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प्रीतप्रथा

पागलपन की सीमाओं पे चलती वो
हवाओं का ठिकाना ढूंढ़ती रहती ,
चाहा न था उसने कभी उसे छोड़ जाना
पर दर्द का क़र्ज़ तो था चुकाना ,
कह गयी बेवफा कह कर बदनाम कर देना
हमारी अधूरी कहानी याद मत करना ,
अगर खरा है प्यार का रिश्ता
तो जीतेजी फिर कभी मुझे आवाज़ न देना,
खुद को दुनिया का सबसे बड़ा जुआरी मानता
क्यूंकि मौत का खेल वो कभी हारा न था ,
कौनसा खेल खेल कर चली गयी वो उसके साथ
जब हारा तभी उसे उस खेल का पता चला ||

-अंतिम अभय

Poetry

मेरी कलम से …14

सिसकियों का मलहम

उदास रातो में अपना ज़ख्म सहलाता रहा …
रह-रह कर सिसकियों का मलहम लगाता रहा !!!

सारी गलती साकी की हो ये जरुरी तो नहीं …
यही सोच-सोच कर इलज़ाम लकीरों पर लगाता रहा !!!

Hindi/Urdu Poetry

चरमवेद  

ध्वनि  की  दीवार  टूटेगी  और  शांति  के द्वार  जब  खुलेंगे,

जीवन  के  सारे  भेद  स्पष्ट  हो  जावेंगे

जलाशयों  में प्यासे  रह  ईंटो  की  किताब लिखोगे   ||

Philosophy

।। कल धुप मिलेगी राहों पर ।।

आ शौर्य बना आवरण तेरा

चल निकल पड़ें बस राहों पर

मन में ना रख सन्देह कोई

अपनी इन लौह-भुजाओं पर

मिलती मंजिल ना पथिक कभी 11 more words

Book Review: Kuch Vo Pal

Hindi poets such as Gulzar, Kabir, Harivansh Rai Bachchan, Javed Akhtar, etc. have always influenced my thoughts in poetry. Their works have always inspired me. Rarely have I come across debut works in Hindi poetry from contemporary writers. 461 more words

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