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प्रेम

फूलों की सुगंध सा ; काँटों की चुभन सा ,

सूर्य के प्रकाश सा ; हवाओं की आवाज़ सा ,

गीत में संगीत सा , है मेरे स्वभाव सा प्रेम .

रिश्तों की बुनियाद यही हो ,

जहाँ जज़बात दिलों में हो ,

निर्दोष ,निरअहंकार, निर्भय दिल मे,

बस्ता है प्रेम .

सागर की लहरें है जितनी ,

फूलों पर फिरती है तितली,

जैसे झूमते है बादल गगन में,

उतना स्वतंत्र है प्रेम .

है भीग रहा संसार जिसमे ,

उस वर्षा का स्त्रोत है प्रेम.

Hindi Poems

अल्फ़ाज़ों की कमी..

कुछ अल्फ़ाज़ों की कमी आज मेरी कलम में झलकती है

कुछ एहसासों की कोयल नीले अम्बर में चहकती है

मैं इक मोती के जैसे भटकती दुनिया के सागर में,

कुछ अश्कों की बूंदे बरसात की तरह टपकती हैं।

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कुछ लम्हों में मेरे किस्से यूँ ही सिमटते हैं

कुछ ख्वाबों के मंज़र भी तो यूँ ही तरसते हैं

मैँ इक पंछी के जैसे कैद इन झूठी नफरतों में

कुछ आकाश में बादल मानो यूँ ही गरजते हैं।

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कुछ शिकवे साज़िशों की आग में जैसे झुलसते हैं

कुछ रंग हमारे अपनों के भी तो वैसे बदलते हैं

मैँ कड़ी की तरह उलझी कच्चे पक्के धागों में

कुछ गर्ग के हज़ारों लफ्ज़ बर्फ के जैसे पिघलते हैं।

Hindi Poems

Izazat...💙

Thik hai

Chale jaana

Par aakhiri baar nazar bhar ke dekh lene ki izazat to do

Thik hai

Wapas matt aana

Par aakhiri baar unn haatho ko tham lene ki izazat to do… 80 more words

Prakriti Sharma

That Bird - ऐसा वो परिंदा - hindi poem - rahulrahi

Aesa vo Parinda – hindi poem – rahulrahi.com

जाने किस उम्मीद के, सहारे से वो ज़िंदा है,
हैं कटे कुछ पर मगर, नभ देखता परिंदा है,

जो हैं उसके साथी सब, कैद सारे पिंजरे में,

चेह पर मुस्कान है, पर मन से वो शर्मिंदा हैं,

जो जिए हैं शान से, आज़ाद से बहारों में,

जी गए हर पल अमर, वो समर चुनिंदा है,

चमकता सोना कहो, चाँदी या लोहा कहो,

चाहे जितना भी सजा लो, घर तुम्हारा फंदा है,

जो उड़े बादल के संग, रंग फैले हर एक ढंग,

लय में नाचे हर तरंग, लाखों में एक वो बंदा है,

आसमाँ को नापने, वो झाँकने दुनिया नई,

फड़फड़ाता पंख अपने, शायद लगता अंधा है,

गिर के नीली छतरी से, दम भरे एक डाल पर,

अधमरे उसके जिगर की, सबने की बस निंदा है,

किस्मतों के किस्सों का, घोला काढ़ा पी गया,

ना उम्मीदी तोड़ता फिर, ये ही उसका धंधा है।

ऐसा वो परिंदा है…

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"तुम"

तुम्हारी और मेरी ये कहानी है सालों पुरानी,
 तुम अटूट हिस्सा हो मेरी जिन्दगी का,
 हमेशा से ही ये बात मैने है मानी|
 मेरा पीछा न छोङने की तुमने भी है ठानी|

 जब-जब मौसम ने ली अंगङाई,
 तुम्हे  याद मेरी आई|
 तुम्हारे आने का अन्देशा मुझे पहले ही हो जाता है,
 हमारा ये अलग सा ही नाता है|

 जब तुम मौजूद होते हो,
 तो इत्र की पूरी बोतल भी बूँद सी लगती है,
 कहना तो बहुत कुछ चाहती हूँ, पर कह ही नहीं पाती हूँ|
 मानो मेरी तो पूरी दुनिया ही बदल जाती है।

 चार लोगों के संग मैं बैठ न पाती हूँ,
 हर थोङे समय बाद मुँह छिपाकर चली जाती हूँ।
 ऐसा क्या तेज है तुममें कि
 तुम्हारे आते ही मेरी साँसें थम जाती हैं,
 न जाने क्यों बार-बार आंखें लाल होकर भर आती हैं|

 तुम हर बार ले लेते मेरी जान हो,
 पर तुम्हे ज्यादा तरजीह देना भी ठीक नहीं,
 अखिर तुम और कुछ नहीं, मेरा जुकाम हो|
Ananya

"घड़ी"

 वो भी एक घड़ी थी,
 अपनी सखियों के संग मैं पर्दे के पीछे पड़ी थी।
 एक अजनबी की तलाश मे हर क्षण साठों बार नजरें घुमाती  थी।
 यह तो साई को भी सताई जब मुझ पर गर्द जम आई,
 एक दिन मेरा श्वेत रंग देखते ही मैं तुम्हे भाई।
 हर परिमाप पर परखने के बाद, सबके सलाह-मशवरे के बाद,
 मै तुम्हारी नाक के नीचे आई।

तब से हर आज के लिये थाम लिया तुम्हारा हाथ,
 भरने तुम्हारी तंग जिन्दगी मे एक नया रंग,
 चली आई मैं बंध कर तुम्हारे संग|

तुमने कहा तो दीवार पर टंगी उस अनजान को अपना आदर्श मान लिया,
 बिना सही गलत की चिंता किए उसे ही सटीक समझा और सम्मान दिया।
 तब से अब तक निरंतर दौड़ रही हूँ,
 थकना मुझे आता नहीं रुकना मुझे पसंद नहीं
 तुम्हारी हर हरकत का ख्याल मैं रखती हूँ,
 हर अवसर पर तुम्हें वक्त पर पहुंचाना अपना कर्तव्य समझती हूं।

अच्छा नहीं लगता मुझे  जब मेरी मीठी आवाज भी तुम्हे चुभती है,
 जरुरत न होने पर मुझे दबाकर रखने वाली बात भी बहुत अड़कती है।
 समय-समय पर तुम्हे याद दिलाना पङता है,
 तुम्हारी जिन्दगी क एक अंग हूँ मैं,
 कोई कलाई पर बँधी घड़ी नहीं,
 तुम्हारी अर्धांगिनी हूँ मैं  ।
Ananya

"तुम"

 तुम न हो तो जीना बेमानी है,
 यह बात मैंने हमेशा से मानी है।

 तुम्हारे बिन मेरी हर कहानी है अधूरी,
 जैसे बिन तीखी चटनी की पानी पूरी।

 मेरे हर सुख दुख के साथी हो तुम,
 मेरा हर राज जानने वाले हो तुम।

 वह कौन सा किस्सा है मेरा जो तुम नहीं जानते,
 वह कौन सा रूप है मेरा जो तुम नहीं पहचानते।

 तुम्हारे संग मानो हर घंटा क्षण  में ही गुजरता है,
 तुम्हारे बिन एक दिन तो सदियों सा लगता है।

 जब भी कोई परेशानी आए मुझे याद तुम्हारी आती है,
 मेरी हर खुशी की खबर मुझसे पहले तुम्हारे पास पहुंच जाती है।

 हर समय जिस के साथ रहने का ताना मिलता है मुझे,
 वह हो तुम,
 मेरे प्रेमी नहीं हो तुम,
 मेरी जान नहीं हो तुम,
 मेरा साया नहीं हो तुम,
 उससे भी बढ़कर वॉट्सऐप हो तुम।

Ananya