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Jain Emblem

The Jain symbol that was agreed upon by all Jain sects in 1974.

In 1974, on the auspicious 2500th anniversary of the nirvana of the last Jain Tirthankara, Mahavira, the Jain community at large collectively chose one image as an emblem to be the main identifying symbol for Jainism. 325 more words

#Jainism

Deepawali

कार्तिक कृष्ण (१५) अमावस्या : वीर निर्वाण कल्याणक महोत्सव (दिवाली महोत्सव)

दीपावली हम सभी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है, इसी दिन हम सभी के इष्ट २४ वे तीर्थंकर भगवान् महावीर को निर्वाण प्राप्त हुआ था |

Jain

Sharad Purnima

धन्य घडी यह “शरद पूर्णिमा”, मिला हमें जिसका वरदान |
संत शिरोमणि और ज्ञान से, पूर्ण हुई ये सदी महान ||

शरद पूर्णिमा – अश्विन शुक्ल १५, वी. नि. सं. २५४०:

आज का दिवस एक ऐसी महान तिथि को है, जो हमें महान पुन्यवान सिद्ध करता है, हमें ही क्योँ सारे भ्रम्हांड को पुण्यवान और अतिशय युक्त बनता है | क्यूंकि आज इस पवन तिथि को इस सदी के महानतम दिगम्बर आचार्य संत शिरोमणि १०८ श्री विद्यासागर जी महाराज और गणिनी आर्यिका १०५ ज्ञानमती माताजी का जन्मोत्सव है | धन्य है हम जो इस सदी मैं मनुष्य हुए और इनकी मधुर वाणी सुन के भाव सागर से पार होने मोक्ष मार्ग पर चल उठे |

आचार्य श्री विदिशा (म. प्र.) में विराजमान हैं |
आर्यिका माता ज्ञानमती जी जम्बुद्वीप, हस्तिनापुर में विराजमान हैं |

आचार्य श्री सा और कोई चिन्तक कभी नही हो सकता,
मूक पशुओं की पुकार को सुनने वाला नही हो सकता,
धन्य है हम जो हमें मिले इस जीवन में आचार्य श्री,
मक्षा मार्ग का आर्य प्रदर्शक इन जैसा कोई नही हो सकता |

जय जय गुरुदेव

ज्ञानमती माता ने जैसा ज्ञान दिया है हम सबको,
कठिन ग्रंथों को सरल रूप में पढ़ा दिया है हम सबको,
बता दिया है इस जग को नारी शक्ति क्या कर सकती
स्वयं सरस्वती बन कर के अभिमान दिया है हम सबको |

written by: श्रेय कुमार जैन

Jain

Paryushan Dos and Don'ts

Paryushan, the 8-day festival for Jains, started today. I’ve blogged about Paryushan before (Micchami Dukkadam; Paryushan; What to Eat for Paryushan Week… 348 more words

Food

23rd Tirthankar Shree Parshwanath Bhagwan

PARSHVANATH BHAGAVAN – 23

Bhagavan Parshvanath was born about 380 years before the Nirvana of Bhagavan or in the 10th century BC.

Past-Incarnation

Like other Tirthankars, important events of earlier incarnations of the being that became Bhagavan Parshvanath are available in Jain scriptures. 2,701 more words

#23rd Tirthankar

Shrut Panchami Mahaparva (Jyeshtha Shukla Panchami)

http://jainteerth.com/ShrutPanchami.asp

The day of completion of first written text (Agama) of Jainism Named – ‘SHATKHANDAGAMA’, two thousands years ago. Authors were great ‘Acharya Pushpadanta’ & ‘Bhootbali’. 1,662 more words

Jain

भगवान महावीर और उनका जीवन-दर्शन

जैनधर्म के इस युग के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ऋषभदेव के पौत्र मारीचि से लेकर अन्तिम तीर्थंकर भगवान महावीर के भव तक की जीवन यात्रा किसी आत्मा के अपने मिथ्या अहंकार एवं अज्ञान जनित विकारी वृत्तियों के फल में संसार परिभ्रमण की तथा उससे मुक्ति की विचित्र ही कथा है। करोड़ों करोड़ों भव विभिन्न योनियों में बिताने के बाद महावीर के अन्तिम भव से पूर्व के दसवें भव में सिंह की योनि में उन्हें चारण ऋद्धिधारी मुनियों से आत्महित प्रेरक उद्बोधन मिला और उस सिंह योनि से भगवान महावीर के आत्मा की विकास यात्रा प्रारम्भ हुई। अन्तिम भव में वैशाली गणतन्त्र के कुण्डग्राम में राजा सिद्धार्थ व महारानी प्रियकारिणी त्रिशला के घर में चैत्र शुक्ला त्रयोदशी के दिन बालक वर्धमान के रूप में उस पवित्र आत्मा ने जन्म लिया। जैसा कि सभी तीर्थंकरों के जीवन में होता है उनके भी गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान व मोक्ष कल्याणक देवों व मानवों के द्वारा अति उत्साह व भक्ति से मनाये गये। हो भी क्यों नहीं?

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