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गुलज़ार

तुम्हारी कविताओं की ऊँगली पकड़ कर
कुछ क़दम हम भी चल दिये है

तुम्हारे पीछे पीछे

वो सारे चाँद सितारे

बुलबुल चिड़िया

ख़त और स्याही

Happy Birthday Gulzar Sahab!- Part 3

First of all, I want to sincerely thank Gulzar Sahab for writing Jungle Jungle baat chali hai. If it wasn’t for him, I would never know ke chaddi pehen ke phool khilta hai :D Here are 5 songs other than films that he has worked on: 31 more words

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Happy Birthday Gulzar Sahab!- Part 2

To write this post, I had to actually sit with my Mother and go through a lot of songs by Gulzar Sahab to pick our the best for my Filmy fam! 866 more words

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गुलज़ार । Gulzar

कहते कहते रुक जाती है ना जाने क्यू
दोनो आंखे झुक जाती है ना जाने क्यू

ओ कहते कहते रुक जाती है ना जाने क्यू
दोनो आंखे झुक जाती है ना जाने क्यू

कह भी रहे हो,
सुन भी रहे हो बोलो ना, बता दो..

कहते कहते रुक जाती है ना जाने क्यू
दोनो आंखे झुक जाती है ना जाने क्यू

कभी तो नींद भी आयी नही
आंखो से ख़्वाब भी जाए नही
अभी यही है, अभी नही है
कभी जो गम हो तो लगे तुम हो
क्या कह रहे थे तुम दो आंखो से..

बोलो ना, बता दो..
हो कहते कहते रुक जाती है ना जाने क्यू
दोनो आंखे झुक जाती है ना जाने क्यू

लबो की गिरह, खोलो ज़रा
हवा की तरह उड़ लो ज़रा
ऐसा तो कभी हुआ ही नही
गले भी लगे छुआ भी नही

कुछ तो हुआ है ना,
अनजाने मे मोड़ आया है जो
अफ़साने मे बोलो ना, बता दो,
अरे बोलो ना, बता दो

कहते कहते रुक जाती है ना जाने क्यू
दोनो आंखे झुक जाती है ना जाने क्यू

कह भी रहे हो,
सुन भी रहे हो बोलो ना, बता दो

Gulzar

सिंगार को रहने दो।

जैसी हो वैसी ही आ जाओ
सिंगार को रहने दो।
जैसी हो वैसी ही आ जाओ
सिंगार को रहने दो।

बाल अगर बिखरे हैं
सीधी माँग नहीं निकली
बांधे नहीं अंगियाँ के फ़ीते
तो भी कोई बात नहीं

जैसी हो वैसी ही आ जाओ
सिंगार को रहने दो।

ओस से भीगी मटी में
पाव अगर सन्न जाए तो

ओस से भीगी मटी में
पाव अगर सन्न जाए तो
घुंगरू गिर जाए पायल से
तो भी कोई बात नहीं

जैसी हो वैसी ही आ जाओ
सिंगार को रहने दो।

आकाश पे बदल उमड़ रहे है देखा क्या
गूँजे नदी किनारे से सब उड़ने लगे है
देखा क्या

बेकार जला कर रखा है सिंगार दिया
बेकार जला कर रखा है सिंगार दिया

हवा से काँपके बार बार उड़ जाता है
सिंगार दिया

जैसी हो वैसी ही आ जाओ
सिंगार को रहने दो
किसको पता है
पलकों तले
दिए का काजल लगा नहीं
नहीं बनी है प्रांदी तो क्या
गज़रा नहीं बांधा तो छोड़ो
जैसी हो वैसी ही आ जाओ
सिंगार को रहने दो

हो सिंगार को रहने दो
रहने दो
सिंगार को रहने दो

~ गुलज़ार

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