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Naimittika or Occasional Dissolution

In the last post, we saw about the 2 types of dissolutions- Nitya and Atyantika Pralayams- that are closest to us (relatively at least). In this post, let us gain some knowledge about the first 2 types. 399 more words

Hindu Mythology

Dissolution and Us

I ended the last post with some lingering questions about the first half of Brahma’s life and about the previous Manus. If you wonder what happened to them, Pralayam or Layam or dissolution – is what happened. 240 more words

Hindu Mythology

Roots of Indian Mythology

The roots of Indian mythology that evolved from classical Hinduism come from the times of the Vedic Civilisation, from the ancient Vedic religion. The four Vedas, notably the hymns of the Rigveda, contain allusions to many themes. 552 more words

Classical Hinduism

Mother Saraswati

Note: This is NOT a religious post and certainly NOT a post about how ‘great’ Hinduism is. And this is a personal interpretation inspired by various books that I read and conversations that I had. 671 more words

Spirituality

Sankalpa Manthra and Geo Tagging

Anyone who has performed a religious function would have chanted a Sankalpa Manthra. Like any other Manthra, we would have chanted this without knowing its meaning. 493 more words

Hindu Mythology

जय श्री राम-1

जब – जब जीवन ने,
संघर्ष किया।
सागर ने रोकी राहें,
पत्थरों ने साथ दिया.
जब छूट गए अपने,
कोसों दूर.
सत्य की लड़ाई में,
भील, रीक्ष और बानरों ने,
संग युद्ध किया.
जब – जब सत्ता ने,
संहार किया.
मौन हुए जब वेद-पाठी,
और देव-गण.
एक नारी के संघर्ष में,
पक्षियों (जटायुं) ने,
युद्ध आरम्भ किया.
जग को सिखला गए प्रभु,
राम-रूप में,
सत्य की राह पे मानव ने,
भगवान से बढ़के काम किया.
जब – जब जीवन ने,
संघर्ष किया।
सागर ने रोकी राहें,
पत्थरों ने साथ दिया.

परमीत सिंह धुरंधर

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जय श्री राम

बल से बड़ी बुद्धि,
बुद्धि से बड़ी भक्ति.
जो राम की चरणो में है,
उसी की है मुक्ति.
जिसके एक ही नाम से,
पत्थर तक जुड़ गए.
सागर की लहरों को मथ के,
किनारों को जोड़ गए.
जहाँ सूझे ना,
कुछ भी आकर,
वहाँ काम आती है बस,
राम-नाम की युक्ति.
बस छूकर अहिल्या को.
पत्थर की मूरत से,
नारी-रूप दिया.
चखकर जूठे बेरों को,
भील सबरी को,
माँ का सुख दिया.
जग में कभी नहीं है,
प्रेम से बड़ी कोई शक्ति.
बल से बड़ी बुद्धि,
बुद्धि से बड़ी भक्ति.
जो राम की चरणो में है,
उसी की है मुक्ति.

परमीत सिंह धुरंधर

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