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Lal Bahadur's Ramnagar

I had to come back to Ramnagar on the last day to take a boat ride and see the fort from a different viewpoint… Unfortunately it was hazy and not very well illuminated… which would have been the case perhaps in the evening. 283 more words

Travel

लाला लाजपत राय के 151वें जन्मदिन पर

कौशल किशोर | Follow @HolyGanga

आज भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के अमर शहीद लाला लाजपत राय के जन्म को 151 साल पूरे हो रहे हैं। अंग्रेजी तारीख के अनुसार इसी दिन उनका जन्म ढुडीके नामक गांव में हुआ था। बीते कई दशकों से पंजाब के इस छोटे से गांव का मौसम इस अवसर पर एकदम बदल जाता है। यहां इन दिनों अच्छी चहल-पहल रहती है। आठ-दस दिनों तक मेला लगा रहता, जिसमें सभी भेद-भाव भूल कर लाखों लोग शामिल होते हैं। यहां बड़ी संख्या में लोगों के भाग लेने का सिलसिला पिछले पचास सालों में उत्तरोत्तर बढ़ा है। कभी इसे मजबूती प्रदान करने का निर्णय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादूर शास्त्री ने लिया था। लालाजी को प्यार करने वाले पंजाबी समाज में ही सीमित नहीं हैं। देश के दूसरे हिस्सों में आज भी ऐसे अनेक संगठन सक्रिय हैं, जिन्हें आजादी के आन्दोलन में उनके बलिदान का महत्व बखूबी पता है। लालाजी की कर्मभूमि लाहौर थी, जो विभाजन के कारण पाकिस्तान का हिस्सा है। वहां भी लालाजी को याद करने वाले कम नहीं हैं।  17 more words

Kaushal Kishore

वीर-बलिदानी लालाजी

लाल-बाल-पाल के लाल-लाजपत राय का स्मरण कर रहे कौशल किशोर

आज से ठीक 87 साल पहले इसी दिन (30 अक्टूबर) को लाहौर में साइमन कमीशन का विरोध करने निकले लाला लाजपत राय के सीने पर लाठियां भांजी गई थीं। तब देश में अंग्रेजों का राज था। 1928 में साइमन कमीशन के विरुद्ध उनका ऐतिहासिक प्रदर्शन उनकी बहादुरी की सच्ची मिसाल है। उनके लिए 63 वर्ष की अवस्था में स्कॉट और सांडर्स का हमला प्राणघातक साबित हुआ। आखिरकार 17 नवंबर को लालाजी ने देह त्याग दी। इस बीच उन्होंने भी ठीक 18 दिनों का एक महाभारत ही लड़ा है। उनके निधन को एनी बेसेंट ने एक महानायक की शहादत करार देते हुए कहा था कि बेहद मुश्किल होता है एक जन आंदोलन का नेतृत्व करते हुए सबसे आगे रहकर आक्रमण को ङोलना। उस दौर में दूसरी भारी-भरकम आवाज देशबंधु चितरंजन दास की विधवा बसंती देवी की उभरी थी। इसी ललकार का नतीजा था कि चंद्रशेखर आजाद की हंिदूुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के नायक भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने मिलकर सांडर्स वध की योजना रची और फांसी पर झूलना कबूल किया। यह सब आजादी की लड़ाई का क्रांतिकारी घटनाक्रम है। यह उचित ही है कि मोदी सरकार लाजपत राय के जन्म का 150 साल पूरा होने पर उनके सम्मान में 5,10 और 150 रुपये के विशेष सिक्के ढालने जा रही है। देश के इस लाल को सम्मानपूर्वक शेरे पंजाब और पंजाब केसरी भी कहा जाता है। लालाजी के जीवनकाल का विस्तार 19वीं सदी के अंतिम तीन दशकों और 20वीं सदी के पहले तीन दशकों के बीच है। इस दौर की भारतीय राजनीति में लालाजी जैसा कोई दूसरा सितारा खोजना आसान नहीं। यह उनकी विलक्षणता का प्रभाव था कि लाल-बाल-पाल के युग में विपरीत ध्रुव भी आकर्षित होते रहे। स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान सचमुच अद्वितीय है। 19वीं सदी में लालाजी ने अंग्रेजी और हंिदूुस्तानी के माध्यम से शिक्षा की पैरवी की। भारतीय भाषाओं में शिक्षा देने को उचित ठहराकर लालाजी भाषा आंदोलन के भी अग्रिम पंक्ति के नायक साबित हुए। 17 more words

Columns

Why has history forgotten this giant?

Seven miles from Kashi in Uttar Pradesh is Mughalsarai. A hundred years ago, Lal Bahadur, India’s second prime minister, was born there on October 2, 1904, the same day as India’s greatest statesman Mohandas Karamchand Gandhi, born 35 years before Shastriji. 1,255 more words

Blog

Remembering Shri Lal Bahadur Shastri

Most of us would have studied about Shastri in our school textbooks in which we were taught that he was initially a freedom fighter, then became prime minister after Nehru, and later died in Tashkent. 427 more words

NEWS

Tribute to Mahatma Gandhi and Lal Bahadur Shastri

Resonance Commerce & Law Program Division – CLPD pays tribute to Mahatma Gandhi – ‘Father of our Nation’ and Lal Bahadur Shastri – ‘Former Prime Minister of India’ on their Birth Anniversary.

JAI HIND !!!

Lal Bahadur Shastri