Tags » Lal Krishna Advani

Lal Krishna Narayana Murthy!

On the 18th of August, just as trading in the bourses started in India, Vishal Sikka, CEO and MD of Infosys decided to extend his working day sitting in… 1,088 more words

India

Chandigarh stalking case: Focus once again on police role

The Chandigarh stalking incident has once again focussed attention on the working of the police which is still governed by a law enacted by the British more than 156 years ago. 730 more words

Politics

Advani.

आज इस तस्वीर पर हर पेज पर meme बनेंगे, चुटकुले सुनाए जाएंगे, तो कोई इसे शताब्दी की सबसे दर्दनाक हादसा या तस्वीर बताएगा। लेकिन अगर दुनिया वाजपेयी जी को भारतीय राजनीति का भीष्म पितामह मानती है तो मैं आडवाणी जी को भा.ज.पा. 8 more words

India

Does the Indian mainstream media have a leg to stand on?

Watching some of the big names of the Indian media making a fool of themselves today reminds me of that old fable of the emperor’s new clothes. 990 more words

Narendra Modi

महामहिम उम्मीदवार रामनाथ कोविंद: फैसले के मायने; बिहार के एक आई. ऐ. एस की नज़र से ..

मोदी आश्चर्यचकित करने के लिए जाने जाते रहे हैं। इसलिए इसकी उम्मीद तो सबको थी। बहुतों को ये भी पता था कि कोई गुमनाम सा नाम आएगा, लेकिन ऐसे किसी नाम की कल्पना शायद ही किसी ने की होगी।

आज अधिकतर लोग उनके बारे में गूगल कर रहे होंगे। लेकिन मैं बिहार से हूँ, मैंने उन्हें 2015 में तब खोजा था जब वो ऐन चुनावों के पहले बिहार के राज्यपाल बनाए गए थे। तब बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने उनके नियुक्ति का विरोध किया था। आज लगभग दो साल बाद श्री रामनाथ कोविंद देश के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार घोषित हुए हैं।

मैंने उनकी योग्यताओं को देखा है, वकालत से लेकर यूपीएससी तक और राजनीतिक करियर से लेकर सामाजिक कार्य तक। उनकी योग्यता पर कोई संदेह नहीं है। ना ही उनका दलित होना ही कोई समस्या है, जैसा कि कई लोग दलित कार्ड से नाखुश हैं।

लेकिन तमाम योग्यताओं के बाद भी वो सर्वोच्च पद के लिए सबसे योग्य चुनाव हैं क्या ? मैं मानता हूं कि राज्यपाल हमेशा ऑब्स्ट्रक्टर नहीं होता, लेकिन क्या ये दिलचस्प नहीं है कि जिस व्यक्ति के नियुक्ति का नीतीश जी ने लगभग बौखला कर विरोध किया था, आज उन्हें ही जब राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया तो उन्होंने इसे व्यक्तिगत प्रसन्नता का विषय बताया ? तब जबकि केंद्र में विरोधी दल की सरकार है और बिहार की सरकार कैसे चल रही वो आप देख ही रहें, ऐसे में अगर आप बिहार की राजनीति को समझते होंगे तो आप नीतीश जी के इस हृदय-परिवर्तन को भी आसानी से समझ सकते हैं। अगर न समझ पाएं, तो दो अलग नाम बुटा सिंह और डीवाई पाटिल का याद कर लीजिएगा।

श्री कोविंद का नाम आते ही पहली बात जो ध्यान में आई कि क्या वो मजबूत राष्ट्रपति साबित होंगे ? जबकि वो कितने मजबूत राज्यपाल रहे हैं वो हमने देखा है। राष्ट्रपति भले ही सांकेतिक शक्तियां रखता है, लेकिन वो संघ का एक मजबूत स्तम्भ होता है। संविधान का संरक्षक होने और सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर होने के साथ उसकी न्यायिक शक्तियां उसे सचमुच इस लोकतंत्र का प्रमुख बनाती हैं। फिर जब राष्ट्रपति राजेन्द्र बाबू, प्रणव दा या कलाम साब जैसा कोई होता है तो आपने देखा ही है कि वो कितना प्रभाव डालता है और कितना परिवर्तन ला सकता है।

शाम तक श्री कोविंद ने उस संशय का समाधान भी खुद कर दिया जब वो भावपूर्ण होकर कह रहे थे कि मैं मोदी जी और शाह जी को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने ने मुझ जैसे सामान्य नागरिक को इस लायक समझा। जितनी बार उन्होंने ‘सामान्य नागरिक’ रिपीट किया उससे ही समझ आ रहा था कि वो कितने प्रभावशाली होंगे।

राष्ट्रपति सामान्य नागरिक नहीं चाहिए हमें। हमे वो चाहिए जिसमें आत्मविश्वास हो, जो उस विरासत को संभाल सके। अगर आपको इस चुनाव में सब ठीक लगता है तो आपको ये तय करना होगा कि आप प्रतिभा पाटिल जैसे चुनावों पर कुछ नहीं बोलेंगे। फिर तुम्हारा-हमारा एक-एक गलत मिल कर सही हो जाएगा। आखिर शैक्षणिक योग्यता पैमाना तो है नहीं। तब दोनों के व्यक्तित्व में आप अंतर बता दीजिए ?

किसी और से नहीं तो अपने पूर्ववर्ती अटल जी से ही सीख लेते सरकार ! क्यों हमे हर बार अपने राष्ट्रपति को गूगल करना पड़े ? कम से कम किसी ऐसे चेहरे को तो लाते जो पीएम के सामने खड़ा होकर बोल पाता। दलित ही तो किसी ऐसे दलित को लाते जो खुद के फैसले और स्टैंड ले पाता ! खैर, आपको वैसे लोग पसन्द ही नहीं शायद।

और अब जबकि ये तय है कि श्री रामनाथ कोविंद अगले राष्ट्रपति होंगे में उन्हें और राष्ट्र को, खुद को शुभकामनाएं देता हूँ और आशा करता हूँ कि मेरे अपेक्षाओं के विपरीत वो एक अच्छे तथा सफल राष्ट्रपति साबित होंगे !

बिहार से एक आयी, एस

Narendra Modi

2019 के लिए मोदी ने आडवाणी-जोशी का कर दिया बलिदान !

2017-06-19 16:07:04

लखनऊ. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की प्रेस कांफ्रेंस से पहले तक राम नाथ कोविंद राष्ट्रपति पद के संभावित नामों की सूची में दूर-दूर तक शामिल नहीं थे। राष्ट्रपति पद के लिए जिस नेता का नाम सबसे ऊपर था वे थे लाल कृष्ण आडवाणी। भाजपा के लौह पुरुष, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनैतिक गुरु और भाजपा के हर संकट के मोचक रहे लाल कृष्ण आडवाणी से बड़ा नाम कम से कम भारतीय जनता पार्टी में चर्चा में नहीं था। कुछ समय पहले अचानक बाबरी विध्वंश मस्जिद मामले में सीबीआई कोर्ट में ट्रायल और आडवाणी-जोशी जैसे दिग्गज नेताओं की पेशी के बाद जानकार किसी अप्रत्याशित राजनैतिक घटनाक्रम का अनुमान लगा रहे थे। आज अमित शाह की प्रेस कांफ्रेंस के बाद यह साबित हो गया कि अब आडवाणी भाजपा के पितामह नहीं रहे बल्कि संरक्षक मंडल के एक सदस्य मात्र रह गए हैं। 31 more words

Narendra Modi

EVM manipulation bogey is not new

The BJP swept the February-March, 2017 Assembly elections in Uttar Pradesh and Uttarakhand. The instant reaction of BSP supremo Mayawati to her party’s miserable performance  in Uttar Pradesh was that Electronic Voting Machines (EVMs) were manipulated. 395 more words

Politics