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The drive to learn driving 

I have heard many male colleagues saying that women are bad at driving cars, and being adamant about their opinions on this subject. Recently, a dear friend went to a car driving class for the second time in over 10 years, but has been having a tough time convincing her dad to let her use the car. 101 more words

Why Indian men are like this?

Under the light of recent events, I was motivated to meticulously pen down my thoughts and try to encounter the reason behind this fiasco. We all are ashamed when such incidents happen in our society. 356 more words

The Oomph of the Bra

Indian women are all born with this Obsessive Compulsive Disorder of straightening their bra strap all the while. They can flaunt their polished backs and heaving boobs and yet a thin black strap showing makes them the so called “vulnerable and potential targets to indecent men”. 547 more words

A Definitive Ranking of Men's Facial Hair in Classic Bollywood Films

Happy Movember! This lovely time of year is a month when men around the world grow out their mustaches to change the face of men’s healthcare–such as through raising awareness for prostate and testicular cancer. 613 more words

Guru Dutt

All about "Shoes" - part II

      Summarizing from the last part of our tiny little “shoe-story”, we emphasized on “why shoe styling is extremely important?”, and we also had a walk-through of  755 more words

Budget

ये हैं सर्जिकल स्ट्राइक का मास्टरमाइंड, इनके नाम से थर्राता है पाक

भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का ना अब पाकिस्‍तान के लिए शायद नया नहीं रह गया है। पाकिस्‍तान को उसी के घर में मात देने या सर्जिकल स्‍ट्राइक की हालिया स्क्रिप्‍ट उन्‍हीं की लिखी हुई है। एक पुलिस अधिकारी, फिर एक आईबी अधिकारी, एक जासूस और फिर एक एनएसए के तौर पर डोभाल ने हमेशा से ही अपनी कामयाबी के झंडे गाड़े हैं। उनसे जुड़े कई ऐसे तथ्‍य हैं जो बेहद कम ही लोग शायद जानते हों। तस्‍वीरों में देखें उनसे जुड़े कुछ रोचक तथ्‍य:-

1968 केरल बैच के IPS अफसर अजीत डोभाल अपनी नियुक्ति के चार साल बाद साल 1972 में इंटेलीजेंस ब्यूरो से जुड़ गए थे। अपने पूरे करियर में उन्‍होंने महज सात वर्षों तक ही पुलिस की वर्दी पहनी। पुलिस सेवा में उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए।

अजीत डोभाल ने करियर में ज्यादातर समय खुफिया विभाग में ही काम किया है। वह इस दौरान भारतीय एजेंट बनकर पाकिस्‍तान में करीब छह वर्ष तक रहे और अपने काम को बखूबी अंजाम दिया। साल 2005 में वह इंटेलीजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर पद से रिटायर हुए।

सके बाद साल 2009 में अजीत डोभाल विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसिडेंट बने। इस दौरान न्यूज पेपर में लेख भी लिखते रहे।

30 मई, 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को देश के 5वें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया।

जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों और शांति के पक्षधर लोगों के बीच काम करते हुए डोभाल ने कई आतंकियों को सरेंडर कराया था।

साल 1988 में अजीत डोभाल को सैन्य सम्मान कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान पाने वाले वह पहले पुलिस अफसर थे।

20 जनवरी, 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्‍में अजीत डोभाल के पिता इंडियन आर्मी में थे। उन्‍होंने अजमेर मिलिट्री स्कूल से पढ़ाई करने के बाद इन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पोस्टग्रेजुएशन किया है।

देशराग

इंडियन आर्मी का ये जवान कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में जाकर लोगों को दे रहा है जादू की झप्पी

आप सबने ‘मुन्ना भाई MBBS’ फ़िल्म ज़रूर देखी होगी. उसमें वो दृश्य जब मुन्ना(संजय दत्त) ‘जादू की झप्पी’ देकर सबका दिल जीत लेता है, बड़ा कमाल का था. भारतीय आर्मी को ये सीन कुछ ज़्यादा ही पसंद आ गया, तभी तो इस सीन से प्रेरित होकर आर्मी कश्मीर के संवेदनशील हिस्सों में लोगों को अपनेपन का एहसास दिलाने के लिए जादू की झप्पी दे रही है. ऐसा घाटी में फैली हिंसा को खत्म करने और स्थानीय लोगों का विश्वास पाने के लिए किया जा रहा है. यकीन मानिए घाटी में इसका असर भी खूब दिख रहा है.

इस अति संवेदनशील इलाके में अमन की बयार बहाने का काम कर रहे हैं अनंतनाग के इंचार्ज कर्नल धर्मेंद्र यादव. कर्नल यादव ने इसके लिए एक टीम बना रखी है, जो हर रोज़ क्षेत्र के बच्चे और बूढों से मिलकर उन्हें जादू की झप्पी देते हैं. अनंतनाग जिले में रहने वाले गुलाम मोहिनुद्दीन, जो पेशे से शिक्षक हैं, ने बताया कि ‘कर्नल यादव के कहने पर मैंने बच्चों को फिर से पढ़ाना शुरू किया, क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि किसी भी कारण से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो.’

सेना के इस कदम से जिले के कई क्षेत्रों में कानून और व्यवस्था पुनः बहाल होती नज़र आ रही है.गौरतलब है कि गुडगांव के रहने वाले कर्नल यादव, उसी टीम का हिस्सा थे, जिसने बमदूरा में बुरहान वानी और दो आतंकियों का एनकाउंटर किया था. एनकाउंटर के बारे में पूछने पर कर्नल ने कुछ भी बोलने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि ‘ये कहानी मेरे और टीम के लिए अब खत्म हो चुकी है.’ 

भारतीय आर्मी ने आज उन लोगों के मुंह पर ताले लगा दिए, जो आर्मी को क्रूर और कठोर दिल का समझते हैं. कर्नल यादव की इस अनूठी पहल के लिए पूरे देश को उन पर गर्व है.

देशराग