का नयापन उनके हाव भाव से साफ झलकता था वो बातों बातों में खिलखिला के हँसना साफ कहता था अभी बहुत कुछ है उनके पास बाँटने को, कहने को, समझने को, समझाने को, इस घाट के शोर और एकांत में उनकी अपनी एक अलग ही दुनियाँ थी। वहीं दाहिनी ओर एक बुजुर्ग शायद अपने बेटे या बेटी के शादी का कार्ड माँ गंगा को देने आए थे, हमारे यहां एक रिवाज है जब किसी की शादी हो तो माँ गंगा और बाबा भोलेनाथ को सबसे पहले कार्ड दिया जाता है।
जब नजरे सारे घाट का दूर दूर तक तस्सली से भ्रमण कर आई तो अपने पास ही मैंने एक बुजुर्ग दम्पति को आता देखा, कैसे वो एक दूसरे को सहारा दिए घाट की ऊँची सीढियों को बौना बना ऊपर चढ़ रहे थे, कुछ ऐसे ही उन्होंने जीवन के सभी उतार चढ़ाव पर किये होंगें।
इन सभी दृश्यों को ओझल कर मन कहीं दूर महा शमशान की ओर ले गया क्योंकि केवल वही सास्वत सत्य है जहाँ इस जीवन के सभी आडम्बर त्याग मनुष्य परब्रह्म को प्राप्त करने की यात्रा पे निकल जाता है, ये रिश्ते-नाते, दुख-सुख, प्यार-नफरत सब यही रह जाता है और साथ कुछ नहीं जाता। वहाँ लोग अपनो की मिट्टी के साथ शांत बैठे होते है, हाँ मिट्टी क्योंकि आत्मा के शरीर त्यागते ही यह देह बस माटी के समान है। वहां बैठा हर शख्स मन में उस निर्जीव पड़े शरीर से जुड़े अच्छे बुरे दिन को याद कर रहा होता है, सारा जीवन कर्म एक सिनेमा के रील के जैसे आँखों के सामने से गुजरता चला जाता है, रील दर रील सारे किस्से याद आते है, मन ही मन इंसान ये सोचता है कि काश कुछ दिन और रहते तो ये होता, वो होता, ऐसा होता , वैसा होता, पर सच ये है कि कुछ नहीं होता क्योंकि जब तक वो था उसकि अहमियत इतनी न थी और न होती जितनी मरने के बाद है, कुछ ही देर में यह शरीर मिट्टी में मिल जाएगा और यही ख़्याल इन सब विचारों, लेकिन,किन्तु-परंतु की जननी है।

ये पहली बार था जब से होश संभाला था कि जिंदगी के सभी पहलू मेरे आंखों के आगे से गुजर गये , हो सकता है पहले भी गुजरे हो पर तब कभी महसूस नहीं हुआ क्योंकि तब ऐसे हालात न थे और वो कहते है ना “जिंदगी जब मायूस होती है तभी महसूस होती है”। और जब ऐसा हो तो कभी-कभी इंसान का ऊपर वाले से भरोसा उठ जाता है या यूँ कहे कि उसका डर भी समाप्त हो जाता है। उस शाम मैंने भी कुछ ऐसा ही महसूस किया उस भीड़ में उनका इंतजार करते हुए। उससे दूर जाने के एहसास ने जैसे सब बदल दिया था। वो घाट, वो शाम, वो धीमी होती सूर्य की किरणों की लौ, वो पानी मे चलती नाव जैसे सब ठहर गया था या शायद मैं किसी शून्य की ओर अग्रसर हो रहा था।

Tourist on the Ganga

Everyone is gathered at the Ganga,
So why should I not come and watch,
To see the black water for myself,
See the mud bright with refuse, 133 more words

Poetry

By the Ganges

Being disturbed, when peace is what you desire,

Away, then, you run from the city’s maddening fire,

And rest by the gurgling Ganges,

Among the lofty Himalayan ranges!

Copyright © 2017 RAMU DAS

Poems

Walking in the narrow streets of Varanasi

I did many walks in Varanasi, I was even brave enough to be on Sonu’s motorbike at one point, but it takes some planning and negotiations to walk around the old city. 214 more words

Photography

From Varanasi straight to heaven

When I was doing my itinerary for India a holistic friend suggested to visit Varanasi.  I must admit I never heard of Varanasi or Benares as it is also known or where it was located. 198 more words

Photography

Sunrise over Varanasi : Tuesday Photo Challenge – Exotic


©Photo of Sunrise over Varanasi – Pranab Sarma, 2018

As the sun came up over the Ganga river ( River Ganges ) on the morning of December 18, 2017 as I was walking the ghats in Varanasi, the sky was covered by a flock of birds ( seagulls ) and nearly covered the rising sun.  36 more words

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