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Sinning...

I erected a mausoleum for love

A great sin to do so

Even worse

I hurt you

 

So what if you forget God

The world matters even less… 126 more words

Ghazal

Alphaaz [album] – Mustafa Sabuwala


An entrepreneur who has diversified into becoming a ghazal singer, Mustafa Sabuwala, extends his musical passion on ‘Alphaaz’, his album. The compositional style by music composer Shubhankar and his rhythmic instincts are strong points, effectively supporting the comparative simplicity of Mustafa’s lyrics. 101 more words

इश्क की आग

ज़ख्मों को आंसुओं के मरहम से भरते चले गए

बुझने न दी इश्क की आग, जलते चले गए

उदास आँखों में मुहब्बत के ख़्वाबों को सजा

तन्हाईयों के पाँव से बेपरवाह कुचलते चले गए

हर एक ख्वाहिश को गर्क का जामा पहना कर

ख़ुशी के हर्फ़ से दिल के पन्ने सजोते चले गए

दर्द ए मुहब्बत के ताबीज को बांध बाजू में वक़्त के

मुट्ठी में कैद कर दर्द, इश्क-ए-कलमा लिखते चले गये

तकदीर के पृष्ठ पर प्यार के अफ़साने छोड़कर

बन अजनबी नस्तर-ए-नज़र से कत्ल करते चले गए

तीरगी का जंगल सजा हर एक राह पर “गुंजन”

याद में बेगैरत मुहब्बत की चिराग जलाते चले गए ।

—–गुंजन अग्रवाल

Ghazal

मेरा रमजान बन जाओ..

मेरी किस्मत,मेरा मज़हब ,मेरा ईमान बन जाओ ,
चाँद को रुख़सतें दे दो ,मेरा रमजान बन जाओ.

POETRY

हम भागते रहे..

खुली आँखो से एक ख्वाब को हम ताकते रहे
सारा जमाना सो गया हम जागते रहे

एक लम्हा भी कभी चैन से बैठे न उसके साथ
जिसे पाने के लिये उम्र भर हम भागते रहे……!!!

POETRY

क्यूँ नहीं है ?,,,

कोई रस्ता ,निकलता क्यूँ नहीं है ,?
तुम्हारा दिल पिघलता क्यूँ नहीं है?

मोहब्बत हो गई क्या सच में मुझको,
मेरा दिल अब फिसलता क्यूँ नहीं है ?

POETRY

हमने बहुत कोशिश की..

हमने बहुत कोशिश की ,फिर भी हादसे ऐसे
जाने कितनी बार हुए,
ज़हन की सलाखों में ,जितने ख्वाब कैदी थे
सब के सब फरार हुए ..

अपनी ऐसी फितरत कि,,जितने यार थे अपने
उसको दुष्ट लगते थे ,
उसपे ऐसी किस्मत कि ,जितने अपने दुश्मन थे
सरे उसके यार हुए..

कितने जुल्म ढाएगा ,,कब तलक रुलाएगा
अब तो कुछ रहम कर दे ,
तुझको कैसे समझाएं, कितनी मुश्किलों से ये
इतने साल पार हुए ..

POETRY