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A Blessed Feeling

I attended the Navratri festival for the first time at the Art Of Living Bangalore Ashram, and it was just out of the world. Divine experience with Gurudev! 393 more words

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The omnipresent 

Satsang of Jaya Singh Aunty
जय गुरूजी

गुरूजी हर सत्संग में हम संगत का कष्ट किस तरह अपने ऊपर ले कर हमारे दुखों को कम करते हैं ..ये कल के मेसेज से समझ आया ..सुक्रीता आंटी ने पहले भी जिक्र किया था कि उन्होंने कितनी बार गुरूजी को संगत के चप्पल को पहनते हुए देखा है ..उनके पूछने पर की वो क्या कर रहे हैं ..गुरूजी ने बताया कि वो वहां आये संगत के दुःख को संगत के चप्पल को खुद पहनकर अपने ऊपर ले लेते हैं …

एक बार तो ऐसा भी हुआ की कोई सत्संग चल रहा था और गुरूजी ने किसी संगत के चप्पल को पहना और चले गए ..आंटी के पूछने पर बताया कि इस तरह उस संगत का जिनपर बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली थी सारा कष्ट ही ले लिया ..ये सत्संग उन्ही आंटी को ब्लेस करने को रखवाया था ….आंटी ने पूछा की कैसे पहचानेगे …कौन आंटी हैं ये ?…गुरूजी ने कहा .कि जिसका चपपल गाएब होगा ..पता चल जाएगा

सत्संग के बाद एक आंटी का चप्पल गायब था ..ब्यौरा पूछने पर वो उस चप्पल से मैच खा रहा था …आंटी रोने सी हो रही थी कि इतना मंहगा चप्पल था ..अभी पूरा पेमेंट भी नहीं किया था और खो गया ..फिर आंटी ने चप्पल गायब होने का सत्संग बताया कि किस तरह गुरूजी ने आज उनको ब्लेस करके आने वाली मुसीबतों से बचाया है ..

कल के विज़न में आंटी के पूछने पर गुरूजी ने अपना जुती उतार कर दिखाया ..उन जूतियों में दहकते हुए कच्चे कोयले थे ….जब गुरूजी ने नल से अपना पैर धोया तो वैसी ही आवाज़ आ रही थी जैसे तप्त कोयले पर पानी डालने से आती है ..गुरूजी ने बताया की किस तरह वो बिना किसी को बताये हम संगत के दुःख तकलीफ को अपने जुते में दबा कर अपने ऊपर लेकर चले जाते हैं हर सत्संग में ..पर हम संगत ऐसे नाशुक्रे हैं ..कि हर वक़्त शिकायत करते रहते हैं कि गुरूजी ने कुछ नहीं किया हमारा..

हमें कहाँ पता होता है कि कितना कर्म हम ख़राब कर के आये हुए हैं ..और उसके लिए हमें कितनी परेशानी झेलनी पड़ सकती है ..हम बस हल्ला करते रहते हैं ..सामने वाले को तो ठीक कर दिया ..मेरा कुछ काम बना ही नहीं …गुरूजी के लिए हम सब बराबर हैं ..हम सबका कल्याण करते ही हैं वो ..चाहे हम उनको माने या ना माने ..

जब हम उनसे जुड़ जाते हैं ..उनकी बात मानने लगते हैं ..तो वो अपना सारा प्यार ब्लेस्सिंग के रूप में हम पर उड़ेल देते हैं ..पर यदि हम सब कुछ जानते हुए भी उनके मेसेज को नहीं मानते तो हमारे हिस्से की ब्लेस्सिंग किसी और को दे देते हैं..

कुछ दिन पहले का एक वाकया शेयर करती हूँ …शायद प्रीत विहार में सत्संग था …परिवार ने अपने नवाजी को ब्लेस करवाने के लिए सत्संग रखा था ..सब कुछ सही चल रहा था …गुरूजी सामने बैठे थे …गुरूजी ने बच्ची का कुछ नाम बताया …पर बच्ची के पिता ने अपने ज्ञान की टोकरी खोल दी और बहस पर उतर आये …हम संगत सिर्फ कहते हैं कि हर सत्संग में गुरूजी मौजूद रहते हैं ..पर हमारे व्यवहार से कहीं भी नहीं लगता कि हम इस बात को अंदर से मानते हैं ..नहीं तो गुरूजी बैठे हों ..जिन्हें हम महा शिव कह रहे हैं ..और महाशिव के सामने अपना ज्ञान दिखाना ..कोई बुद्धिमान तो नहीं कर सकता …

आंटी को गुरूजी दीखते हैं जैसे ही बच्ची के पिता अंकल ..बहस पर आ गए ..गुरूजी ने इशारा करके आंटी को मना कर दिया ..यानि ज़िप लगाने कह दिया …आंटी बहुत डर गयीं कि इतना सब कुछ करके भी संगत गुरूजी की ब्लेस्सिंग नहीं ले पाई होगी ….और अगले ही दिन किसी और आंटी से गुरूजी ने मेसेज देकर कन्फर्म किया कि उन्होंने अपनी सारी ब्लेस्सिंग रस्ते में किसी और संगत आंटी को दे दी …

हम सब यही गलती कर जाते हैं ..भूल जाते हैं कि हम महाशिव के दरबार में बैठे हैं …यदि कोई कुछ बता रहा है तो बहस पर उतर आते हैं ये साबित करना हमारा काम हो जाता है कि हम जो सोच या कर रहे हैं वही सही है …हम सत्संग में ही बैठे हैं इस बात का आभास भी नहीं रहता …

खासकर हम आंटीयां संगत ..जैसे ही आरती ख़त्म हुआ या लंगर खत्म हुआ ..शुरू हो जाती है बताना ..कि कैसे कैसे उन्हें क्या हुआ ..कैसे पहुंची और क्या क्या होता …बला बला.. हमें लगता है कि जब तक शबद चले तभी तक गुरूजी हैं ..अपने मन की आँखे खोल कर तो देखें हम ..गुरूजी अपनी उपस्तिथि बता ही देते हैं … यदि हमें शेयर ही करना है कुछ …तो शांत बैठकर बारी बारी से हम अपनी बात कह सकते हैं ..हमें जो दिख रहा है यानि आंटी अंकल ,, फूल सजावट इनके अलावा कुछ और वहां देखना ही नहीं चाहते ..इस कारण दीखता भी नहीं है ..और बार बार सत्संग में जाकर भी कुछ ख़ास नहीं ले पाते हैं ..

हमें क्या देना है ..ये गुरूजी जानते हैं ..पर हम लेंगे या नहीं लेंगे ये हमारे पर निर्भर करता है …बहुत समय हो गया अब तो ..हमें समझ जाना चाहिए कि गुरूजी हमारा कितना ख्याल रखते हैं …

गुरूजी ने एक बहुत ही खास मेसेज दिया है ..बहुत बार जब हमारे पारिवारिक अशांति से हम परेशां होते है तो हम झट सोचने लगते हैं ..किसी पडोसी या किसी ऐसे बन्दे ने ,जिसे हम पसंद नहीं करते ..कुछ उल्टा पुल्टा कर दिया होगा ..बहुत बार ऐसा होता है पर ज्यादा समय तो हमारे अपने घर के सदस्य ही हमरी बर्बादी का कारण बने रहते हैं

मान लें कोई पत्नी अपने पति के पीने की आदत से परेशां है ..अब पति तो सुधर नहीं रहा …और पत्नी उसके इस आदत से हरदम उसके लिए एक नेगेटिव फीलिंग्स लेकर चलती है ..उसके हर एक्शन को अपने उसी नेगेटिव विचार को सामने लाकर ही तौलती है …अब ऐसे घरों में नेगातिविटी इस तरह कब्ज़ा जमा लेती है ..पता नहीं …कि अपनी सारी बरकत ही रुक जाती है …हम यदि अपने पति के पीने की आदत बदल सकते हैं …तो बदल लें ….जो हमेशा संभव है ..यदि हम हमेशा पॉजिटिव रहें ..नहीं बदल सकते तो स्वीकार कर लें ….कम से कम घर के वातावरण में पोसितिविटी तो रहेगी …

हम अपने किसी करीबी रिश्तेदार जैसे सास या ननद पर अक्सर इलज़ाम लगा देते हैं ..अंदाज़ से …पर बहुत बार हमारे अपने संबंधो में ही इतनी नेगातिविटी होती है कि किसी और को कुछ बिगाड़ने की जरूरत ही नहीं होती … कभी कभी बच्चे या माँ पिता ये काम करते होते हैं ..परिवार के किसी सदस्य के लिए बुरा भाव रखना ..ये नेगातिविटी को अपने घर में पक्का स्थाई जगह दे देते हैं ….पता नहीं

बरकत कैसे आएगी ?….गुरूजी कहते हैं कि हम नीवां होवें …निर्मल होवें .. सबके लिए सद्भाव रखें …..हमारे कल्याण के लिए गुरूजी तो हैं ही .

जय गुरूजी

Satsangs

One Voice

This incident happened many years ago, in 1995 or 1996. It was the time of Navratri Celebrations at Bangalore Ashram and I was leading a bhajan in the Satsang. 481 more words

Sri Sri

Without Guruji

…………….I can’t imagine a world in right mind with an exception of some. I wonder from where guruji gained such knowledge which continues  to transform lives of people and i am talking about millions of people. 247 more words

Guruji

The Reassuring Radiance

JGD All,

I have been an Art of Living volunteer for almost two years and have experienced many miracles in my life, but there is one particular incident which requires a special mention. 352 more words

AOL

Speeding all the way!

I am a software engineer by profession. In devotee’s life, every day is full of experiences of Guru Kripa.

From childhood, I am passionate about two things – one is Cricket and other is Speed. 299 more words

AOL

Thoughts during meditation and sadness after!

Question:

Dear Ekta didi, I have been doing my Kriya and meditation but I just can’t get my mind to shut up! It constantly brings thoughts. 467 more words

Mind