अजमेर के महान सूफ़ी हज़रत मोईनुद्दीन चिश्ती ने लाहौर के सूफ़ी दाता गंज बख्श साहिब के बारे में कहा था – “गंज बख्श-ए-फ़ैज़-ए-आलम, मज़हर-ए-नूर-ए-ख़ुदा/ नक़ीसान रा पीर-ए-कामिल, कामिलान रा रहनुमा”. 21 more words