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Love you

Tum pyari itni ho ki alfaj nai milte mujhko…

Gar bayan kar sakte to poori umra bayan krte…. @J.. Love you a lot. Even more than me, I love you.

लाशोंसे भरी गद्दीपर चैन की नींद सोनेवालों !
तुम्हारे करोडों रुपये इसकी कीमत नहीं कर सकते
गोलियोंकी बारिशोंसे ये शांती-फूल खिले है
अपना खून बहाकर हमने आपकी शांती सींची है
मजहब के नाम पर बंदूकें उठानेवालोंको
कोई ये भी जाकर बता दे की आखिर,
वतन नाम का भी एक खुदा होता है,
देशभक्ती नाम का भी एक मजहब होता है !

My Writings

आज फिर

आ चल आज फिर,
भीग चले बारिश मे,
मौसम तो आयेंगे,
फिर चले जायेंगे,
कभी बारिश होगी,
कभी तपिश होगी,
पर फिर भी जिंदगी,
तेरे संग ही होगी,
चलो इक बार फिर,
भीग चले बारिश मे,
मानाकि मै थी रुठी,
पर तुम भी तो थे ,
मुझसे कुछ रुठे से,
आ चल आज फिर,
भीग चले बारिश मे,
न तुम कुछ कहो,
न हम कुछ कहे,
न हो गिले-शिकवे,
बस भीग जाये,
इक बार फिर,
संग-संग बारिश मे,
प्यार की बारिश मे,
आ चल आज फिर ,
भीग चले बारिश मे,
नाता तो गहरा है,
मेरा तुझसे,
मगर फिर भी,
क्या पता कि कही,
फिर रुठ न जाँऊ,
आ चल आज फिर ,
भीग चले बस,
संग-संग बारिश मे।

Hindi Poetry

वो और वो : Part 1

यार इस निम्बू पानी में थोड़ा निम्बू भी डाल दिया करो …..हंसते हुए प्लास्टिक के कप को लगभग आधा पी चुका था! अब बाकी बचे आधे को पूरा करने के दरम्यान ऑंखें उस ओर खुद ही पहुंच जाएगी….उस ओर जहाँ एक बार तो नज़र जाती ही है!

Creative Arts

hindi poems

hindi essay writing – HindiWriting.IN is a blog which writes on hindi essay and hindi poems for the students and these stuff can be used by school going students in their school work and syllabus.

श्रद्धांजलि(शहीदों और उनके परिवार को समर्पित)

आज कलम भी रोकर,
मुझसे बोल पड़ी ,
स्याही की जगह आँसुओं
से भर दो मुझे,
नमन करना चाहती हूँ,
मै भी शहादत को,
आज कलम भी रोकर,
मुझसे बोल पड़ी,
जंग तो मैने नही देखी,
पर जो शहीद हुए,
उन्हें श्रद्धांजलि देना
चाहती हूँ,
आज कलम भी रोकर,
मुझसे बोल पड़ी,
लिखना चाहती हूँ उन,
आँखों के आँसुओं को,
जो जागेगी अब उम्र भर,
कभी बेटों की यादों मे,
कभी भाई की यादों मे,
कभी पति की यादों मे,
आज कलम भी रोकर,
मुझसे बोल पड़ी,
बयाँ करना चाहती हूँ,
मंजर-ए-जंग को,
मंजर-ए-नफरत को,
बिछड़ती इंसानियत को,
उन उजड़े हुए गाँव को,
खून से लथपथ,
खेत और गलियों को,
आज कलम भी रोकर,
मुझसे बोल पड़ी,
महसूस कर सकती हूँ,
अनाथ-मासूम बच्चों के,
के आँसुओं को,
सरहद पर हुई जंग को,
आज कलम भी रोकर,
मुझसे बोल पड़ी।
स्याही की जगह,
आँसुओं से भर दो मुझे।
बयाँ करना चाहती हूँ,
बहते लहू को देख,
पथराई धरती माँ को,
कलम है मेरी आज,
आँसुओं से लिखती
हुई।

Hindi Poetry

बुनाई का गीत  - केदारनाथ सिंह 

उठो सोये हुए धागोंउठो

उठो कि दर्जी की मशीन चलने लगी है

उठो कि धोबी पहुँच गया घाट पर

उठो कि नंगधड़ंग बच्चे

जा रहे हैं स्कूल

उठो मेरी सुबह के धागो

और मेरी शाम के धागों उठो
उठो कि ताना कहीं फँस रहा है

उठो कि भरनी में पड़ गई गाँठ

उठो कि नाव के पाल में

कुछ सूत कम पड़ रहे हैं
उठो

झाड़न में

मोजो में

टाट में

दरियों में दबे हुए धागो उठो

उठो कि कहीं कुछ गलत हो गया है

उठो कि इस दुनिया का सारा कपड़ा

फिर से बुनना होगा

उठो मेरे टूटे हुए धागो

और मेरे उलझे हुए धागो उठो
उठो

कि बुनने का समय हो रहा है

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