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​किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह . वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की तरह.....✍

​किया है प्यार जिसे हमने ज़िन्दगी की तरह

वो आशना भी मिला हमसे अजनबी की तरह

किसे ख़बर थी बढ़ेगी कुछ और तारीकी

छुपेगा वो किसी बदली में चाँदनी की तरह

बढ़ा के प्यास मेरी उस ने हाथ छोड़ दिया

वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह

सितम तो ये है कि वो भी ना बन सका अपना

कूबूल हमने किये जिसके गम खुशी कि तरह

कभी न सोचा था हमने “क़तील” उस के लिये

करेगा हमपे सितम वो भी हर किसी की तरह

….. कुमार शशि…..

#_तन्हा_दिल…✍Meri Qalam Mere Jazbaat♡

The Spirit Of Ghazals

ग़म

ग़म-ए-जुदाई भी सह लूँगा…।

ये तन्हाई भी सह लूँगा…।

ना कहना कि चाहत है किसी और से..,

भला तेरी बेवफाई कैसे सह लूँगा…?

इस मासूम से दिल को न तोड़ो इस क़दर..,

भला इस टूटे दिल के साथ कैसे रह लूँगा…?

New Shayari

दिल के हर गम को हँस कर उराते चले गए ! राहे वफ़ा में खुद को मिटाते चले गए !!.......✍🎤

दिल के हर गम को हँस कर उराते चले गए !

राहे वफ़ा में खुद को मिटाते चले गए !!

कुछ इस कदर गुजरी हैं जिंदगी अपनी !

खुद रोए और सब को हँसाते चले गए !!

​….. कुमार शशि…..

✍Meri Qalam Mere Jazbaat ♡

The Spirit Of Ghazals

Shayar k dil ki awaz

​मैं तुम बिन आधा अधूरा हुँ

तुझ संग जुंडू तो पुरा पुरा हुँ …

मैरी कविता तब तक रुप नही लेती..

जब तक तुम उसमे तुम दिखाई नही देती…

रहता हूँ आस मैं पुरा होने को तुमसे..

बहता हूँ कतरा कतरा तुमहारे बिन ,बिना मुसकान के…

तुमहे लिखु तो लफज तुममे घुल जाते है…

कौरे कागज़ तुमसे रंगने लग जाते है…

कुछ और लिखुं तौ गलतियौ के जमाने हौ जाते है…

ना रंग चढ़ता है लफजौं मै..

ना रूप लैती है मैरी कोई छायाचिञ..

तुम नजर भर देख लो,तो कायनात रंगमयी हो जाती है…

फिर ना कोई कमी नजर आती है…

तुमहारे नजरौं मै आने के लिए गलतियां करता हूँ…

तुमसे जुड़ने के लिए कभी पागल,

तौ कभी फिसडी़लाल बना फिरता हूँ…

रहता हूँ तुमसे जूँडने की आस मैं..

बार बार शुकरियाँ करता हूँ हर एहसास मैं…

तुम बिन अधूरा हूँ मैं..

तुमसे जुडूं तो पुरा पुरा हूँ मैं….।

-Deshrajsingh Sengar

Wordporn

​♡ हवा बन के बिखरने से उसे क्या फर्क पड़ता है. मेरे जीने या मरने से उसे क्या फर्क पड़ता है ......✍♡

​हवा बन के बिखरने से उसे क्या फर्क पड़ता है
मेरे जीने या मरने से उसे क्या फर्क पड़ता है

उसे तो अपनी खुशियों से जरा फुर्सत नही मिलती …

The Spirit Of Ghazals

​सज़दे में इस सर को झुकाना पड़ता है सबको अपने दिल में बसाना पड़ता हैं....✍. Meri Qalam Mere Jazbaat ♡

​सज़दे में इस सर को झुकाना पड़ता है
सबको अपने दिल में बसाना पड़ता हैं

प्यार मुहब्बत दिखने में ही आसां है

इस दरिया में डूब के जाना पड़ता है

The Spirit Of Ghazals

untitled

एक नयी कहानी शुरू हुई
उसी जगह
जहाँ दफ़न की गयी थी
पुरानी कहानी, जिंदा
यूँ ही नही आते
ये जलजले ये तूफान
शायद वही दफ़न कहानी
तड़पती होगी तरसती होगी

Ashwini Sharma

Hindi