Tags » Hindi Poems

मोको कहाँ ढूंढें बन्दे

मोको कहाँ ढूंढें बन्दे,
मैं तो तेरे पास में ।
ना तीरथ में ना मूरत में, ना एकांत निवास में ।
ना मंदिर में, ना मस्जिद में, ना काबे कैलाश में ॥
ना मैं जप में, ना मैं तप में, ना मैं व्रत उपास में ।
ना मैं क्रिया क्रम में रहता, ना ही योग संन्यास में ॥
नहीं प्राण में नहीं पिंड में, ना ब्रह्माण्ड आकाश में ।
ना मैं त्रिकुटी भवर में, सब स्वांसो के स्वास में ॥
खोजी होए तुरत मिल जाऊं एक पल की ही तलाश में ।
कहे कबीर सुनो भाई साधो, मैं तो हूँ विशवास में ॥
– कबीर

Hindi Poems

मेरी माँ...

एक पुत्र ने मा की ममता को शब्दो मे उकेरने की कोशिश की लेकिन शब्द कोश मे शब्दो के अभाव के कारण कुछ ना लिख पाने के बाद मा से पूछने लगा कि………

हे मा ! हे जननी ! अब तू ही बता
लिखू तो क्या लिखू.
शब्द नहीं मिलते लिखू तो क्या लिखू.
तेरी करुणा शब्दो मे बया नहीं होती.-2

कैसे लिखू नव मास कि वो वेदना -2
लिख नहीं सकता तेरी देवीय शक्ति
तू गंगा समान अविरल, अथाह सागर के समान
ये सब शब्द हैं छोटे, लिखू तो क्या लिखू.

तू रूप है दुर्गा का हे मा,
मेरे ज्ञान कि देवी भी तू |
सर्वोपरि तू ब्रह्म से , धरनी समान गंभीर तू |
ये सब कल्पना भी तुछ हैं
लिखू तो क्या लिखू…-2

~कपिल देव सिंह

Hindi Poems

जल

मेघ की जिन बूंदों ने , आज धरा को तृप्त किया
उस जल को मेरा प्रणाम।

गंगारूपी नदी के नीर ने , जन -जन के दुःख का हरण किया
उस जल को मेरा प्रणाम।

आँखों के जिन अश्रु ने , ह्रदय के दर्द को बाट लिया
उस जल को मेरा प्रणाम।

अनंत सागर में फैले , जीवों को जीवन देने वाले
उस जल को मेरा प्रणाम।

-कपिल देव सिंह

Hindi Poems

Hindi poem on Earth- धरती मां की गोद



हंसी-हंसी से बनी मुस्कान मां कहती
मुझसे धरती भी तेरी मां बनी,
खेल- कूद लपक -झपक तु इस पर ही आएगा
सिंचे इसमें जो खून पसीना वो कहलावे किसान।
84 more words

Hindi Poems

Story of Mahabharat

अग्निगर्भा द्रौपदी की,

बात है इतनी पुरानी,

मान और अपमान के,

दस्तूर की ये है कहानी।

नारी पर आघात की,

और फिर प्रतिघात की,

रिश्तों में व्यवधान की,

युद्ध के संधान की,

दम्भ था विकराल इतना,

जल गया संसार कितना,

बन गई श्मशान धरती,

रह गयी बस रुदन सिसकी।

वो कैसी भीष्म प्रतिज्ञा थी,

जो पाप देख न थर्राई,

वो कैसी शूर वीरता थी,

जो अंत सभी का ले आयी,

क्यों भाई भाई लड़ मरे,

क्या मिला धृतराष्ट्र को,

पहले लालच में सो  न सका,

फिर पछतावे में रो न सका ।

आँसू सूखे,अंगार बने,

जीवन की, क्या दशा बना डाली,

पद धन के लालच में देखो,

अपनों की चिता जला डाली।

Poems

Hindi Poems on Father's Day-भगवान के जैसा धरती पर

भगवान के जैसा
धरती पर ही
मिलता है जो वो
कहलाता है पिता

थाम के उंगली जब पहली बारी
उसके जिगर का टुकड़ा चला
एहसास ये उसके जीवन में जैसे

Hindi Poems

मैं दुःखी हूँ

-मैं दुःखी हूँ ।
क्यों ??
-क्योंकि मेरी
मनचाही न हुई ।

तो ?
-तो क्या,
दिल दुखा
और क्या ।

क्यों दुखा ?
-क्यों न दुखे ? 77 more words

Hindi Poems