Tags » Ghazal

The Stack, Port Kembla 1965-2014

Still the glitter in gutters and rooftops, the petal that scalds
the cheek of the baby asleep in your arms, the shadow falls.

Falls faster now and faster – over bars, cars and lawns… 234 more words

Poetry

Agar aah karte badnaam hote

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Yearwise Breakup Of Songs

The Ghazal of Choice

I have two choices. I have many choices.
My hands can only hold so many choices.

A fillet or a classic angus bun;
I am not fast when I have food for choices. 163 more words

Poetry

Paradox of the Slug and Some Vagaries

One road toll hike per quarter at 1% compounding
doesn’t make a slug—
that is to say, one toll road user paying hikes of (1 + 0.04/4) ^ (4*1) 108 more words

Poetry

diss-olve

this container is filled to overflowing by your love, and so destroyed
this mind is overwhelmed by true high concepts from above, and so destroyed… 118 more words

Poetry

Tabeeb

मरीज़े-इश्क देख देख इश्के-मरीज़ हुआ जाता हूँ
तबीब हूँ तबियते नासाज के करीब हुआ जाता हूँ !

नाम मुकाम दौलत शोहरत सब कुछ है मेरे पास
लेकिन अपने दिल के चलते गरीब हुआ जाता हूँ !

मतला मक्ता और कुछ शेर क्या कहने लगे हम
आज ज़िन्दगी की ग़ज़ल का रदीफ़ हुआ जाता हूँ !

करी है मैंने आज तलक तो बहुत मुक़द्दस शायरी
पर तेरे इश्क की खातिर बद-शरीफ हुआ जाता हूँ !

देखते हैं दोस्तयार मुझे आज भी जिस निगाह से
अपने आप से ही कभी कभी अजीब हुआ जाता हूँ !

अब लोग मुझे आशिक-दीवाना कहते हैं ‘मिलन’
और मैं हूँ के जैसे लकीर का फकीर हुआ जाता हूँ !!

मिलन “मोनी”

Poetry

पहचान

पर्वत से जो नजर मिलाय,
नदी के बहाव से लड़ जाए,
तकदीर जो कैद कर ना पाया,
ब्रह्मांड का वह निवारक है तू ।

लफ्ज़ जो बयां ना करें,
मिटा कर भी कोई मिटा ना सके,
हकीकत के पन्नों पर लिखा,
वह मिसाल-ए-इतिहास है तू ।

संघर्ष उसके जीवन में है,
साहस फिर भी कम ना है,
मृत्यु को जो ललकारे,
ईश्वर का वह अंश है तू ।

यह दुनिया तेरा दायरा नहीं,
यह आसमान तेरा रुकावट नहीं,
खुद की पहचान समझ,ए इंसान,
धरती पर बस्ता फरिश्ता है तू ।

India