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तो बस यूँ हीं।

हमारी फ़्रेंडलिस्ट में आपको देश के ऑलमोस्ट हर कोने के रिप्रेजेंटेटिव मिल जाएँगे। फिर चाहे वो लेह हो या फिर सिक्किम। साउथ के भी हैं, और कश्मीरी भी है। नेपाली भी हैं तीन ठो! पर सबसे ज़्यादा उत्पात हमारे जीवन में  जो कहिये, इन यूपी वालों ने मचा रखा है। इतने तो बिहारी भी  हैपनिंग नही हैं हमारे जीवन में, जितने ये हैं। ऊपर से ये दिल्ली वाले तो हाय! क्या ही ख़ूब हैं।

कोई ख़ास मतलब नही है इस स्टेटस का पर क्या करें। हम भोलेनाथ के भक्त हैं और इंडिया इस अ डाइवर्स कंट्री, जहाँ सबकी रिस्पेक्ट होती है।ठीक वैसे ही जैसे मोर आजीवन “वहमचारी” बनकर रहते हैं। हमें लगता है हम थोड़े लेट हो गए हैं और ये जोक पुराना हो गया है। वो दरअसल हुआ यूँ कि हम कुछ पुराणों का अध्यन कर रहे थे।

कौनसे पुराण? अरे भाई आपको नाम तो नही बता सकते। गर्ल कोड ब्रो! पर हाँ ये ज़रूर कह सकते हैं कि उसमें क्या कहा गया है। सबसे पहले पन्ने पर हमें शपथ दिलाई गई कि हम जो पढ़ेंगे, उसकी चुगली-चपाटी लड़कियों के अलावा किसी से नही करेंगे। पर हमने बचपन से ही इतनी विद्या कसम तोड़ी है कि नतीजा ग्यारवीं के रिजल्ट से दिख गया हमको। तो बस लॉल। हाँ जी बहनजी, आगे बढ़ते हैं, पहला अध्याय कहता है कि ‘हे गई दाय, (ओ बहन) वचन लो कि आजीवन वचनों से बँधी रहोगी। ख़ुद भले ही टूट जाओ, पर इन वचनों को मत तोड़ना।

दूसरा अध्याय हमें सईंयम का पाठ पढ़ाता है और कहता है, ‘गई बेटी, (हे पुत्री) वचन लो कि चाहे लोग तुम्हें मार दें, या गाड़ दें, तुम गलती से भी आवाज़ मत उठाना। जब तुम पैदा हुई थी और रोई थी, तब तुम्हारी वो रुदन ध्वनि हमें बर्दाश्त नही हुई थी। और हम तुम्हें कभी आँसुओं में नहीं देख सकते तो तुम बस खून के घूट पी लेना, (क्वाईट लिटरली!) पर हमारे सामने रोना मत।

तीसरा चैप्टर बहुत लंबा था तो हमने छोड़ दिया, हाऊ बोरिंग! पर बेसिकली हमें ये बताया गया है कि हम कैसे  समाज के, हालात के, वक़्त के, सौदागरों के, वहशियों के, और ख़ुदके कैदी बनकर इस लंबी जिंदगी को भी काट सकते हैं, बिना  हाँथ के नसों को पाँच मर्तबा काटे। सो स्वीट। काफ़ी सोच-समझ के लिखा गया था ये, है कि नहीं?

देखिये हमारा बोर्डस है इस साल, तो हम टाईम अपना यूँ आप जैसे समझदार लोगों पर खर्च नही करेंगे। आप सब संस्कारी हैं, सही मायनों में अजुकेटेड हैं। फ्रीली सेक्स की बातें करते हैं कॉज़ व्हाई नॉट, भाई हम मॉडर्न हैं, रिप्रोडक्टिव हेल्थ, हम्म हम्म, कॉपर टी, सेफ सेक्स, जैसे मुद्दों को उठाते हैं, स्टिग्मा तोड़ते हैं।  दबी आवाज़ों में अपनी आवाज़ मिला एक ऐसा शोर मचाते हैं जो चीन के दीवार को भी भेद दे पर शायद हमारे माई-बाप तक न पहुँचे।

अच्छा? आप ऐसा नही करते? तो ठीक है, कम से कम आप अपने काम से मतलब रखकर किसी अफवाह फैलाने में सबसे आगे तो नहीं दौड़ते ना, कम से कम अपनी जिंदगी संभालते वक़्त कंधा तो देते ही होंगे उन्हें जिन्हें ज़रूरत हो। आप आगे बढ़ते वक्त पिछड़ों को साथ लेकर चलते होंगे। या शायद खाली हाथ आएँ हैं हैम, झाली हाँथ जाएँगे बालू सोच है आपकी और आप बस ख़ुदसे मतलब रखते हैं। वो भी नही?

तब तो आप ज़रूर शूटर ही होंगे मेरी जान। ये बैठे स्क्रीन के पीछे और दे दनादन फेंके शब्दों के बाण सरकार पर, मर्द जात पर, औरतों पर, यूथ पर, अपने पड़ोसी पर, उसकी बीवी पर या पति पर, या अपने घर के अन्नदाता पर, विधाता पर। कभी तो आप हाथ में कटारी लेकर अपने पेट पे लगा देते होंगे और चिल्लाते होंगे कि हाय रे आपकी किस्मत जो आप कुछ नही करते, आप समाज में रहने के लायक नही हैं। पर आप फिर भी कुछ नही करेंगे, दुनिया से अटेंशन मिल गयी  एक दफ़ा,तो आप कटारी वापस ड्रावर में रख देते हैं संभाल के। और वापस बैठ जाएँगे स्क्रीन के पीछे, स्मोकिंग किल्स वाली पोस्ट को शेयर करेंगे और छोड़ेंगे एक कश हवा में, ‘फू’। खैर कोई नही।

देखिये सेक्स से याद आया (शेम-शेम पप्पी शेम), क्या ही कुलक्षण वाली बात कह दी मैंने, माताओं के हाथ से चाय का कप गिर गया होगा “ओह माय माता!”, पापा लोग अपनी भौंह चढ़ा चुके होंगे, भाई लोग सकते में आ गए होंगे, छोटे बच्चे मुँह पर हाँथ रख कर हिहि-ठिठि करने लगे होंगे दबी आवाज़ में। वाह रे रिएक्शन! खैर, तो हाँ, सेक्स से याद आया कि फीमेल कॉन्डम का इस्तेमाल क्या मोरनी भी करती होगी? मतलब आँखों में लगा लेती हो शायद जस्ट किडिंग! जाओ गूगल करो। अब क्या हमही बताएँ की क्या पूछोगे गूगली बहन से?

Short Story: माँ, शादी उलझन है (भाग 1)

आधी रात हो चली है। प्रतीक्षा अपने कमरे में बैठी है। दुल्हन की वेशभूषा में, सिर से पैर तक आभूषणों में सज्जित, वो दीवार की ओर देखती है। चेहरे पर कोई भाव दृश्य नहीं है, मानो मेकअप ने उन्हें नजरों से छिपा दिया हो। वह बस बैठी हुई दीवार को ताकती है। उसकी सखी उसके साथ है, परन्तु वह बालकनी में खड़ी है। दूर में बारात दिखती है, वो उसके बारे में बोल रही है।

प्रतीक्षा के आसपास इतना कुछ घटित हो रहा है, फिर भी वह इन सब से बेखबर लगती है। चुपचाप बैठी बस दीवार की और देखती है।

*****

सुबह के आठ बज रहे है। प्रतीक्षा घर के बाहर स्कूल बस के इंतजार में खड़ी है। उसकी सहेली पूजा अभी तक ना आई थी।

प्रतीक्षा सत्रह वर्ष की है। वह कदकाठी में कम, परन्त आवाज में बुलंद थी। बचपन ख़त्म होने तक उसे बाल छोटे रखने का शौक था। माँ ने कई बार बाल बड़े करनें को लेकर टोका था। छोटे बाल लड़कियों पर अच्छे नहीं लगते, माँ ने कहा था। पर उसने माँ की बाकी बातों की तरह ये बात भी टाल दी थी। पर जब से पूजा न अपने बड़े बालों में चोटी करनी शुरू कर दी थी, तब से उसने बाल बढ़ाने की ठान ली थी। अब वो रोजाना माँ से बालों में तेल की चम्पी कराती और चोटी करने को कहती। शुरू के एक-दो दिन माँ को ये अजीब लगा। लड़की बात कभी ना सुनती और अब अचानक बालो में तेल और चोटी, सोचकर माँ भी हैरान थी। सब सही था, परंतु उसके बाल छोटे थे। चोटी घनी ना बन पाती थी। इसके ऊपर उसकी छोटी बहन उसे ‘चोटी चुहिया’ कहकर चिढ़ाती थी। माँ-बाप सामने होते तो प्रतीक्षा स्वयं को रोक लेती थी, पर अकेले में पाकर वो भी उसको एक-दो थप्पड़ रसीद कर देती थी। फिर जब सुप्रिया कहती कि वो थप्पड़ की बात माँ को बताएगी, तो प्रतीक्षा उसे चुप रहने के प्रलोभन भी देती थी।

प्रतीक्षा घर के बाहर खड़ी है। घर के सामने रखे बड़े गमलों में फूल खिले है। सवेरे मोगरा के सफ़ेद फूल अच्छे लग रहे थे। वो उनकी ही तरफ देख रही थी, कि अचानक उसे कन्धे पर हाथ रखे जाने का आभास हुआ। शरीर में एक पल के लिए स्तब्धता उठती है, परंतु ज्यों ही वो मुड़ती है, पूजा को पाती है। पूजा आ गयी थी, पर हांफ रही थी।

“आज फिर तुझसे उठा ना गया क्या?”, सुबह की वार्ता प्रतीक्षा शुरू कर देती है।

“उठ गयी थी। पर फिर वो हिस्ट्री का असाइनमेंट भी तो पूरा करना था।”, पूजा बोलती है।

“आलसी कही की। एक हफ्ते पहले दिया था असाइनमेंट, तू अब तक पूरा ना कर पायी क्या?”

“अब तेरे जैसी पढनतरु तो हूँ नहीं मैं। बस आज सुबह किया पूरा।”

“ना पता तेरा आलसपन कब हिस्ट्री बनेगा। मैं तो…”

इससे पहले की प्रतीक्षा बात पूरी कर पाती, नजदीक आती बस के हॉर्न ने उस पर पूर्ण विराम लगा दिया था।

Hindi

Kahaani (2012)

“Kahaani” means story and what a story this is. The following review was written in probably 2013 and till date I have seen this perhaps 5 times and each time it still wields the same power without diminishing in authority. 794 more words

Drama

दो लक्कड़हारे - एक नई कहानी

एक लक्कड़हारा था जो बहुत महेनती था वह हर रोज़ लकड़िया काट कर अपने सेठ को देता। सेठ उसे हर महिने २००० रुपये देता। वो अपने सेठ के साथ पिछले पाँच साल से काम कर रहा था, परंतु सेठ ने कभी उसका पगार नही बढ़ाया। उसने भी कभी नही कहा।

Management Fundaas

Zindagi - Ek Kahaani!

लफ्ज़ दर लफ्ज़ एक कहानी लिखती जाती है,
ज़िन्दगी के सफहों को वक़्त की स्याही रंगती जाती है!

हाथों की लकीरों से किस्मत पेंच लड़ाती है,

Guys, there's a friendly ghost ready to talk to you

We have seen many innovative ways of promoting films in the past. Aamir Khan became a barber for Ghazini, he traveled across the country in disguise for… 250 more words

Films

Kahaani 2 Full Movie | Watch Online | Download

Kahaani 2 is a 2016 Indian thriller film directed by Sujoy Ghosh and produced by Ghosh and Jayantilal Gada. A sequel to the 2012 film Kahaani, the film features Vidya Balan, Arjun Rampal in lead roles and Jugal Hansraj and Kharaj Mukherjee in supporting roles. 183 more words

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