Tags » Indian Independence Day

My Independence Day Makeup Look

If you follow me on Instagram, you may have already seen my Independence Day Makeup look, but in case you haven’t, here is a flashback just for you! 71 more words

Indian Beauty Blogger

Lucknow Metro | LMRC celebrates 71th Independence Day of India

Lucknow: The Lucknow Metro Rail Corporation (LMRC) today celebrated the 71st Independence Day with great fervour at its Administrative Building, Vipin Khand Office. The occasion was graced by Shri Kumar Keshav, Managing Director and other Directors of the organisation. 253 more words

Quest for freedom on Independence Day

Happy Independence Day!

With pride I watch, like every other Indian, the unfurling of the tricolor and the celebrations on the 71st Independence Day. India celebrates her birthday, her liberation from the largely perceived as “oppressive and repressive” 200-year colonial British rule. 610 more words

Whats On Seema's Mind

Pillars of India's growth and the types of terrorism targeted against it

Pillar’s of India’s rapid growth:

  1. Increasing strength of our armed forces
  2. Growing Infrastructure
  3. Bold political and constitutional reforms
  4. Cultural and Religious unity
  5. Rapidly stabilizing economy…
  6. 152 more words
Binary Pyramid

A word of caution while India Celebrates its 70th independence day

India’s 70th Independence Day comes with as many serious issues to be addressed as the number of proud moments it bestows.

Image courtesy: www.independencedayphotos.com

The prosperity of a nation lies upon its socio-economical progress, the integrity of the governing system, its production capacity, and unity amidst cultural diversity and most importantly, the way it stands out in the world backed by the strength of its people. 286 more words

Binary Pyramid

Indian independence

Today is the day for unabashed, jingoistic, patriotism, so here goes…

I’ll discuss independence another time. :)

Blog

आज़ादी चाहिए !!

आह !! 70 साल आज़ादी के |

70 साल पहले अंग्रेजों से देश को आज़ादी मिल गयी लेकिन वो धूर्त जाते-जाते हमें अंग्रेजी और अंग्रेजियत का गुलाम बना गए | खेर , उनका भी क्या कुसूर जब हम ही भूल गए कि क्यों हम गुलाम बने और क्यों हमें आज़ादी चाहिए थी | हम ये भी भूल गए कि जो हमारे लिए आज़ादी चाहते थे , वो हमें अंग्रेज़ों के समकक्ष नहीं उनसे श्रेष्ठ देखना चाहते थे | जो इस देश के लिए सब कुछ भूलकर शहीद हो गए , नहीं जाना चाहिए था उन्हें क्योंकि ये उनके सपनों का भारत है ही नहीं , काश कुछ ऐसा हो सकता कि वो वापिस आकर एक बार फिर उस देश के लिए कुछ कर पाते जिसकी आज़ादी के लिए वो चले गए, क्योंकि 70 साल बाद भी अगर देखें तो मुझे हम आज़ाद नहीं लगते | कहते हैं ना कि शरीर चले जाता है और आत्मा रह जाती है , शायद वही हमारे साथ हुआ , कहने को तो अंग्रेज हमें आज़ाद करके चले गए लेकिन अपनी आत्मा यहीं छोड़कर चले गए , तभी तो हम आज तक उनसे बराबरी करने की होड़ में लगे हैं | ऐसा लगता है कि उनके विचारों और हमारे विचारों में कोई द्वंद हुआ और हमारे विचार मर गए |

क्या हम आज़ादी के बाद भी इस देश के साथ न्याय कर पाए ?? मेरी राय में तो बिल्कुल भी नहीं क्योंकि हमने आज़ादी तो ले ली , लेकिन आज़ादी के लक्ष्य को आज तक हासिल नहीं कर पाये हैं | आज़ादी के बाद क्या मिला इस देश को और इसकी जनता को ?? झोंक दिया गया हमें बंटवारे और एक शापित राजनीति की आग में | आलम तो ये है कि आधे से ज्यादा राजनेता राजनीति इस देश के लिए नहीं अपने स्वार्थ के लिए कर रहे हैं, जिन पदों पर आसीन होकर वो इस देश को नई ऊँचाइयों तक पहुंचा सकते थे , वहां बैठकर वो उसे वापिस एक बेहतर स्थिति में भी नहीं ला पाए शायद |

एक बात और है जो मेरी समझ में नहीं आती ,ऐसा क्या हुआ होगा कि हम हर तरह से राजनेताओं पर निर्भर हो गए , क्यों हम में से हर एक आगे आकर ये नहीं कहता , कि इस देश में गन्दगी, भ्रष्टाचार, गरीबी , अन्याय , कुरीतियों , डांवाडोल अर्थव्यवस्था आदि के लिए हम और हमारा ये समाज भी उन राजनेताओं के बराबर का कुसूरवार है , हमारी गलती है कि हम कुछ चंद लोगों के हाथ में इतने जतनों के बाद मिली आज़ादी को सौंप कर निश्चिंत हो गए और अपनी – अपनी स्वार्थपूर्ति में लग गए , खुद को अंग्रेजों जैसा बनाने में इतना मशरूफ हो गए हम कि उस आज़ादी का मूल्य शून्य कर दिया जिसके लिए जाने कितने लोग शहीद हुए थे |

आज समय है कि एक – दूसरे को दोष देने के बजाय हम अपने दायित्व पहचानें , हम हमारे हिस्से के दायित्व निभाने के बाद ही इन राजनेताओं से उम्मीद कर सकते हैं कि ये अपने हिस्से के दायित्व निभायें , जैसे ताली एक हाथ से नहीं बजाई जा सकती वैसे ही इस देश की आज़ादी अकेले नेताओं के भरोसे सार्थक नहीं हो सकती|हम सब को मिलकर इस देश और इसके हर एक शहीद के लिए न्याय की लड़ाई में शामिल होना होगा | हर स्वतंत्रता दिवस पर ये याद करना होगा कि अभी बहुत कुछ है जिसकी इस देश को जरुरत है और आज़ादी भी उन्हीं में से एक है | हमें आज़ादी चाहिए , अंग्रेजियत से , उस भेदभाव से , उस जात – पात से , भ्रष्टाचार और हर एक भ्रष्टाचारी से , उन कुरीतियों से भी जो किसी को गुलाम बनाये बैठी है|

आज के लिए स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ अलविदा , इस अलविदा में एक उम्मीद है , उम्मीद एक सार्थक आज़ादी की , उम्मीद एक श्रेष्ठ भारत की |

Sonali Suthar