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ख़ामोशी !


जब थक जाएँ पैर तुम्हारे, संघर्ष पथ पर चलते चलते,
जब छा जाए हर ओर अँधेरा, डूब जाए सूरज ढलते ढलते।

जब सही राह खो जाए, ना मिले सागर का कोई किनारा,
जब तूफ़ान घेर लें सभी तरफ, ना हो पास में कोई सहारा।

तब इन विपदाओं से हो भयभीत, ना करो मन को कमज़ोर सुनो,
छोड़ो इस दुनिया की बातें, लो ख़ामोशी का शोर सुनो।

“जीवन एक अबूझ पहेली है, इसका हल इतना आसान नहीं,
पर सुलझाने आया इसको, इन्सान ही है भगवान नहीं।”

कदमों को ना अब रुकने दो, खुद पर पूरा विश्वास रखो,
संदेही विचारों को छोड़कर, बस मंजिल का आभास रखो।

जो सुनना हो अंतर्मन की दुविधा, तो भावों की आई हिलोर सुनो,
छोड़ो इस दुनिया की बातें, लो ख़ामोशी का शोर सुनो।

हर शब्द के लिए आवाज़ मिले, ऐसा तो ज़रूरी नहीं होता,
हर सुर को नित नए साज़ मिले, ऐसा भी जरूरी नहीं होता।

कुछ बातें मौन ही हो जाती हैं, अपना मतलब समझा जाती हैं,
कुछ घटनाएँ घटित होने पर ही, अपना अस्तित्व बता पाती हैं।

ये सारी बातें जो सुन ना पाओ, तो आओ चलो कुछ और सुनो,
छोड़ो इस दुनिया की बातें, लो ख़ामोशी का शोर सुनो।

– अनभिज्ञ

Poem

ऐ खुशी !!

ऐ खुशी तू ज़रा नाखुश क्यों है ?

क्यों लगे थोडी कम तू,बुझी बुझी क्यों है ?

जब छोटे थे हम तो तू लगती बडी थी ।

अब हम हैं बडे,पर कहाँ छिप गई तू यहीं तो खडी थी ।

वो पहले तू आती थी बिन कुछ बताए ।

अब न जाने तू क्यों घबराये ?

चहकती है तू उस बच्चे की अठ्ठनी में ।

अब मैं ढूंढता हूँ तूझे पैसों की खनखनी में ।

तूझे पाने को सारे जतन ये करूँ मैं ।

पा लूंगा तूझे फिर से, मन में हिम्मत भरू मैं ।

मुझे लगता है,उन लंबी गाडियों में कहीं है ।

कभी सोचता हूँ इन ऊँचे बंगलो में तो नही है ?

इस कागज़ के टुकडे मे दिखती नहीं है ।

बता दे तू मुझको, तू है या नहीं है ?

ये माथे पे चिंता,आँखों में नमी क्यों है ?

क्यों हैरा है मुझसे,ये बेरूखी क्यों है ?

ऐ खुशी तू ज़रा नाखुश क्यों है ?

क्यों लगे थोडी कम तू,बुझी बुझी क्यों है ?

हिंदी कविता

POEM 17

Ye lafzon ke mayne kitne gahre Hain,

Bewajah Kuch to nahi kahte hain,

Khamosh zubano me simte hue Hain,

Ye bin pooche to Kuch nahi kahte hain, 43 more words

Poems

हालात क्या बदले यहाँ सब अपने बदल गए….

साथ जिनके जीने के सपने देखे थे …

वो सब सपने बदल गए…

बातों में कितना करीब थी तू मेरे …

Hindi Poems

Hi everyone, this is my first blog and this is really a new place for me.I am here to start a series of hindi poetry,which i think are self explanatory and takes us to a complete different world,in simple words.I Hope people connected with this language and also people who just love hindi will appreciate my work.Here is the first landmark on start of this journey and it takes you somewhere beyond those mountains.

दूर कहीं उन पहाडों के बीच !!

दूर कहीं उन पहाडों के बीच ।

जिंदगी खुशनुमा है बस आँखों को मीच ।

जहाँ घरौंदे बनाती है चिडिया

और बुनती है वो अपने सपनों की लडीयाँ ।

जहाँ तपते सुरज में ठंढक अजब है ।

कहाँ आ गये हम ये जहाँ तो गजब है ।

अजब है ये लोग,इनके खेल और खिलौने ।

है जेबों में पैसे, फिर भी हम बौने ।

जाने क्यों लगती अलग ये फिज़ा है ।

बातें ये करते हैं सुख और अमन की ।

हमारे यहाँ तो अलग ही जहाँ है ।

है धरती पे नाखुश और बातें गगन की ।

रहते हैं मिलकर न दुरियां इनके बीच ।

हमने तो रखी हैं रेखायें खींच।

दूर कहीं उन पहाडों के बीच ।

जिंदगी खुशनुमा है बस आँखों को मीच ।

है नदीयों का शोर, झर झर से झरने ।

यहाँ जैसे धरती ने पहने हो गहने ।

पंछी ये उडते बडे मनमाने ।

न पिंजडों में चुगते ये महँगे से दाने ।

देखो इन्हे भरोसा बहुत है,

उस पत्थर में इनकी आस्था अदभुत है ।

हमारे यहाँ तो अलग ही  समां है,

ये हस कर है कहते कहाँ ये जहाँ है ?

इन्हे झुठी लगती पहाडों की बातें,

करते हमेशा अकल की ही बातें ।

माना की न हो कुछ उन पहाडों के बीच ।

पर जब तक न मिट जाती ये ऊँच-नीच ।

गायब न हो जाती दुरियां अपने बीच ।

रखते हैं मन में ये तस्वीर खींच कि,

“दूर कहीं उन पहाडों के बीच ,

जिंदगी खुशनुमा है बस आँखों को मीच”  ।।

हिंदी कविता

POEM 15

Lamhe Yun hi nikal jaate hain,

Na tasavvur hota hai,
Na intezaar khatam hota hai,

Na armaan pighalte hain,
Na ahsaas kam hota hai,

Na aas chhotti hai, 69 more words

Poems

POEM 14

Na sikha udna in parindon ko aasman mein,
Ye hunar seekhte hi phurr ho jaate hain ,
Jo ghosle mein hain … tere paas hain, 113 more words

Poems