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Tum jano tum ko gair se jo rasm-o-raah ho

तुम जानो तुम को ग़ैर से जो रस्म ओ राह हो
मुझ को भी पूछते रहो तो क्या गुनाह हो

बचते नहीं मुवाख़ज़ा-ए-रोज-ए-हश्र से
क़ातिल अगर रक़ीब है तो तुम गवाह हो 8 more words

Ghazal

Rahiye ab aisi jagah chalkar jaha koi na ho

रहिये अब ऐसी जगह चलकर जहाँ कोई न हो
हमसुख़न कोई न हो और हमज़बाँ कोई न हो

बेदर-ओ-दीवार सा इक घर बनाया चाहिये
कोई हमसाया न हो और पासबाँ कोई न हो

पड़िये गर बीमार तो कोई न हो तीमारदार
और अगर मर जाईये तो नौहाख़्वाँ कोई न हो

Mirza Ghalib

Ghazal

Gham-e-duniya se gar payi bhi fursat sar uthane ki

ग़म-ए-दुनिया से गर पाई भी फ़ुर्सत सर उठाने की 
फ़लक का देखना तक़रीब तेरे याद आने की 

खुलेगा किस तरह मज़मूँ मेरे मक्तूब का यारब  19 more words

Ghazal

Ishq mujhko nahi vehshat hi sahi

इश्क़ मुझको नहीं, वहशत ही सही 
मेरी वहशत, तेरी शोहरत ही सही 

क़तअ़ कीजे न तअ़ल्लुक़ हम से 
कुछ नहीं है, तो अ़दावत ही सही 

Ghazal

Sadgi par uski mar jane ki hasrat dil me hai

सादगी पर उस की मर जाने की हसरत दिल में है
बस नहीं चलता कि फिर ख़न्जर कफ़-ए-क़ातिल में है

देखना तक़रीर की लज़्ज़त कि जो उसने कहा 26 more words

Ghazal

Dil se teri nigaah jigar tak utar gayi

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई
दोनों को इक अदा में रज़ामन्द कर गई

चाक़ हो गया है सीना ख़ुशा लज़्ज़त-ए-फ़राग़ 
तक्लीफ़-ए-पर्दादारी-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर गई 32 more words

Ghazal

Koi din gar zindgaani aur hai

कोई दिन गर ज़िंदगानी और है 
अपने जी में हमने ठानी और है 

आतिश-ए-दोज़ख़ में ये गर्मी कहाँ 
सोज़-ए-ग़म-हाए-निहानी और है 

बारहा देखीं हैं उनकी रंजिशें  8 more words

Ghazal