Tags » Ladki

Bhabhi ki bahan

babhi की बहन में अपना भी kuch हक़ होता है यही सोच के में भैया की बाraat में भाभी के ghar गया वाहा भाई की शादी होने लगी aur में भाई की शालियो के साथ मस्ती majaक करने लगा, सभी मेरे साथ मिल जुल गए उनमे भाभी की जो सबसे छोटी बहन थी उसका नाम रश्मी था उसकी हाइट कम थी aur उसका gaand बहार की aur निकला hua था मुझे वो अच्छी लग रही थी उसका बटला भी काफी बड़ा था में उसको लाइन मारने लगा वो भी मेरे से सटने लगी में समझ गया की या तो seट हो जाएगी humारे यहाँ शादी raat भर होती है भाभी की छोटी बहन मेरे पास आई aur बोली चलो खाना खा लो मैने कहा नहीं मुझे भूख नहीं है में उससे baat करने लगा मैने उससे पुचा तुम koन से क्लास में हो उसने कहा में 10वी में हु हमलोग थोड़ी देर baat करने लगे तभी भाई की बाकि saalिया भी वह आ गई में सबसे baat करने लगा पर मेरी नजर रश्मी पे ही थी में kissी न kissी बहाने रश्मी से baat करने लगता था aur उधर भाई की शादी हो रही थी मैने रश्मी से कहा चलो शादी देखते है aur hum लोग शादी के पास चले गए aur शादी देखने लगे रश्मी मेरे सामने ही खड़ी थी aur थोड़ी थोड़ी देर में मेरी aur देखती रहती थी में भी usे घूरता रहता था फिर मैने सोचा की यही सही मोका है सब लोग शादी में व्यस्त है मैने रश्मी को इशारा किया वो साइड में आ गई मैने कहा मुझे तुमसे kuch baat करनी है मैने उससे पूछा की तुम्हारे ghar में कहा पर koi आता जाता नहीं है तो रश्मी ने बताया की छत में koi नहीं जाता मैने रश्मी से कहा चलो छत में जाते है aur hum दोनों छत में चले गए छत में पहुचने के बाद रश्मी ने कहा कहो क्या baat है मैने कहा रश्मी तुम बुरा तो नहीं मानो गी न तो रश्मी ने कहा नहीं मानूंगी ab बोलो भी मैने रश्मी से कहा तुम मुझे अच्छी लगती हो आई लव यू तो उसने कहा में तो अभी तुम्हे अच्छे से जानती भी नहीं हु में अभी kuch भी नहीं बोल सकती मैने जबरदस्ती रश्मी को अपने बाहों में लिया aur usे kiss करने लगा वो हिलती दुलती रही फिर मैने मन में सोचा की ab इसे पकड़ लिया है तो इसे जोश दिलाना जरुरी है नही तो ये मेरे को फसा देगी इस कारन में usे जोश दिलाने के लिए कपडे के उपर से ही उसकी Choot में ऊँगली करने लगा थोड़ी देर बाद रश्मी भी जोश में आ गई में रश्मी का बटला दबाने लगा aur कहा रश्मी बस aek बार मेर साथ seक्स kar लो तुमको अच्छा नहीं लगा तो कभी मत करना वो मान गई उसने कहा चलो में aek जगह जानती हु छत में ही aek रूम था hum दोनों वह गए aur मैने रश्मी को नंगा किया aur उसके बटले को चूसने लगा aur उसकी Choot में ऊँगली करने लगा मैने रश्मी से पुचा तुमने कभी लंड देखा है तो रश्मी ने कहा नहीं देखा है मैने अपना लंड बहार निकला aur रश्मी के हात में रख दिया रश्मी मेरे लंड को हिलाने लगी तभी रश्मी ने कहा अच्छा इसको लंड बोलते है मैने कहा हा तो रश्मी ने कहा मैने अपनी सहैली के ghar बी ऍफ़ देखि थी उसमे इसको aek लड़की चूस रही थी मैने कहा तुम भी चुसो मजा आएगा aur रश्मी मेरा लंड चूसने लगी फिर मैने रश्मी की Choot में अपने jeebh को फेरने लगा उसकी Choot bahut ही मस्त थी थोड़ी देर तक मैने रश्मी की Choot चाटी फिर मैने रश्मी को leटाया aur उसकी Choot में अपना लंड धीरे धीरे डालने लगा aaj तक मैने इतनी मस्त Choot कभी नहीं चोदा था में रश्मी को चोदता रहा aur रश्मी आआआ आआआह्ह आआह्ह्ह्ह करती रही karीब आधे घंटे तक मैने रश्मी को चोदा फिर मैने रश्मी के Choot के बहार की अपना मुठ गिरा दिया aur hum दोनों अपने कपडे पहन के शादी में चले गए ……..

Hindi Sex Stories

सेक्सी चुटकले

हाथी चूहे से – साले तुने मेरी बीवी की चूत का भोसड़ा क्यों बना दिया …………
चूहा – २० दिनों से पीछे पड़ी थी लंड से कुछ नहीं हुआ दांतों से कमाल कर दिया ……………..

Lesbian

A poem for Indian Baby Shower...

Gaa Raha Hai Dil Mera ek nai si Sargam…

Sun Raha hu mein abhi se uske aane ki cham cham…

Sapne jho dekhe in aankhon ne, ab sach hone ja rahe hain.. 165 more words

Baby Shower

Ek pagli ladki

Main her baar kehta hun or wo dur chali jati hai.
Ek pagli ladki.

Mere dil ke taro ko cher chali jati hai.
Milti hai to fir ada se muskurati hai. 40 more words

Hindi Sayari

Case Solution for Ecovative Design LLC: A Biological Materials Startup

Complete Case details are given below :

Case Name :      Ecovative Design LLC: A Biological Materials Startup

Authors :           Chris Laszlo, Abdel Latif Ladki, Abraham Weiner… 230 more words

Case

बाला

Source: http://www.ips.org/mdg3/wp-content/library/6755732215_c9b0161d49.jpg)

कैसे बनेगा ये भारत

फिर से सोनेकी चिड़िया।

जहाँ खिलखिला के

जीती थी हर माँ की गुड़िया।

खनकती जब बाला

के हाथों में चुड़िया।

लाज का घूँघट कर

शर्मा जाती थीं

उस ज़माने की कुड़िया।

आज क्यों वहीं चूड़ी की

खनक लोगों के कानों

में खलती हैं।

एक बेकसूर क्यों जीते जी

नफरत की आग में जलती हैं।

क्या इसलिए ?

क्यूंकि वो एक बाला हैं।

जिसका क्या हाल तुमने

कर डाला हैं।

पढ़ना चाहें तो पढ़ नहीं सकती

बढ़ना चाहे तो तुम्हारी छाओ

में रुक नहीं सकती।

आखिर क्यों बरती है इतनी सख्ती?

की चाह कर भी वो बाला

कुछ कर नहीं सकती.

Prerna Mehrotra

14/11/2014

Poem