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Dil se tera khayaal na jaaye to kya karoon

This article is written by Sadanand Kamath, a fellow enthusiast of Hindi movie music and a contributor to this blog. This article is meant to be posted in atulsongaday.me. 657 more words

Yearwise Breakup Of Songs

Ajeeb Baat Hai

इंसान हो गया अजीब, अजीब बात हैं
देश अमीर जनता गरीब, अजीब बात है

पैदा करे अनाज वो, खाने को तरसे
खुद फांसी उनका नसीब, अजीब बात है

मैं आगे बढ़ कर भी, पीछे लौट आया
जो दोस्त हैं वही रकीब, अजीब बात है

खुशहाली का वादा कर, लूटे सबके घर
नेता गण फिरभी हबीब, अजीब बात है

पास रहकर भी रहती हैं दूरियां ‘मिलन’
जितने दूर उतने करीब, अजीब बात है

मिलन “मोनी”

Poetry

Ghazal: Her Ik Ada ney teri mustaqil hasaaya tha

Her ik Ada ney teri mustaqil hassaiya thaa
khushi ney aankh ko apni Lahu rulaya thaa

Dayar e gher hai chaman, jahan khiley Gul sey… 73 more words

Poetry

اکثر

ضمیر اٹھاتا ہے ایسے سوالات اکثر

نہیں ملتے جن کے جوابات اکثر

محسوس کرنے کی عادت بنائو

بیان نہیں ہو پاتے جذ بات اکثر

جیت کر بھی ہارنا پڑتا ہے

کر دیتے ہیں مجبور حالات اکثر

رونق محفل ہوتے ہیں جو دن کو

تنہا گزارتے ہیں رات اکثر

وفا شرط نہیں اک روایت ہے

اور ٹوٹ جاتی ہیں روایات اکثر

وہ نہ آئیں گے لوٹ کر شاہیں

رلاتے ہیں جن کے خیالات اکثر

Shaheen

Nigahon mein khumar aata hua mehsoos hota hai

निगाहों में ख़ुमार आता हुआ महसूस होता है
तसव्वुर जाम छलकाता हुआ महसूस होता है

ख़िरामे- नाज़ -और उनका ख़िरामे-नाज़ क्या कहना
ज़माना ठोकरें खाता हुआ महसूस होता है

ये एहसासे-जवानी को छुपाने की हसीं कोशिश
कोई अपने से शर्माता हुआ महसूस होता है

तसव्वुर एक ज़ेहनी जुस्तजू का नाम है शायद
दिल उनको ढूँढ कर लाता हुआ महसूस होता है

किसी की नुक़रई  पाज़ेब की झंकार के सदक़े
मुझे सारा जहाँ गाता हुआ महसूस होता है

‘क़तील’अब दिल की धड़कन बन गई है चाप क़दमों की
कोई मेरी तरफ़ आता हुआ महसूस होता है

Qateel shifai

Ghazal

Tumhari anjuman se uth ke deewane kahan jate

तुम्हारी अंजुमन से उठ के दीवाने कहाँ जाते 
जो वाबस्ता हुए, तुमसे, वो अफ़साने कहाँ जाते

निकलकर दैरो-काबा से अगर मिलता न मैख़ाना 
तो ठुकराए हुए इंसाँ खुदा जाने कहाँ जाते 

तुम्हारी बेरुख़ी ने लाज रख ली बादाखाने की 
तुम आँखों से पिला देते तो पैमाने कहाँ जाते 

चलो अच्छा हुआ काम आ गई दीवानगी अपनी 
वगरना हम जमाने-भर को समझाने कहाँ जाते 

क़तील अपना मुकद्दर ग़म से बेगाना अगर होता 
तो फिर अपने पराए हम से पहचाने कहाँ जाते

Qateel shifai

Ghazal