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Fact of the day

Two out of five young Indians surveyed in 2017 by the Center for the Study of Developing Societies, in partnership with the Konrad Adenauer Stitfung (KAS),  17 more words

The Fruit of the Spirit (KAFA: Bible NT)

KAFA: Bible NT

Galatians (Galaatee) 5:22-23

22 Tunaballi Yaafa Ayaanee aafo, shuno, emiroo, diggoo, haa’iyoo, ariqqo, de’ittino, Yeerichi toommooch mullee too’iyoo,

23 shiimacho tuno, bi qellee ariyoo, eboshine. Eboshiyoomina’on bajemmi calloo aalloone.

Bible

KUSOM Annual Festival 2017

The hype for KAF 2017 has started, and is just going to keep building up until the main events from Dec 20 to Dec 23. KUSOM Annual Festival (KAF) is a 3 day yearly event organized by KUSOM, but, this year it has become a 4 day event. 441 more words

KUSOM

Statement by the Kurdish-Speaking Anarchist Forum (KAF)

Statement by the Kurdish-Speaking Anarchist Forum (KAF): No to State, No to war. Yes for self-administration and the Social revolution. 1,227 more words

आयुर्वेद, शारीरिक संरचनाये और उनके प्रभाव

आइये आज यह जानने की कोशिश की जाए की आयुर्वेद की शुरुआत कैसे, कब और कहाँ से हुई? आयुर्वेद कैसे विभिन्न शारीरिक संरचनाओं के अनुसार कार्य करता है?

आयुर्वद का ज्ञान पहले भारत के ऋषि मुनियों के वंशो से मौखिक रूप से आगे बढ़ता गया उसके बाद उसे पांच हजार वर्ष पूर्व एकग्रित करके उसका लेखन किया गया। आयुर्वेद पर सबसे पुराने ग्रन्थ चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और अष्टांग हृदय हैं। यह ग्रंथ अंतरिक्ष में पाये जाने वाले पाँच तत्व-पृथ्वी, जल वायु, अग्नि और आकाश, जो हमारे व्यतिगत तंत्र पर प्रभाव डालते हैं उसके बारे में बताते हैं। यह स्वस्थ और आनंदमय जीवन के लिए इन पाँच तत्वों को संतुलित रखने के महत्व को समझते हैं।आयुर्वेद के अनुसार हर व्यक्ति दूसरों के तुलना मे कुछ तत्वों से अधिक प्रभावित होता है। यह उनकी प्रकृति या प्राकृतिक संरचना के कारण होता है| आयुर्वेद विभिन्न शारीरिक संरचनाओं को तीन विभिन्न दोष मे सुनिश्चित करता है।

  1. वात दोष: जिसमे वायु और आकाश तत्व प्रबल होते हैं।
  2. पित्त दोष: जिसमे अग्नि दोष प्रबल होता है।
  3. कफ दोष: जिसमे पृथ्वी और जल तत्व प्रबल होते हैं।

दोष सिर्फ किसी के शरीर के स्वरुप पर ही प्रभाव नहीं डालता परन्तु वह शारीरिक प्रवृतियाँ (जैसे भोजन का चुनाव और पाचन) और किसी के मन का स्वभाव और उसकी भावनाओं पर भी प्रभाव डालता है। उदाहरण के लिए जिन लोगो मे पृथ्वी तत्व और कफ दोष होने से उनका शरीर मजबूत और हट्टा कट्टा होता है। उनमे धीरे धीरे से पाचन होने की प्रवृति,गहन स्मरण शक्ति और भावनात्मक स्थिरता होती है। अधिकांश लोगो मे प्रकृति दो दोषों के मिश्रण से बनी हुई होती है। उदाहरण के लिए जिन लोगो मे पित्त कफ प्रकृति होती है, उनमे पित्त दोष और कफ दोष दोनों की ही प्रवृतिया होती है परन्तु पित्त दोष प्रबल होता है। हमारे प्राकृतिक संरचना के गुण की समझ होने से हम अपना संतुलन रखने हेतु सब उपाय अच्छे से कर सकते है।आयुर्वेद किसी के पथ्य या जीवन शैली (भोजन की आदते और दैनिक जीवनचर्या) पर विशेष महत्त्व देता है मौसम मे बदलाव के आधार पर जीवनशैली को कैसे अनुकूल बनाया जाये इस पर भी आयुर्वेद मार्गदर्शन देता है।

तथ्य

complete guide to a patient

It is no surprise to see on the market today so many digestive and dietary aids for the stomach, along with pills for gas and indigestion. 1,079 more words

Two years blogging!

This was a perfect day for baking.  The weather was downright chilly after a week of sweltering heat. I had printed this recipe earlier in the month and this was the day to use it. 591 more words

Baking