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आज फिर सपनों मे आना तुम...

आज फिर सपनों मे आना तुम,
गीत वही गुनगुनाना तुम,
जो रूठ जाऊँ मैं अगर,
इसी तरह प्यार से मनाना तुम।
एक और दिन बीत गया,
रात है देखो लौट आई,
इस चाँदनी भारी रात मे,
साथ मेरे चलना तुम।
देखो आसमान बदल रहा है,
बादल गहरे बन रहे हैं,
अगर ये बादल बरसे तो,
साथ मेरे भीगना तुम।
आज फिर सपनों मे आना तुम,
गीत वही गुनगुनाना तुम।

Vishvas Arora

बाक़ी है

यूँ मैं भूलूँ तुमको, पर कुछ दर्द अभी भी बाकी है
इश्क़ ने जिसे क़त्ल किया वह मर्द अभी भी बाकी है
रही अधूरी यारी जो वह फ़र्ज़ अभी भी बाकी है
मानो जैसे खुदका खुदपर क़र्ज़ अभीभी बाकी है
अनजाने में हुई गलतियाँ दिल पर मानो टांकी है
घायल मांगे माफीनामा दिल तो फिर भी पाकी है
पलकों पीछे छिप के बैठे, अश्क़ अभी भी बाकी है
तू पूछे तो ना बोलूं, पर इश्क़ अभी भी बाकी है!

My Writings

संस्कृति

इस आवाज़ की गुनगुनाहट में
सातों साज़ बजते हैं
ये खुशनुमा मौसम
बस इक आहट से मचलते हैं ।

कभी इन नैन-झरोखों से
रब का नूर छलकता है 35 more words

Hindi Poems

हल्की सी रोशनी

कभी जो बादल छा जायें
सपनों के आसमान पर
हिम्मत कभी ना खोना तुम
हल्की सी जो रोशनी
बादलों में से झांकती है
बस उस पर नज़र रखना तुम
काले बादल छंट ही जाएंगें
तेरे सपने इक रोज़
ज़रूर रोशनी में नहाएंगे
सब और उजाला होगा
तेरे सपनों का फिर
तुझसे मिलन होगा
हौंसला बनाए रखना तुम
हल्की सी जो रोशनी
बादलों में से झांकती है
बस उस पर नज़र रखना तुम!

© Rachna

Poetry / कविता

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है

सदियों की ठंढी, बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है। 8 more words

FAMOUS HINDI POEM

Jindagi ruth gayj humse

Na jane kyun yesa lagta hai..
jindagi humse ruth gayi hai..
Na jane kyun yesa lagta hai
jaise koi apna piche chut gaya hai..

Pal pal sochte the yahi ki, 104 more words