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Maykadon Me

मयकदों में दिन-रात बस यही बात हुई है,
सुबहोशाम ग़म से जो मेरी मुलाकात हुई है,

वो परेशां रहें तो चैन, हमे भी नहीं मिलता,
हालत मेरी यूँ ही तो नहीं, बदहवास हुई है,

किस ग़म के लिए कितनी है मुनासिब शराब,
पैमानों से इस ही बात पर तो तकरार हुई है,

गमें दिल से मिटा देती है यह गमो के निशाँ,
दीवानों में ये इसलिए इतनी मशहूर हुई है,

जब तक कदम न लडखडाये पीने से फायदा,
रिन्दों को तभी इससे मोहब्ब्त बेहिसाब हुई है.

शराब अच्छी है या बुरी इसका फैसला करे,
कभी दवा तो कभी दारु से पहचान हुई है,

मयकदों में दिन-रात बस यही बात हुई है,
सुबहोशाम ग़म से जो मेरी मुलाकात हुई है.

Meharbaani Karta hun

मैं आज भी उन पर महरबानी करता हूँ,
मैं अपने गमो से पूरी बफादारी करता हूँ,

लहजा मेरा आज भी बदला नहीं है ज़रा,
बिंदास अपने आपसे अदाकारी करता हूँ,

निकल गए बहुत आगे इस ज़िन्दगी में,
मैं जिन ज़ख्मों से इमानदारी करता हूँ,

चुभें जब फूल तो काँटों से क्या उम्मीद,
मैं दोनों की ख़ुशी से तीमारदारी करता हूँ,

कोई मेरे नज़दीक आए तो समझे शायद,
मैं किस तरह दर्द की तर्ज़ुबानी करता हूँ,

मैं आज भी उन पर महरबानी करता हूँ,
मैं अपने गमो से पूरी बफादारी करता हूँ,

Ushi Se Hui

मोहब्ब्त भी हुई, तो उसी से हुई,
अदावत भी हुई तो, उसी से हुई,

जिनकी दोस्ती पर नाज़ था हमें,
शिकस्त भी हुई तो, उसी से हुई,

जान की बाज़ी लगा दी इशारे पर,
शिकायत भी हुई तो, उसी से हुई,

मेरे साये की तरह चल रहा साथ,
तन्हाईयां भी हुई तो, उसी से हुई.

शोहरत मेरी जिनसे बावस्ता रही,
रुस्वाइयाँ भी हुईं तो, उसी से हुई.

सरे बिस्तरे मार्ग पर जाते जाते,
मुलाक़ात भी हुई तो, उसी से हुई,

मोहब्ब्त भी हुई, तो उसी से हुई,
अदावत भी हुई तो, उसी से हुई,

Itni Door Door Si Kyon Hai

पास रह कर मेरे, वह इतनी दूर दूर सी क्यों है,
दूर रह कर भी वह इतनी, पास पास सी क्यों है,

ये रात और ये चांदनी, मुस्कुरा रहीं हैं वस्ल में,
फिर तबीयत मेरी इस कदर, नाशाद सी क्यों है,

इश्क करना कोई गुनाह तो, नहीं होता है यारों,
बिन तेरे ये ज़िन्दगी फिर एक सजा सी क्यों है,

इब्तिहा से इन्तिहा तक,है दो कदम का फासला,
फिर मंजिल तक रास्ता,इतना तवील सा क्यों है.

तेरी यादों की खुशबू है रची बसी इन कमरों में,
फिर अंधेरों में साँसें मेरी बदहवास सी क्यों हैं,

नज़दीक थे और नज़दीकतर होते चले गए हैं,
मोहब्ब्त दिलों के दरम्यान, प्यास सी क्यों है,

पास रह कर मेरे, वह इतनी दूर दूर सी क्यों है,
दूर रह कर भी वह इतनी, पास पास सी क्यों है,

“मिलन”

3-Day 3-Quote Challenge: Day 3

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले

– मिर्जा गालिब

Thousands of desires, each worth dying for, 278 more words

Photography

Music Today: 28/07/2015

Woh Kagaz Ki Kashti: Jagjit & Chitra Singh

Releasing year: 1987

I’m not usually a ghazal sort of a person but whatever! This ghazal is a childhood memory of sorts. 496 more words

Music Today.

A little more than that...

Within my ego

I found a lot of negativity

Honest arguments here and there

But excuses aplenty

So I heard the learned scholars

Debate theological points… 102 more words

Ghazal