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Leh

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Day-2

From the Balcony of the Tiny Fort

His Gun… 259 more words

Camera

Leh - Land of Endless Hills

You may have been to hilly places but the beauty that surrounds Leh is so mesmerizing that it can not be related to any second place. 449 more words

India

लद्दाख में चीनी घुसपैठ की कोशिश, पत्थरबाजी, चीन का इंकार

चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उसके सैनिकों ने लद्दाख में पेंगॉन्ग लेक के पास दो इलाकों में घुसपैठ की कोशिश की। इसे भारतीय फौज ने नाकाम कर दिया। भारत की कार्रवाई के बाद चीनी सैनिकों ने पथराव किया। इसके चलते जवानों को चोटें आईं। चीन के भी कुछ सैनिकों के घायल होने की खबर है।
दूसरी ओर घुसपैठ की इस घटना पर चीन ने कहा कि उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि लद्दाख में दोनों देशों के सैनिकों के बीच कोई झड़प हुई। बता दें कि 16 जून से सिक्किम के डोकलाम में भारत-चीन के बीच विवाद चल रहा है। भारत कह चुका है कि बातचीत तभी होगी, जब चीन की सेनाएं वापस जाएं। उधर, चीन ने कहा है कि भारत उसकी सीमा में जबर्दस्ती दाखिल हुआ है। लिहाजा उसकी सेना को पीछे जाना चाहिए।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 15 अगस्त को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने भारत के दो इलाकों फिंगर फोर और फिंगर फाइव में सुबह 6 बजे से 9 बजे के बीच घुसपैठ की कोशिश की। लेकिन दोनों ही बार भारतीय जवानों ने इसे नाकाम कर दिया।
भारतीय फौज के रास्ता रोक देने के बाद चीन के सैनिकों ने ह्यूमन चेन बनाई और पथराव किया। भारतीय जवानों ने भी इसका जवाब दिया। इससे दोनों तरफ के जवानों को चोटें आईं। ड्रिल के बाद दोनों देशों की फौजें अपनी-अपनी पोजिशन पर लौट गईं।

चीन ने किया इंकार

घुसपैठ के चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन हु चुनयिंग ने कहा कि लद्दाख में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई किसी झड़प की जानकारी नहीं है। हम बॉर्डर पर शांति चाहते हैं। हमारी सेना अपने हिस्से में पेट्रोलिंग करते हैं। हमारी मांग है कि भारत एलएसी पार करने से बचे और इस बारे जो समझौते हैं, उनका दोनों देश सम्मान करें।

भारत ने किया था हिस्से पर दावा

1990 के दशक के दौरान भारत ने इलाके में अपना दावा किया था। इसके बाद चीनी आर्मी ने यहां एक सड़क बना ली थी और इसे अक्साई चिन का हिस्सा बताया था। चीन फिंगर फोर तक भी रोड बना चुका है जो लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से महज 5 किमी दूर है।
पेंगॉन्ग लेक के उत्तरी और दक्षिणी तट पर चीन लगातार पैट्रोलिंग करता रहा है। लेक भारतीय सीमा से 45 किमी तो चीन सीमा से 90 किमी दूर है।

चीन बॉर्डर पर सैनिकों की तैनाती बढ़ी
भारत ने चीन से सटे सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के 1400 किलोमीटर लंबे साइनो-इंडिया बॉर्डर पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। भारत का कहना है कि चीन हमारे इलाके में घुसपैठ कर रहा है। वहां भारत के 350 सैनिक जमे हुए हैं।

News

Bike Trip to Nubra Valley

I have been lucky to get a chance to travel to Leh many times and being an explorer I have always been visiting new places. While I visited Manali earlier, I used to be curious to know how would things look after crossing Rohtang and this curiosity led to visiting Leh by crossing Rohtang. 936 more words

Life

Pehli Iftari aur Chasme ka Paani (पेहली इफ्तारी और चश्मे का पानी)

30 जून 2016 की वो शाम, हलकी सी ठण्ड और कारगिल के एक होटल का वो बरामदा.

तोशिब : आ गए आप कारगिल देखकर,कैसा लगा आपको हमारा कारगिल, यकीन हुआ आपको की पाकिस्तान भी दिखता है यहाँ से.

मैं : मज़ा आया कुछ नए लोगो से भी मिली, नमकीन चाय भी पि. अच्छा खाना  कहा अच्छा मिल जायेगा यहाँ

तोशिब: मैडम इफ्तारी खायी है आपने कभी

मैं :नहीं आज तक तो नहीं खायी

तोशिब: अच्छा खाना पसंद करेंगी आप, घर से शाम में आने ही वाली है आपके लिए भी मंगवा देते है

मैं :हां चलेगा

तोशिब: तो आप फ्रेश हो जाइये जैसे ही इफ्तारी आती है मैं आपको बुलाने आ जाऊंगा

पेहचान  इनसे तब तक बस इतनी थी की कुछ दो घंटे पेहले इनके होटल में रूम बुक किया था. रूम बुक करने में मदद मिली थी २ राइडर्स की, जो बस राह चलते युही मिल गए थे. मुझे कुछ समझ नहीं रहा था की कारगिल में कहा ठहरा जाये तो इन दोनों राइडर्स की मदद ले ली थी. होटल के सामने ही था तोशिब का जनरल स्टोर्स. होटल और जनरल स्टोर्स दोनों ही सँभालने की जिम्मेदारी तोशिब  पर. २ घंटे की पहचान में बात हमने की थी बस १५ min, तोशिब ने मेरी मदद की थी मेरे वेगो पर बंधे सामान को निकालकर रूम तक पोहोचाने में और फिर कारगिल में क्या देखा जा सकता है ये बताने में. जब कारगिल देखकर वापस लौटी तो पता नहीं था अपनी पहली इफ्तारी खाने का मौका मिलेगा

रूम पर जैसी ही पोहोची थकान की वजह से नींद आ गयी. दो तीन बार दरवाज़ा खट खटाने की आवाज़ आयी पर नींद से उठकर दरवाज़ा खोलने की इच्छा ना हुयी. और आख़िरकार उठकर जब घडी देखि तो ८ बज चुके थे. उठकर फ्रेश होती की फिर से दरवाज़ा खट खटाने की आवाज़. तोशिब  खाना खाने बुलाने आया था. १० min बाद जब निचे दुकान पर पोहोची तो पता चला मेरे इंतज़ार में तोशिब ने रोज़ा नहीं तोडा है. आप मेहमान है आपके पेहले मैं कैसे खा लेता. दुकान पर तोशिब के अलावा और एक उनके पहचान वाले जिनका टूर्स एंड ट्रेवल्स का बिज़नस था वो भी मौजूद थे. हमारी बात चित शुरू हो उसके पेहले तोशिब  ने जमीन पर ही मेरे बैठने के लिए एक चटाई बिछाई, थैले में से सब्ज़ी मेरे सामने रखी और फिर वही थैला मेरे सामने रखकर उस पर रोटी रख दी.

इफ्तारी

और फिर शुरू हुआ बातो का सिलसिला. दुकान पर मौजूद मेहमान मुझे लेह में रुकने के लिए अलग अलग होटल बता रहे थे. तोशिब के हाव भाव से मुझे समझ आ रहा था की मैंने उनकी बातो में ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. और बिच में ही होटल के टोपीक को रोककर तोशिब ने पूछा मैडम आपने कभी चश्मे का पानी पिया है, बोहोत ही मीठा पानी होता है और मिनरल वाटर से भी अच्छा. मुझे ये समझ नहीं आ रहा था की आखिर चश्मे का पानी होता क्या है. और तोशिब उसका हिंदी शब्द ढूंढ नहीं पा रहा था.  तभी हमारे 3 की मेहफिल में आये एक और शक्श रात के 8 बजे के अँधेरे और सनाटे को चीरते हुए. नाम तो उनका  याद नहीं पर ये थे तोशिब के  बचपन के दोस्त. इन्होंने अपनी SBI PO की नौकरी छोड़ स्कूल में टीचर बन ना पसंद किया. कह रहे थे नहीं होता मैडम इतना काम हमसे जाने का समय तो था आने का नहीं, लाइफ भी तो कोई चीज़ है. वो नौकरी ही किस काम की जिसके चलते सुकून से शाम को दोस्तों के साथ वक़्त ही न बिताने मिले,छोड़ दी मैंने नौकरी. काश मेरे लिए भी इतना ही आसान होता नौकरी छोड़ पाना.

और इन शख्स ने बताया मुझे चश्मे का पानी मतलब झरने का पानी. उस पानी से मीठा और स्वाद वाला पानी मैंने आज तक नहीं पिया है,प्राकृतिक ठंडा पानी. बातो का काफिला फिर थोड़ा और आगे बढ़ा. मैडम मेरे दोस्त का भी पास ही में होटल है, रात को वाहा कैंपिंग भी होती है. मैडम अभी धुप है तो हम सब्ज़िया सुखाकर रख देते है ताकि ठण्ड में खा सके. वरना तो बस दाल उबालकर खाओ ऐसा लगता है पेट में पूरी दाल दाल ही हो गयी है. रास्ते सभी बंद हो जाते है बर्फ की वजह से तो कुछ मिलना भी मुश्किल. बड़ी मुश्किल से निकलती है ठण्ड,कुछ काम भी नहीं मिलता.

कारगिल के उस जनरल स्टोर में जमीन पर चटाई पर बैठी हुई मैं अकेली इन दोनों लड़को की बाते सुन रही थी. रास्ते पर लड़की तो दूर की बात है पर कोई इंसान भी उस समय मौजूद नहीं था. बस कुछ कुत्तो के भौकने की आवाज़.फिर भी जितना महफूज मैं अपने घर पर बैठकर खुदको मेहसूस करती उतना ही महफूज मुझे वाहा लग रहा था. घर से दूर भी कुछ घर जैसा लग रहा था. ना तो कोई डर था ना ही कोई हिचक और ना शंका. होना भी शायद लाजमी ना था क्योंकि फॉर्मेलिटी कम और अपनापन ज्यादा था,एक रिस्पेक्ट थी. रिस्पेक्ट अपने काम के लिए,अपने मेहमान के लिए,अपनी संस्कृति के लिए. वो काफी था मुझे विश्वास दिलाने के लिए. कारगिल के उस शहर की वो दिखने में तो साधारण दावत पर मुझसे पूछा जाये तो ऐसी दावत के लिए किसी 5 सितारा होटल की दावत छोड़ने का मलाल न होगा. वाहा होता है एक दिखावा सजावट का काटे छुरी का टेबल चेयर का क्रोकेरी  का अंग्रेजी का किसको प्रभावित करने का यहाँ था बस अपनापन.ना कोई ढोंग ना कोई दिखावा बस सादगी और सरल  निश्छल  मन. अगर ये खूबसूरती साथ हो तो किसी और श्रृंगार की क्या कीमत.

बाते कुछ और भी होती पर दूसरे दिन जल्दी निकलना था इसलिए बातो का सिलिसिला वही ख़तम करना पड़ा . दूसरे दिन तोशिब ने सामान गाडी पर बाँधने में मेरी मदद की और दुआ के साथ “इंशाल्लाह आप जरूर कामयाब होंगे” अलविदा किया. वो इफ्तारी और चश्मे का पानी थी मेरी ईदी जो ईद के पेहले ही नसीब हो गयी थी.लौटूंगी शायद फिर कभी कारगिल, परिंदो की तरह.

Laddakh Trails

With one sprained ankle reaching Leh was no easy task for me. Within 2 hrs of my journey from my hometown Dehradoon, I got sprain in my right ankle and as soon as I reached Manali. 1,139 more words

Travelling

Ladakh Diaries - 2016

A trip of a lifetime happens when 4 crazy travelers + 2 musketeers (2.5 and 3.5 year old) resolve to accomplish it no matter what. Planning for THE LADAKH trip started with reading t’logs, itinerary from various forums like BCMtouring, DoW etc. 109 more words