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'जय किसान' आंदोलन - मिट्टी का मान, देश की शान

देश कृषि-संकट से गुजर रहा है। किसान आँकड़ों में तब्दील हो रहे, किसानी अभिशाप बनती जा रही है। क़ुदरत की मार, सरकार की बेरुख़ी और बची-खुची ज़मीन पर लालच भरी निगाहें। कमाई हो नहीं रही, ज़मीन छिनी जा रही, खेत बर्बाद हो रहे, गाँव उजड़ रहे हैं। देश का अन्नदाता आत्महत्या को मजबूर है। देश चुप है! यह चुप्पी कब तक? सवाल सिर्फ किसान का नहीं है, देश के भविष्य का है।

स्वराज अभियान किसानों की लड़ाई में उनके साथ खड़ा है। यह लड़ाई सिर्फ किसान की नहीं, पूरे देश की है। ‘जय किसान’ आंदोलन भारतीय किसानों की गरिमा को वापस बहाल करने का एक सकारात्मक एवं रचनात्मक आंदोलन है। यह आंदोलन है किसानों की ज़मीन और जीविका की रक्षा का। यह आंदोलन है खेती को आर्थिक रूप से व्यवहारिक और पर्यावरण की दृष्टि से वहनीय बनाने का। ‘जय किसान’ आंदोलन विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों के किसानों को एकजुट करेगा और उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ेगा। यह आंदोलन शहरी भारत को किसान और किसानी से जोड़ेगा, वैकल्पिक कृषि को आगे बढ़ाएगा।

‘जय किसान’ आंदोलन की चाहत है कि सभी किसानों के लिए – पर्याप्त आय, बीमा और सामाजिक सुरक्षा हो; प्राकृतिक संपदाओं पर सामुदायिक अधिकार हो; पर्याप्त, पौष्टिक और सुरक्षित भोजन मिले; साथ ही, पारिस्थितिकी वहनीय खेती को विकसित किया जाए।

‘जय किसान’ आंदोलन के निकट लक्ष्य हैं –

  • किसानों के मुद्दों की प्रमुखता: संसदीय विमर्शों और राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोपों से परे, किसानों के मूल मुद्दों को मुख्य धारा में लाना।
  • किसानों के मुद्दों का विस्तार: भूमि-अधिग्रहण से आगे, किसानों की आय और वहनीय कृषि के मुद्दों को भी शामिल करना।
  • सत्ता पर दबाव: मौजूदा कृषि-संकट पर ध्यानाकर्षण के लिए संसद, राजनीतिक दलों और मीडिया पर दबाव बनाना।

‘जय किसान’ आंदोलन के दूरगामी लक्ष्य हैं –

  • विभिन्न किसान आंदोलनों के बीच एकता क़ायम करना और छोटे एवं दल-हीन आंदोलनों को एकजुट करना।
  • किसान के विभिन्न वर्गों के बीच सेतु बनाना, सबको एक मंच पर लाना।
  • किसानों के अलावा दूसरे वर्गों, विशेषकर शहरी युवा मध्यम वर्ग में ग्रामीण भारत और किसान के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता पैदा करना।
  • किसान के स्वाभिमान को मज़बूत करना।

‘जय किसान’ आंदोलन की सरकार से तीन मुख्य माँगें हैं – 

  1. मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण अधिनियम २०१३ में संशोधन को वापस लिया जाए।
  2. किसानों के लिए न्यूनतम आय की गारंटी का क़ानून बने।
  3. फ़सल बर्बाद होने पर उचित एवं त्वरित मुआवज़ा मिले।

‘जय किसान’ आंदोलन के पहले भाग में ६ सप्ताह का जनसंपर्क कार्यक्रम है जो १३ जून से चल रहा है और ३१ जुलाई तक पूरे देश में चलेगा। सभी कार्यकर्ता अपने – अपने क्षेत्रों में लोगों से मिल रहे हैं, घर – घर जा रहे हैं। गाँवों की मिट्टी कलश में इकठ्ठा की जा रही है। सोशल मीडिया और मिस्डकाल कैंपेन के जरिए लोगों को जोड़ा जा रहा है। दूसरे किसान संगठनों के साथ समन्वय हो रहा है। शहरी युवा को जोड़ने के लिए इंटर्नशिप प्रोग्राम चलाया जा रहा है। सेमिनार और पब्लिक मीटिंग आयोजित की जा रही हैं।

आंदोलन के दूसरे भाग में १ अगस्त से १० अगस्त तक ‘जय किसान यात्रा’ होगी, ‘ट्रैक्टर मार्च’ निकाला जाएगा। यह यात्रा संगरूर (पंजाब) से शुरू होकर हरियाणा होते हुए, पश्चिमी यूपी और राजस्थान के हिस्सों को छूते हुए दिल्ली पहुँचेगी। गाँव – गाँव से इकठ्ठा किए गए मिट्टी के कलश लिए अन्य राज्यों के जत्थे इस यात्रा से जुड़ते चलेंगे। ये ‘मिट्टी-कलश’ संसद को मिट्टी का मोल याद दिलाने लिए हैं, मिट्टी का मान रखने के लिए हैं।

‘जय किसान’ आंदोलन सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। स्वराज अभियान आगे इस आंदोलन को भूमि अधिग्रहण जैसे तत्कालिक मुद्दों से आगे खेती को आर्थिक रूप से व्यवहारिक और पारिस्थितिकी वहनीय बनाने की दिशा में केंद्रित करेगा। ‘स्वराज अभियान’ का ‘जय किसान’ आंदोलन देश की ‘मिट्टी का मान’ का आंदोलन है।

स्वराज अभियान

Hindustan Times - Lalit Modi row: BJP confident that Congress campaign will lose steam

Hindustan Times Correspondent

New Delhi, 2 July 2015. On the backfoot over the controversies surrounding former cricket administrator Lalit Modi, the government is banking its reforms agenda on the possibility that the Congress may not be able to sustain its anti-government campaign over the three weeks leading to Parliament’s monsoon session. 246 more words

News

Take back the amendments and bring a Minimum Income Act for Farmers - Swaraj Abhiyan demands

Swaraj Abhiyan | Press Release – June 10, 2015

Take back the amendments and bring a Minimum Income Act for Farmers – Swaraj Abhiyan demands… 290 more words

Swaraj Abhiyan

भूमि-अधिग्रहण बिल पर संयुक्त संसदीय समिती को स्वराज-अभियान का ज्ञापन

स्वराज अभियान | प्रेस विज्ञप्ति – 10 जून, 2015

भूमि-अधिग्रहण बिल पर संयुक्त संसदीय समिती को स्वराज-अभियान का ज्ञापन

स्वराज अभियान ने भूमि अधिग्रहण का उचित मुआवजा व पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास व पुन: स्थापना (संशोधन) दूसरा बिल 2015 के सम्बन्ध में बनी सयुंक्त संसदीय समिति को इस बिल के बारे में अपनी राय देते हुए एक ज्ञापन भेजा है। ज्ञापन में कहा गया है कि यह बिल, 2013 के मूल क़ानून के ध्येय परामर्श, सहभागिता, सूचना व पारदर्शिता के खिलाफ है। सरकार के इन संशोधनों के बाद भारतीय संविधान की आत्मा “प्रजातंत्र को जमीनी स्तर तक ले जाने” के संकल्प को प्राप्त नहीं किया जा सकेगा।

स्वराज अभियान ने इस संशोधन बिल को वापिस लेने की मांग करते हुए कहा है कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधानों,  दीवानी अदालत में जाने से रोकने व मुआवजा तय करने में फेक्टर लागू करने, को बदला जाये, जो व्यवहार में आने के बाद जन हित के खिलाफ साबित हुए हैं। स्वराज अभियान ने मांग की है कि कानून कि दीवानी अदालत में जाने की छूट दी जाये वहीँ मुआवजा तय करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में जमीन के बाजार भाव पर लगाए जाने वाले फेक्टर को राज्य सरकारों पर छोड़ने कि बजाय फेक्टर दो लागू करने का प्रावधान किया जाये। हरियाणा जैसे राज्यों ने ग्रामीण क्षेत्र की जमीन के लिए पूरे राज्य के लिए फेक्टर एक को लागू करने का नियम बना दिया है। जिसके चलते अधिग्रहण के एवज में चार गुना मुआवजा मिलने का अधिकार परोक्ष तरीके से ख़त्म कर दिया गया है।

स्वराज अभियान ने ज्ञापन में कहा है कि 2013 का कानून एक जनवरी 2014 से लागू किया गया, जिसके नियम अगस्त 2014 में बनाये गए। दिसंबर 2014 से ही 2013 के भूमि अधिग्रहण के मूल कानून को बदलने की कोशिश चल रही है, जिसका अर्थ है कि बिना प्रयोग में लाये ही छिपे उदेश्यों के लिए कानून को बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

स्वराज अभियान ने कहा है कि कुछ विशेष लोगों को टेक्स के मामले में फायदा पहुंचाने के लिए प्राइवेट कम्पनी की जगह प्राइवेट एंटिटी को स्थान दिया जा रहा है। अभियान की राय है कि इस बिल के द्वारा, प्राइवेट कम्पनी या प्राइवेट पब्लिक सांझेदारी के प्रोजेक्ट्स के लिए 80 व 70 प्रतिशत लोगों की सहमती व पब्लिक इम्पेक्ट असेसमेंट (जन प्रभाव आंकलन) के प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव, प्राइवेट एंटिटी के लिए मनमर्जी से जमीन का अधिग्रहण करने की खुली छूट देने के लिए है। जो फ़ूड स्क्योरिटी के साथ ही सालों से जमीन की लूट के खिलाफ चल रहे आन्दोलनों की भावना के खिलाफ है।

2013 के भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन का यह बिल मूल क़ानून के प्रावधानों को लागू किये जाने में छूट के लिए पांच अपवाद का प्रावधान करता है।  जिसके चलते लगभग अधिग्रहण की जाने वाली सारी जमीन छूट के दायरे में आ जाएगी। जिससे हम 1894 के कानून से भी पीछे चले जायेंगें।

स्वराज अभियान की राय है कि उक्त संशोधनों के प्रस्ताव करने वाले बिल को वापिस लिया जाये क्योंकि यह बिल 2013 के कानून के अनुसार यदि किसी जमीन का अधिग्रहण कानून लागू होने से पहले हुआ था, मगर उस जमीन का कब्जा नहीं लिया गया है या मुआवजा नहीं दिया गया है तो मालिक को जमीन  वापिस की जाएगी। इस संशोधन बिल से जमीन मालिकों के इस अधिकार को समाप्त करने का प्रयास हो रहा है। साथ ही किसी प्रोजेक्ट को चालू करने के लिए पांच साल की सीमा को भी यह बिल समाप्त कर रहा है।

स्वराज अभियान ने किसानों के साथ हो रहे जबरन अत्याचार का पुरज़ोर विरोध किया है। साथ ही, देश भर के किसानों के लिए एक न्यूनतम आय कानून की मांग की है ताकि खेती-बाड़ी को घाटा-मुक्त बनाया जा सके।

किसानों की सशक्त आवाज़ बनते हुए स्वराज अभियान अपनी इन मांगों के साथ 13 जून से एक राष्ट्रव्यापी “जय-किसान” आंदोलन करेगी।


स्वराज अभियान मीडिया

Press & Media

Land acquisition act is pro-development, deserves support: NAREDCO

Amendments in the Land Acquisition Act, 2013 by the Union Govt. is a major improvement of the earlier Act., is pro-farmer with provision of higher compensation and assured jobs which is expected to accelerate the pace of economic development in the country. 224 more words

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