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अप्राप्य इच्छा

कडुवा सच और मीठा सपने
के बीच छोटा सा फासला हे अप्राप्य इच्छा

Poems

Sab kuch sun lete he...

achi baat ye he humari k hum sab kuch sun lete he…

iski bhi sun lete he…

uski bhi sun lete he…

kari kisi ne tareef tho vho bhi sun lete he… 51 more words

Kamal Singh

क्यूँ परखूं मैं लोगो को
क्यूँ  जानू भीतर की माया
जब सीरत ना भाई मन को
क्या भाएगी उनकी काया

क्यूँ  गाऊं मैं सच का राग
क्यूँ तोड़ूं झूठों की माला
हर एक मोती जो भिखरेगा
संग डूबेगा कोई किनारा

क्यूँ  जी लूँ मैं आज की होके
क्यूँ  ना ओढूँ कल का साया
सच और भरम सब एक सा है
मानने ना मानने का फ़र्क है सारा
मानने ना मानने का फ़र्क है सारा

Hindi Poems

मेरे जज़्बात - Feeling of Writers - ग़ज़ल

A gazal dedicated to all writers.

मेरे जज़्बात – mere jazbat – ग़ज़ल

जज़्बातों से जब भी मेरा दिल भर भर आता है,
चलती है कलम बस मुझसे रहा नहीं जाता है। 8 more words

Loosing game

Wave upon wave you came 

crashing on my shores ,

till I could breath no more. 

Your invisible hands,

roaming on me unhindered. 

Making me gasp for air……. 19 more words

Hindi Poems

प्यार की धूप

सुरमई बादलों सी उड़ती फिरूं

आसमान पर ,ज़मीन से परे ,

वहाँ इंसान ना हो शैतान

के भेस में .

बस नरम प्यार की धूप खिले,

मेरी पायल से टकरा कर बदली,

खिलखिलाये और प्यार बरसाए,

तरसती धरा को सोंधी कर जाये.

हवा के आगोश में ,मैं दर्द

सारे भूल जाऊं , फिर ज़मी पर

कभी ना आऊं . वहीँ खो जाऊं.

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अपना आईना

यहाँ नहीं वहाँ नहीं

जगह रही कहीं नहीं.

वो आँखें हैं सब देखती,

जो नहीं भी है वो सोचती.

दीवारों के भी कान हैं,

ये कैसा अजीब मकान है .

जब बस मुझ पर ना चला,

मुझको बनाया अपना आईना.

अपनी सारी करतूतें नज़र,

आने लगी मुझमें.

मुझको धमकी दी उसने,

बात हद से बढ़ गयी.

मैं अलविदा कह चली,

नहीं मंज़ूर ये बेड़ियाँ,

जिनको प्यार का नाम दिया.

मेरा मान छीन ,

बदनाम मुझको कर दिया.

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