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Roz roz aankhon talay (acoustic/live)

A favorite number from my late night crooning sessions :)

Credits for the original song:
Lyricist : Gulzar,
Singer : Asha Bhosle – Amit Kumar, 7 more words

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Dil Se Re - Dil Se

Mani Ratnam’s Dil Se (From the Heart), is a poetic love story set amidst the travails of people living in insurgency-prone areas of North East India. 640 more words

Tere bina zindagi se (acoustic/live)

Crooned this golden oldie recently :)

Original song credits:

  • Lyricist : Gulzar,
  • Singer : Lata Mangeshkar – KishoreKumar,
  • Music Director : Rahuldev Burman,
  • Movie : Aandhi (1975)
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​ये कैसा इश्क है उर्दू जबां का -गुलज़ार

ये कैसा इश्क है उर्दू जबां का

मज़ा घुलता है लफ्जों का ज़बां पर

कि जैसे पान में महंगा क़माम घुलता है

नशा आता है उर्दू बोलने में

गिलोरी की तरह हैं मुंह लगी सब इस्तिलाहें

लुत्फ़ देती हैं
हलक़ छूती है उर्दू तो

हलक़ से जैसे मय का घूँट उतरता है !

बड़ी एरिस्टोक्रेसी है ज़बां में

फ़कीरी में नवाबी का मज़ा देती है उर्दू
अगरचे मानी कम होते हैं और

अल्फाज़ की इफरात होती है

मगर फिर भी

बलंद आवाज़ पढ़िये तो

बहुत ही मोतबर लगती हैं बातें

कहीं कुछ दूर से कानों में पड़ती है अगर उर्दू

तो लगता है

कि दिन जाड़ों के हैं, खिड़की खुली है

धूप अन्दर आ रही है
अजब है ये ज़बां उर्दू

कभी यूँ ही सफ़र करते

अगर कोई मुसाफिर शेर पढ़ दे मीर-ओ-ग़ालिब का

वो चाहे अजनबी हो

यही लगता है वो मेरे वतन का है

बड़े शाइस्ता लहजे में किसी से उर्दू सुनकर

क्या नहीं लगता –

कि इक तहज़ीब की आवाज़ है उर्दू !

-गुलज़ार

गुलज़ार

Classic Shayari

Chupke Se - Saathiya

Another beautiful song by Gulzar, Chupke Se from Shaad Ali’s Saathiya (Companion) is a kind of train of thought poetry. Filled with never-ending metaphors of passion, romance and love; the song is a manifestation of desperate fantasies of lovers separated by distance and time. 791 more words

Aane Wala Pal - Gol Maal

As I struggle to post more often to keep up with my other work, poetic genius Gulzar’s birthday today offers the perfect opportunity to come back to my love for translating poetry. 418 more words

दवाई-ऐ-गुलजार!

इलाज करवाते हम वही से…
जहा जख्म होते है दवाई के लिए

जहां पल गुजरे बिना घडी के,
जहां हो थोडीसी जमी थोडा आसमां,
जहां चाँद पोहोचे बिना इजाजत के,
जहां हो मुसाफिर का ठिकाना,
जहां आए जाने वाला पल पलट के,
जहां दो दीवाने एक शेहर मे,
जहां सजते है सपने सात रंग के,
जहां पहचान होती है आवाज से,
जहां अरमां हो पुरे दिल के,
जहां सपनों में दिखे सपने,
जहां रात हो ख़्वाबों की,
जहां गले लागए झिंदगी,
जहां ना हो कोई शिकवा झिंदगी से,
जहां नाराज ना हो झिंदगी ,
जहां हैरान ना हो झिंदगी,

इलाज करवाते हम वही से…
जहां जख्म होते है दवाई के लिए

दवाई-ऐ-गुलजार!

#सशुश्रीके | १९ अगस्त २०१५ । १.४८

Sashushreeke