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अगर ये दुनिया ना होती...

अगर ये दुनिया ना होती तो क्या होता?

जो होता भला होता।

ना माँ को वो सङक पार वाला चिंटू मुझसे भी प्यारा होता, 

शायद मैं माँ की आँखों का तारा होता।

इस घर में हर बात पर क्यों होता है चिंटू का गुणगान?

हे भगवान अब तो कर कल्याण।

 

अगर ये दुनिया ना होती तो क्या होता?

जो होता भला होता।

ना याद दिला मुझे वो बारवी के नतीजे का दिन, 

ना याद दिला मुझे वो फोन की घंटिया, 

पहली से ग्यारवी तक के भी नतीजे आए थे, 

उस दिन भी प्यार जताया होता, 

उस दिन भी फोन घुमाया होता।

 

अगर ये दुनिया ना होती तो क्या होता?

जो होता भला होता।

जब नौकरी लगी तब घर में मिठाई बटी, 

आई पङोसियों की टोली जो बोली, 

अगर वहाँ नौकरी मिल जाती तो और अच्छा हो जाता, 

अब इनको मैं क्या बोलू, 

कभी तो मेरी खुशी में मुस्कराया करो, 

कभी तो बिना कुछ बोले जाया करो, 

जिस दिन वहाँ नौकरी लगेगी, कही और का राग तुम गाओगे,

बिना टोके नहीं रह पाओगे।

 

अगर ये दुनिया ना होती तो क्या होता?

जो होता भला होता।

ना वरमा जी की चिक-चिक, 

ना उनकी बीवी के ताने, 

“शादी कर ले बेटा, अब तो ना बना बहाने।”

 

अगर ये दुनिया ना होती तो क्या होता?

जो होता भला होता।

Hindi Poems

Maa/माँ

माँ मैंने तेरे आँचल में,
दुःख अपने सारे बिसराये हैँ।
पाकर जन्नत तेरे कदमों की,
खुशियों के महल बनाये हैँ।

तूने ही माँ बचपन में मुझको,
लोरी गाकर के सुनाई थी।
प्यास लगी जब भी माँ मुझको,
ममता के सागर से तूने मेरी प्यास बुझाई थी।

माँ तूने मेरी ही खातिर,
था स्वर्ग जमीं पर बना दिया।
बस मेरी एक मुस्कान के लिए,
खुशियों को अपनी बिसरा दिया।

हो जन्नत से प्यारी तुम मुझको,
तुमने मुझपे सब कुर्बान किया।
हुआ धन्य माँ पाकर मै तुझको,
इतना तूने मुझको प्यार दिया।

For my dear mother…..

@j

इस दुनिया में |

इस दुनिया में हर रोज़,
लोग मिलते हैं अजीबो ग़रीब स्वाभाव के |
पल पल रंग बदलती ये दुनिया,
ना जाने कब अपनी करवट बदल ले |
पर क्यू कम ही मिलते हैं लोग, 
जो होते हैं मिलनसार व्यवहार के |

इस दुनिया में,
भीड़ तो है हर जगह |
हर तरफ लोगों का ताँता लगा रहता है |
सारा संसार भरा हुआ है, जगह खाली नही |
पर क्यूँ ऐसा होता है,
लोगों की भीड़ मे अपनापन खोजना परता है |

रघुपति राघव राजा राम |
लोग भूल गये करने अच्छे काम |
धर्म गया और कर्म गया |
ममता के लिए अब कोई मर्म न रहा |
इस दुनिया मे कभी कभी,
ऐसा भी होता है |
जो अपना होता है, वो ही दुश्मन बन जाता है |

इस दुनिया मे ही,
हमें जीना है |
सब कुछ यहीं करना है |
कभी हसना है तो कभी रोना है |
दूसरों को नही रुलाना है |
धूप और छाँव से खेलना है |
खुशियों को गले लगाना है |
दुखों को मिटाना है |
कभी संभलना है तो कभी संभालना है |
मानवता की सेवा करके,
मानवता को बचना है |
क्यूंकी…
इस दुनिया मे ही,
हमें जीना है |

 – Ashish Kumar

Hindi Poems

Dar Dar Ke

Atankwaadi toh chalo apna kaam kar rahe hain
Par aapne kyon dar ki dukaan lagaayi hai?
Jab dekho daraate rehte ho.

Ghar pe baithe rahoge toh rozi roti kaun kamaayega? 297 more words

Poem

Choti si baat -17

Hasratein ( हसरतें  )

” डोर हसरतों वाली उलझी पड़ी है एक कोने में कब से,  कोई सुलझा  दे इन्हे  तो पतंगे हम भी उड़ा लेंगे। ”            -Bikram kapoor

Hindi

एक पहेली है ज़िन्दगी

गुलशन है अगर सफ़र ज़िन्दगी का ,
तो इसकी मंज़िल शमशान क्यों है…
जब जुदाई है प्यार का मतलब ,
तो फिर प्यार करने वाला हैरान क्यों है…
अगर जीना ही है मरने  के लिए ,
तो फिर ज़िन्दगी एक वरदान क्यों है…
अगर होता नहीं आसान अकेले ज़िन्दगी गुज़ारना , तो फिर तन्हाई से सबको प्यार क्यों है…
कहते है नशे में इंसान सच बोलता है ,
और सच्चाई तो शरीफ होने की निशानी है ,
तो फिर शराब ख़राब  क्यों है…
जो कभी न मिले उसी से लग जाता है दिल,
आखिर ये दिल इतना नादान क्यों है…

कैसे सुलजाउ इस पहेली को ?
कैसे जगायु अपने नसीब को ?
कैसे बयां करू जज़्बात अपने ,
कब होंगे साकार सपने…
नजाने कब मिलेंगे जवाब अपने ,
ज़िन्दगी एक पहेली क्यों है …
आखिर ये दुनिया बनाने वाला चुप क्यों है…!!