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नारी की कलम से।

मेरा सुकून भी तुम,
मेरा चैन भी तुम,
कहना चाहा और,
चाँहूगी तुमसे कहना,
कई बार,बार-बार,
सदियो से मैं बहे जा
रही निंरतर प्रवाह सी,
मधुर रसधार लिये,
तुम्हारे लिये जाने
कितने प्यार की
मधुर सौगात लिये,
पर जाने क्यों तुम
इतने गिले-शिकवे,
लिये रहते हो?
वंचित रह जाते हो
मेरे अथाह प्यार से,
सुनो कभी तो सुंकून
से भी सुनो, पल भर
को थमकर तो सुनो,
समझ पाओगे तुमसे,
मेरे अथाह प्यार को,
समर्पण को,बातों को,
चंचलता को और तुम्हें
देखकर मेरे चेहरे पर
खिलती मुस्कुराहट को,
पर जाने क्यों तुम
न थमते हो मेरे पास?
न रूबरू होते हो कभी?
मै फिर बहे जाती हूँ,
कभी मौन होकर,
कभी स्थिर होकर,
कभी शांत होकर,
कभी खफा होकर,
कभी उफनाकर,
कभी साहसी बनकर,
चट्टानों से टकराती,
अपने ही बबंडरो मे,
तरंगो मे उलझी हुई,
लेकिन हमेशा से,
तुम्हारी ही ओर,
कभी सरिता बन,
कभी झरना बन ,
बस अपनी मौजों मे,
अपनी ही सीमाओं मे
तुम्हारी संगिनी बनकर।

Poetry

यादें बात करती हैं

बातों-बातों में उस रात ये बात निकली,
यारों की बारात में यादों की बारात निकली।
वो बोला,”गुस्ताखी खास करती हैं।
फिर दिल-ए-फरियाद करती हैं।
यादों से पूछो यादें क्यों बात करती हैं?” … 6 more words

Hindi Poems

बस मुस्कुरा देता हूं...

तुम याद आती हो अब भी रोज़, पर फिर मैं भुला देता हूँ,
दिल चाहता है तुमसे रूबरू होना, पर हसरतों को दिल में दबा देता हूँ,
आज भी उलझता हूँ, उन रूठे ख्वाबों को सहेजने में,
पर अब हकीकत की खुशी है इतनी,
कि जिन्दगी को कर शुक्रिया, बस मुस्कुरा देता हूं…
-सन्नी कुमार

मेरी कविता

इम्तिहान

बचपन मे जब इम्तिहान,
दिया करते थे,
सुने हुये हर शब्दों को,
याद रखा करते थे,
अब जिंदगी के इम्तिहान,
दिया करते है,
मन को व्यथित करते,
कई शब्दों को अक्सर,
भूल जाया करते है,
मै कहूँ या न कहूँ,
पर हर इंसा जीवन मे,
शब्दों को अक्सर,
भूल जाया करते है,
रिश्तों को निभाने के लिये,
अपनो को पाने के लिये,
अक्सर सुने हुये शब्दों
को भूल जाया करते है,
जिन किताबों के सफे
भी याद हुआ करते थे,
इम्तिहान की तैयारी पर
खुश हुआ करते थे,
पर अब जिंदगी मे,
कई सफे यूँ ही बंद,
कर दिया करते है,
और खुश हुआ करते है,
मै कहूँ या न कहूँ,
हर इंसान जीवन मे ,
शब्दों को अक्सर,
भूल जाया करते है,
सचमुच जिंदगी के इम्तिहान
अजीब हुआ करते है,
सुने हुये शब्दों को भूलकर
ही अक्सर इम्तिहान
दिया करते है,
सच से जुड़े इम्तिहान
हुआ करते है।

Poetry

शहीदों को नमन..

भारत को स्वतंत्रता देने के लिए, जान की बाज़ी खेली तुमने

हम देखो कैसे आज, भारत के ग़ुलामी नाम कर गए

ना ग़ुलाम अंग्रेजों के, ना ही किसी और का साया हम पर

Hindi Poems

गौरैयाँ बचाओ।

जबसे गाँव शहर से हो गये,
मिट्टी के घर अब पक्के हो गये,
तबसे खेत-खलिहान,पंछी,
तलैयाँ सब भूले-बिसरे हो रहे,
रोज सुबह नजर आती गौरैयाँ, 6 more words

Poetry

ज़िन्दगी दौड़ती एक पटरी पर सालों से

बदल गयी चाल उसकी जब एक लम्हे में

जादू ने बदल दिए चेहरे और उनके नक़ाब

कोयले से हुए हीरे और मिट्टी से रकाब

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