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Indian Rupee Update

The Indian rupee opened on a flat note on Friday. It was trading at 66.03 per dollar against previous closing of 66.04.Rupee is also expected to trade strong, supported by local equities. 16 more words

Stock Market News

Why Our Indian RUPEE still stronger after Stock market collapse?

पिछले हफ्ते चीन के केन्द्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने ग्लोबल करेंसी मार्केट में अपनी मुद्रा युआन में लगभग 4 फीसदी का डिवैल्यूएशन करके हड़कंप मचा दिया. चीन के इस कदम के बाद भारत सहित दुनियाभर के उभरते बाजारों की मुद्राओं में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई. लेकिन कई पैमाने हैं, जहां हमारा रुपया दो साल की सबसे बड़ी गिरावट के बावजूद ताकतवर बना हुआ है. जानिए ऐसा क्यों…

1. काबू में है महंगाई
खुदरा महंगाई के जुलाई आंकडे देश में लगातार कम हो रही महंगाई को साफ दिखा रहे हैं. वहीं कुछ खाद्य सामग्रियों में भले तेजी जारी है लेकिन वह इसलिए जायज है क्योंकि पिछले साल भी इन सामग्रियों में इस दौरान तेजी देखने को मिल रही थी. लिहाजा एक बात साफ है कि रिजर्व बैंक जनवरी 2016 के अपने महंगाई काबू करने के टार्गेट को पूरा करने जा रहा है. मुद्रा में गिरावट से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है लेकिन रुपये को इसका डर नहीं है क्योंकि ग्लोबल स्तर पर क्रूड की कीमतों से रुपये को राहत जारी है.

2. फॉरेक्स रिजर्व में हुआ है इजाफा
पिछले कुछ समय से रिजर्व बैंक लगातार स्पॉट और फॉर्वर्ड मार्केट में डॉलर की खरीदारी कर रहा है. रिजर्व बैंक यह काम अमेरिका में ब्याज दरों में इजाफा होने की आशंका से कर रहा है, जिससे अमेरिका के फैसले से उबरने के लिए देश तैयार रहे. बीते 4 अगस्त को मौद्रिक समीक्षा में रघुराम राजन ने साफ कहा था कि देश में फॉरेक्स रिजर्व सम्मानित स्तर पर है.

3. भारतीय कंपनियों के पास मौजूद अच्छा डॉलर रिजर्व
रुपये में किसी तरह की बड़ी गिरावट से भारतीय कंपनियों की बैलेंसशीट पर बुरा असर पड़ता है क्योंकि एक झटके में उनकी विदेशी देनदारी बढ़ जाती है. इस खतरे के लिए आईएमएफ भी लगातार चेतावनी देता रहा है. लेकिन हाल में आए आंकड़ों के मुताबिक भारतीय कंपनियों ने भी पिछली कई तिमाही से अपने डॉलर रिजर्व में अच्छा खासा इजाफा किया है. आंकडों के मुताबिक पिछली कुछ तिमाही में भारतीय कंपनियों ने विदेशी देनदारी के लिए डॉलर हेजिंग के स्तर को 15 फीसदी से बढ़ाकर लगभग 41 फीसदी कर लिया है. हालांकि अभी भी कंपनियों के आधे से अधिक विदेशी कर्ज सुरक्षा के इस दायरे से बाहर हैं.

4. विदेशी निवेशकों को भारत में रुकने में फायदा
रुपये में किसी तरह की बड़ी गिरावट सीधे तौर पर विदेशी निवेशकों के प्रॉफिट पर प्रहार करता है. वहीं कोई विदेशी निवेशक यदि देश से बाहर निकलना चाहता है तो रुपये में बड़ी गिरावट के चलते वह बाजार में कुछ और दिन रुकना फायदेमंद मानता है. गौरतलब है कि साल 2014 में बड़ी संख्या में विदेशी निवेश भारत में आया और 2015 में यह सिलसिला जारी है, लिहाजा जब फॉरेक्स मार्केट में रुपया लगभग 2 साल के सपाट स्तर पर है ऐसे में निवेशकों का रुझान भारतीय बाजारों में बने रहने का होना स्वाभाविक है.

India

Impact on India after China's devaluation

China’s central bank announced a 2 per cent devaluation of its currency on Tuesday, following which the renminbi (also called yuan) witnessed its biggest one-day fall in a decade… 313 more words

US DOLLAR/INDIAN RUPEE

China devalued its currency. This opened the door for further depreciation for the Chinese Yuan and also for currency wars between the Asian economies. Over the past two years emerging market currencies have performed poorly against the U.S. 106 more words

EMERGING MARKET CURRENCIES

India's May Merchandise Trade Deficit Remains Manageable, But Headwinds Remain

  • Merchandise trade deficit improves to USD $10.4B in May, better than the USD $11B in April.
  • Imports fell 16.5% YoY, while exports fell 20%.
  • REER over-valuation of INR and slackness in global economy continue to drag down exports.
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Indian Rupee

India's Balance Of Payments At 5.7% Of GDP

  • India recorded a BoP surplus for the sixth consecutive quarter; Jan-Mar 2015 surplus was at US$30 billion.
  • BoP surplus is at 5.7% of nominal GDP, while current account deficit at 0.3% and merchandise trade deficit is at 5.3%.
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India

The death of cash

IF YOU were to ask me as to which is the single most important invention or discovery of all times, I will name two. The first is the Internet. 700 more words

Economics