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Been a while!

hello!

It’s nice to be back :) It’s been a while as we’ve been quite swamped with work and other stuff.

This week has been particularly rough but it’s Friday! 105 more words

Photos

Waiting for summer

The street and sky scene this week is from Rudbecksgatan in Limhamn and from the meeting hole in the ground by Öresundsgården in Limhamn. The depression in the ground were used for meetings and I seem to remember It was religious meetings there. 60 more words

Sweden

Pentecost

Pentecost
The Royal Botanical Gardens,
Madrid

The irises today speak in tongues,
their little beards bristling
in the mottled light.

Not yet! It’s barely Easter. 57 more words

Yasujirō Ozu

कुंए में पत्तियां गिरती हों जैसे, सांसों का सूत गुड़-धेली से बंधा हो, धप्प से बैठा जाता हो रुधिर के गह्वर में, कुछ ऐसा ही दृश्य विधान है यासुजिरो ओज़ू के सिनेमा का। किसी फिल्मकार का कैमरा कभी इतना सुदूर, इतना तटस्थ नहीं रहा, जितना ओज़ू का है। …और स्थिर …और मौन। लगता है एक शून्य है ख्‍़याल की खोखल में दुबका-सा, जिसके बाहर आलम तमाम बीत जाता है, सुदूर… किसी संगीत की अस्फु‍ट अनुगूंजों के बीच। चीज़ें रह जाती हैं केवल। प्रतीक्षा से भरी, भवितव्‍य के अवश स्‍वीकार में निमग्‍न। और तब लगता है के शायद हर शै के भीतर अंधेरे की एक आंख होती है, जो केवल देखती है… उसके देखने भर से ही तख़लीक़ होती है, क़ाएनात है।

ओज़ू को इस तरह से देखना आता है।

यासुजिरो, मेरे मास्टर, तुम ईश्वर की अलक्ष्य शरणगाहों में घुसपैठ करने में क़ामयाब हुए, ख़लाओं के उस तरफ़ का इलाक़ा देख आए हो, ख्‍़यालों की छांह तक वर्जित थी जहां।

[ओज़ू के यहां कैमरा हिलता नहीं, स्थिर रहता है। लो-एंगल पर वे उसे फिट कर देते हैं, उसके सामने एक्‍शन या नॉन-एक्‍शन जो भी हो, चलता रहता है। ट्रैकिंग शॉट? वो क्‍या होता है? ओज़ू के यहां वह मुश्किल से ही मिलता है। और ट्रॉली शॉट तो उनकी तमाम फिल्‍मों में से केवल एक (‘अर्ली समर’) में ही है। सिनेमा में हतप्रज्ञ, संज्ञाशून्‍य, किंकर्तव्‍यविमूढ़ अ-क्रिया का इससे बड़ा उपासक कोई और नहीं]

[तस्‍वीर : ओज़ू की फिल्‍म ‘लेट स्प्रिंग’ का अंतिम दृश्‍य। बेटी पिता के घर को अलविदा कहकर जा चुकी है। पिता अकेले रह गए हैं। उन्‍हें लगता है जैसे उनका समूचा अस्तित्‍व किसी फल से उतारे गए छिलके जैसा रह गया है। रोज़ शाम बेटी ही तो उन्‍हें फल छीलकर देती थी। शॉट कट होता है। सामने एक अथाह समंदर है। लहरें लौटकर आ रही हैं। सब कुछ एक करुण संगीत में डूबा जाता है।]

Cinema

snow

Spring is late here in the Maritimes. Snow on the ground and ice in the water. I think I will invest in a hot water bottle to warm up stiffened fingers while I paint. 119 more words

The beauty in simple things: Late Spring

After The Flavor of Green Tea over Rice, here we are back again to the beloved and acclaimed Japanese cinematography. Once again, to guide us into this particular world, we have behind the camera the great master Yasujiro Ozu, author, as mentioned earlier, of some of the most iconic films of the Japanese postwar. 283 more words

Japan