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Hindi Poem: Yaadein

देखि  नहीं  एक  अरसे  से  उसकी  तस्वीर  कहीं,

न  खनकी  इन  कानो  में  उसकी  आवाज़  कहीं ,

लगता  है  वो  रूह , अब  रूमानी  हो  गई  होगी,

Love

ज़िन्दगी...

​ कुछ हमारे हाथों की लकीरों की मेहरबानी है ज़िन्दगी

कुछ इस कुदरत की मनचाही मेज़बानी है ज़िन्दगी
हैं चाँद, ये तारे, ये ज़मीन और आसमां जिसके …

Hindi Poems

Hindi Poem: Ab Jaoo !!

Ab jab ja rahe ho, to bus jao,

Kuch bata ke mat jao, kuch jata ke mat jao.

Kuch samja ke mat jao, kuch buja ke mat jao, 160 more words

Love

मेरा ही तो कसूर था..!

​हर छोटे बड़े फैसले दूसरों को लेने दिए

कभी आंसू छुपाये कभी आँखों को भिगो दिया

मेरा ही तो कसूर था ।

चारों और चांदनी देख दिल में अँधेरे छुपा लिए

अँधेरी राहों में अपने पांवों को काँटों पर चला दिया

मेरा ही तो कसूर था ।

ज़िन्दगी की भीड़ में अनजाने लोग अपने बना लिए

वक़्त की रफ़्तार को देख अपनों को पराया बना दिया

मेरा ही तो कसूर था ।

कभी हांफती साँसों के एहसास खुद ही सँभलने दिए

कभी चलती साँसों को थम जाने का अवसर दिया

मेरा ही तो कसूर था ।

कुछ करीब दोस्तों के साए खुद पर हावी होने दिए

कुछ को भुला कर दिल को उसके रस्ते पर चला दिया

मेरा ही तो कसूर था ॥

Hindi Poems

Again - पुनः - Hindi Poem

तो क्या था वो जो फिर से हुआ,

कि मैंने तुम्हें था जो खत लिखा,

तुमने लगाया था सीने से,

और बदले में था कुछ ना कहा,

थे सोच में तुम था सोच में मैं,

कि आगे जाने क्या होगा ?

देखा था तुम्हें मैंने ख़्वाबों में,

जो आधा अधूरा टूट गया,

भविष्य का जैसे कोई आइना,

जिसमे चेहरा अपना रिश्ता,

थी डरी सी तुम लेकिन तुमने,

कसकर पकड़ा था हाथ मेरा ।

शायद उसके आगे का सच,

बिन देखे जाने जानता हूँ,

तुम कौन हो और मैं कौन हूँ,

ब्रम्हा का सच पहचानता हूँ,

अनजानों को मेरी बात अति,

मैं तुम्हारा शिव तुम मेरी सती ।

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The God of your house - तेरे घर का भगवान - hindi poems

बताओ ना,

हम जीते क्यूँ हैं,

जो डर है, पता है,

मौत तो आनी है एक दिन ।

बताओ ना,

हम साँस क्यूँ हैं लेते,

जो एक रोज़,

जाने के बाद,

वो मेहमाँ ही रहेगी शायद हमेशा ।

बताओ जो ये हक़ीक़त ही है,

जो है सबको पता तो,

फिर क्यों फैलाया ये,

रंगीन मेला जो एक रोज़,

सूना सा हो जाना है ।

क्यों रोज़ जलाती हो,

चूल्हा और उस पर,

तवा रोज़ भूख पकाकर भी मेरी,

पकता नहीं जलता नहीं ।

क्यों हर सवेरे के साथ हम,

उठते हैं और,

खिड़की पर आती है,

वो चिड़िया इस आस में,

मिल जाएगा,

उसे एक दाना ।

क्यों जब सबकुछ,

भला होना है तो तुम्हे डर है क्यूँ,

तेरे घर वाले, मेरे प्यार को,

अपनाएँगे नहीं,

जिसे पूजता है तेरे घर का भगवान ।

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Faasley..!

Hain jo faasley tere mere darmiyan

Mit’te hain kyon nahin

Khafa hone ki wajah hamare pas bhi thi

Jo hum khafa na huye

Kya wo hamari khata thi ya tumhari? 15 more words

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