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Aankhein

Kahin tumhare aankhoon me nami to nhi,

iss nami ki whajah pareshani to nhi,

khushi ki ho to koi gaam nhi,

dukh ki ho to humse bura koi nhi.. 104 more words

Hindi Poems

Love Trees - Nature Love Poem In Hindi

​यह पेड़ भी कितने प्रेम के पात्र है

जिनका जीवन सेवा ही मात्र है

हमे खाने को फल देते, फूल देते

पर बदले में किसी से कुछ भी न लेते

यह पेड़ बिना भेद भाव के देते छाव

जब भी ताप्ती धुप में किसी राह चलते के थक गए हो पाँव

जब भी कोई पेड़ को मरता पत्थर बारम् बार है

बदले में फल दे दिखलाता वह अपना प्यार है

जैसे एक शिशु अपनी माँ को कितना ही हो गुस्सा

पर माँ बदले में प्रेम दे मानती है उसे बहला फुसा
जब कोई पेड़ पे बांध झूला झूलता

तब पेड़ उसे प्रेम से ही तौलता

भले ही पेड़ की टहनी प झूले के भार सेे पड़ते कितने घाव है

पर वह तुम्हारी ख़ुशी में खुश रहता ऐसे उसके भाव है
अगर कोई पेड़ को पानी भी न पूछता

तो भी वह एक बार भी उफ़ ना करता

बिचारा भूखा प्यासा रह जाता है

पर बदले में प्यार ही लौटाता है
अगर कोई अपने घर बनाने के लिए पेड़ को देता कटा

वह हस्ते हस्ते कट जाता चाहे उसकी लग गई हो वाट
छोटे छोटे पक्षियों को रहने को देता बसेरा है

उनकी ज़िन्दगी में पेड़ लाता नया सवेरा है
अगर आपको किसी गरीब को घर में देना हो आश्रय

आप सोचेंगे हज़ार बार, पर नहीं देंगे अनुमती महाशय,

पर पेड़ को देखो कैसे वह दिलदार है

कुत्ते बिल्ली गरीब अमीर सबको देता वह चाव हर बार है।

पेड़ छोड़ता ऑक्सीजन भारी

जिससे धरती पर जीवन है जारी
क्या कभी पेड़ ने किसी को नुकसान पहुचाया है

उसने तो खुद को दाव पे लगा सबको फायदा दिलाया है
इंसान ने तो सारा जीवन बस युद्ध और घृणा में बिताया है

इंसान के अंदर बस वासना ही समाया है

नोट कमाने में उसने अपनी लालच को ही बढ़ाया है

अंत समय जब आएगा

तब नोट को क्या इंसान खायेगा

इंसान का मन ही उसके साथ जाएगा

इंसान प्रेम देना नहीं , प्रेम लेना चाहता है

पर प्रेम लेना मतलब , प्रेम की भी लालच है

इसलिए मन में लालच नहीं प्रेम भरो

इन बेज़ुबान पेड़ों को प्रेम करो

बदले में कुछ भी पाने की उम्मीद मत करो।
और प्रेम पेड़ों से बहुत सरल है

पेड़ नहीं मांगते तुमसे कोई गिफ्ट का पार्सल है

पेड़ों को थोड़ा पानी पिला यार

वे याद रखेंगें तुम्हारा यह प्यार

प्रेम से पेड़ों पे फेर हो हाथ

पेड़ न भूलेगा तुम्हारी यह मुलाकात

इस अकेलेपन में उसको भी मिल जाएगा साथ

ऐसा रोज़ करने से तुम भी हर जीव के लड़ती प्रेम से भर जाओगे

इनके साथ समय बोटा तुम अपने अकेलेपन को भूल जाओग

Hindi Poems

Nakaratmak Bhavo Ke oorja - Moral Poem in Hindi

​स्कूल में पढ़ा था मैंने कभी,

ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती,

वह एक स्रोत से दूसरे स्रोत में परिवर्तित हो जातीै।

जैसे सूर्य की ऊर्जा पानी को सोख जाती,

और पानी को बादल बनाती।

फिर बादल की ऊर्जा वर्षा करवाती।

उसी तरह हमारे शरीर में भी बहुत बड़ी ऊर्जा का स्त्रोत है

क्रोध में ऊर्जा लाते और घूसों में परिवर्तित होत है

ख़ुशी में ऊर्जा हँसी और ठहाको में जाती जोत है

प्रेम में ऊर्जा प्रेमी की सेवा में परिवर्तित होत है

और काम वासना की महा ऊर्जा, एक नए शिशु को जन्म देने में जाती जोत है।

डर की ऊर्जा से बुद्धि नष्ट होत है

व्यार्थः चीनता ना देती चैन से सोत है

और लालच की मनः स्थिती को तुम देते आराम कोे खोत

मनुष्य का शरीर बड़ा निराला,

अदृशय ऊर्जा ने हमारे जीवन को भावो से भर डाला

पर ऊर्जा का सही उपयोग हमे स्कूल में नहीं सिखाया

वर्ना क्रोध को कभी तुम दबाते न भाया

और टीन ऐज के लड़के ना व्यर्थ करते वीर्य को, जिसे इतनी मेहनत से कमाया

चिंता ने तुम्हारा बीपी न होता बढ़ाया

डर मे ना होता तुम्हारा शरीर कंपया

लालच ने तुम्हे अपनों से न होता लड़ाया
यह सब जो नकारात्मक और सकारात्मक भाव है

यह दबाने और छुपाने पे बनाएँगे शरीर के अंगो में घाव है

उदहारण से समझाता हों इस बात की गहराई

फिर तुम माँपना आपने आन्तरिक भावो की खाई

जिसने इस बात को समझा उसने सब कुछ पाया है

और जो न समझ सका उसने इस जीवन को व्यर्थ ही गवाया है

बहूत अधिक क्रोध है मानो बाड

सनी देओल ग़दर में पंप देता है उखाड़

और अपने दुश्मनो को देता पछाड़

अब अगर सनी देओल ईसी क्रोध को दबा के लेता रोक

तो ईतनी ऊर्जा का शरीर के अंदर होता विस्फोट

और शरीर के अंगों में बन जाती गाँठे जैसे अक्रोठ

हम हर बार क्रोध को दबा के बना रहे है शारीर को बीमारी का घर

पर इसका उपाय यह नहीं की तुम सबपे क्रोध कर दे दो सबको उलटे जवाब उधर

अपने क्रोध को रोको दबाओ, किसी पे क्रोध मत जताओ

फिर एकांत खोज शरीर की मासपेशियों को दबाओ

क्रोध की भयानक ऊर्जा को खुद को आराम देने में लागाओ

ईसी प्रकार हर नअकारात्मक भाव की ऊर्जा से खुद को आराम दिलाओ

डर , चिंता, लालच का वेग जब छा जाय

तब अपने शरीर पे करो मालिश का उपाय

Hindi Poems

Asha ke kiran - Hope Poem in Hindi

जब चारों तरफ हार के बादल छा जाए
और आशा की हर किरण कुचल दी जाए

जब धैर्य का बांध टूट जाए

और चारों ओर अंधेरा छा जाए

जब सब द्वार बंद हो जाए

और सरे रस्ते खो जाए

तब तुम उम्मीद का दिया जलाओ

दीये की रौशनी से अंधकार को भगाओ

और खुद को याद दिलाओ

सारे रासते खो गए हो अगर, तो हम नया रास्ता बनाएंगे

सब द्वार बंद हो अगर, तो द्वार तोड़ के अंदर जाएंगे

इंसान ने धैर्य, परिशम और सकारात्मक सोच से हर असंभव को संभव किआ है

खुद को पागल कहला कर ही इन्सान ने अपना सपना जिया है,

आसमान में उड़ने कअ ख्वाब देखने वाले पागल कहलाते थे,

चाँद पे चलने के सपने को सब व्यर्थ बताते थे,

मीलो दूर किसी से बात कर पाना था मुशकिल

और मुश्किल था भर पाना फ़ोन स बिजली के बिल

अरे मोबाइल से कैसे हो सकती थी चैटिंग,

कैसे बन सकती थी ऑनलाइन पेंटिंग

क्या कभी डाकिये घर पे जूते देने आते थे

और क्या कभी फोन से टैक्सी मंगवाते थे

यह सब कभी बंद दरवाज़े थे,

यह सब बिना चाबी के ताले थे,

पर सतत प्रयास ने हर दरवाज़े को तोर दिया,

धैर्य ने हर तालेे को खोल दिया

तुम भी व्यर्थ समय न गवाओ

फिर से प्रयास में जुट जाओ

अर्जुन की तरह चिड़िया की आँख पइ निशाना लगाओ,

अपनी नदी को सागर से मिलाओ,

और ज़ोर लगाओ,

अपने मन में बैठे शत्रु को मार गिराओ,

अब अशरू ना बहाओ

खुद को चट्टान बनाओ

खून पसीना कर डीओ एक,

जीत के लिए लगेंगे प्रयास अनेक

डर को दो अब तुम फेक

और जुट जाओ अब तुम बिना लगाए ब्रेक।

Hindi Poems

भाव

इक थी मैया,
बाल-गोपाल की पुजारिन,
हल्वा-पूरी का भोग लगाती,
प्रभु भक्ति मे रहती थी डूबी,
इक बार मैया थी उदास,
कुछ बाल गोपाल से रुठी, 6 more words

Hindi Poetry

बाँके-बिहारी

कृष्ण की लीला,
जग मे न्यारी,
भक्तों ने पुकारा,
दौड़े चले आये,
बाँके -बिहारी,
मीरा की भक्ति,
राधा की प्रीत,
रुक्मनि के मीत,
ग्वालो के सखा,
बन गये बिहारी,
जिस भाव से,
हरि को पूजा,
वैसे बन गये बिहारी,
भक्तों की पुकार पर,
दौड़े चले आये बिहारी,
भक्तों के भाव से,
बंध गये बिहारी,
यशोदा मैया ने,
हरि को पुकारा,
बाल-गोपाल बन
गये बाँके-बिहारी,
बस भाव के भूँखे,
जग के त्रिपुरारी,
जग को अगुँलियो
पर नचाते है बिहारी,
पर गोपियो ने नचाया,
तो नाच गये बिहारी,
भक्तों के भाव से,
बँधे है बिहारी।

Hindi Poetry

 "अंजान" 

​ये रास्ते “अंजान” है ,

कुछ चाहतों का बोझ हैं ,

थोड़ी बेचैन सी जिंदगी ,

ऒर इन हथेलियों पर जान हैं !!
आंसुओं पर पलकों की पहरेदारी हैं ,

निगाहों में अब भी एक तसवीर पुरानी हैं ,

ढूंढ़ नहीं पाया खुद की पहचान अभी ,

जाने दुनियाँ में ,क्या मेरी हिस्सेदारी हैं !!
ये वक्त भी मुझसे यू रूठा सा हैं ,

अब तो हवाओं ने भी रुख बदल लिये ,

उलझता गया खुद एक कश्मोकश मे ,

खुद की रूह से मेरा हर रिश्ता टुटा सा हैं !!
बनता गया अफसाना मेरी कहानी का ,

परखा मैने कुछ लोगों का तरीका ,

सीखा कुछ सलीका मतलबी दुनिया से ,

जल्द किस्सा आएगा अब मेरी बेईमानी का !!
– आयूष (अनजान )

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