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जीने का मन करता है

कहा फंस गयी हूँ,
इन रीति की कड़ियों में बंध गयी हूँ,
खुल के जीने का मन करता है,
बस कभी-कभी यूँ ही जीने का मन करता है।

रात-दिन तो मरती हूँ मैं,
फिर भी जीने की ख्वाहिश रखती हूँ मैं,
आखिर खुल के जीने का मन करता है,
बस कभी-कभी यूँ ही जीने का मन करता है।

शान्ति से मारना चाहती हूँ मैं,
बिन नफरत भरे दिल के जीना चाहती हूँ मैं,
कितना कम वक़्त है मेरे पास,
फिर भी खुल के जीने का मन करता है,
बस कभी-कभी यूँ ही जीने का मन करता है।

Hindi Poetry

सुनो सुनो सुनो ! आज कुछ खरा सुनाता हूँ !

Me reading this aloud:

सुनो सुनो सुनो !
आज कुछ खरा सुनाता हूँ !

कहानी ये बिलकुल सच्ची है
और सुनने में भी अच्छी है 14 more words

Hindi Poems

khwaish

Boond se bhi choti Ek khwaish palti hoon,

Raaton ko jag jag kar, ek neend palti hoon..

Aandhi ka jhonka, jo girana chahe,

Armano ki seeken, 57 more words

Dream - Full Story

It was a suspiciously silent night.

Suddenly, I woke up, out of breath and my chest was throbbing violently . There was a tinge of anxiety and fear in my heart as if something bad happened, sweat beads appear on my forehead. 1,635 more words

Hindi Poems

🌷🌷 ::Mere Ram Meri Behan Mahan Hai :: 🌷🌷

🌷🌷 :::Mere Ram Meri Behan Mahan Hai ji::: 🌷🌷
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Mere Ram meri behan hi hai ji,

Teri jaise rishta nahi hai is sansar me , 1,543 more words