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Learn Indian Astrology Online : Aquarius and Pisces Ascendants – Causative and Uncausative Planets

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astrology does not need me to believe in it

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Astrology

Learn Feng Shui Online Course: The Art Of Placement – Part 2

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ज्योतिष सीखिये/HOW TO PREDICT

Astrology is the light of life,and this art depends on Stars.Like Sun,Moon Mars,Mercury Jupiter,Venus,Saturn,Rahu,Ketu,Pluto,Uranus Neptune etc.Astrology always gives informations like a field of crops,If anyone knows the name of crop and can describe the nature of crops then he is expert in the science of heaven.Here I am going to start a new topic like Horoscope Reading it is totally different from Natal Chart,if anyone not know Date of birth time of birth,and place of birth then he or she can use this method for reading his or her life by astrology.Read carefully each signal of star,and define the nature of star in the every house,mix the nature and make new thing by the reading Horoscope chart.If you have any trouble kindly write me on my email AKSHIT.BHARDWAJ@YAHOO.IN or ring me any time on my Mobile number +917838172728

राहु चन्द्र जब लगन से दूसरे भाव में कभी भी साथ होते है,तो जातक में झूठ बोलने की आदत आ जाती है,कुन्डली में जब भी राहु का असर चन्द्र पर होता है,तो वह जातक के दिमाग में पता नही कितनी आशंकायें भर देता है,और वे सभी आशंकाये निर्मूल होती है,चन्द्र मन का कारक है,और राहु का स्वभाव ग्रहण देने का होता है,राहु के साथ चन्द्रमा जब भी आता है,या चन्द्र से युति लेता है,तो वह झूठ बोलने के लिये और आशंकाये देने के लिये काफ़ी होता है,राहु अगर चौथे भाव में विराजमान सूर्य और शुक्र को देखता है,तो वह पिता और पत्नी को अपनी आशंकाओं और भ्रम भर देने के लिये काफ़ी होता है,इसी राहु की युति अगर किसी प्रकार से शनि और सप्तम के अन्दर केतु की होती है,तो वह झूठ दूसरे भाव में राहु और चन्द्र का प्रभाव भरने के लिये काफ़ी होता है,शनि नौकर है और केतु संचार का साधन होता है,आठवे भाव का प्रभाव चौथे भाव पर जाता है,चौथे भाव में सूर्य और शुक्र के होने पर यह दूसरे भाव का राहु घर में बैठे पिता और शुक्र पत्नी को डराने का तथा भ्रम देने के लिये काफ़ी होता है.भ्रम दिया भी जाता है,लेकिन इस राहु को अगर किसी प्रकार से गुरु देख रहा है,तो राहु का बोला हुआ झूठ पकडा जाता है,वह भी राहु के धर्मी होने के कारण.
एक कुन्डली को प्रस्तुत किया है,इस कुन्डली को प्रश्न कुन्डली के अनुसार गणना करने तथा उसका विवेचन करने का पूरा ब्यौरा इस प्रकार से है:-
कुन्डली सायन सिस्टम से वृश्चिक लगन की है,लगनेश कर्क राशि के होकर नवें भाव में विराजमान है,मंगल नवें भाव से अपनी सप्तम नजर से तीसरे भाव में विराजमान गुरु प्लूटो को देख रहे है,और अष्टम नजर से अपने ही निवास स्थान पर विराजमान राहु चन्द्र और नेपच्यून को देख रहे है,मंगल से पंचम भाव में विराजमान यूरेनस अपनी त्रिकोणात्मक युति कर रहे है,लगन से माफ़िक मंगल और यूरेनस है,जबकि विरोध में गुरु प्लूटो तीसरे भाव में और शनि दसवें भाव में सूर्य बुध सप्तम में विराजमान है.
मंगल का नवें भाव में कर्क राशि का होना मंगल को नीच बताता है,नवां भाव कालेज या बडी शिक्षा का भाव भी कहा जाता है,इस भाव का सीधा मुकाबला गुरु और प्लूटो से है,गुरु खुद जातक का रूप भी है,और प्लूटो जातक को बिजली से चलने वाले यंत्रों के बारे में भी बताता है,बिजली से चलने वाले यन्त्रों में गुरु यंत्र कम्प्यूटर ही माना जाता है,यानी जातक को कम्पयूटर चलाने का ज्ञान है,और वह तीसरे भाव में अपने द्वारा शनि की बक्री होने बाली चालाकी के कारण और फ़रेब के कारण सप्तम में विराजमान सूर्य पिता और बुध जो कि आठवें घर का मालिक है,और ग्यारहवें घर का मालिक भी है,का प्रयोग करने के बाद मंगल को प्रताणित करने का दिमाग मानता है,सूर्य पिता है,और शनि उसका पुत्र है,लेकिन शनि बक्री होने के कारण अपना पूरा असर सूर्य पर नही डाल पा रहा है,उसने यूरेनस का सहारा लिया,यूरेनस जो कि हकीकत में मित्रों के घर का मालिक है,पंचम में विराजमान है,पंचम भाव भी शिक्षा का माना जाता है,अफ़ेयर का भी माना जाता है,अफ़ेयर करने वाले स्थान से आगे के भाव में शुक्र विराजमान है,जो कि छठे भर में है,और छठा घर बखान करता है,कि शुक्र जो कि स्त्री के रूप में है,या तो नौकरी करता है,और दूसरा रूप जो सामने आता है,वह दसवें घर के केतु से अपनी युति लगाकर बैठा है,केतु का काम टेलीफ़ोन या डिस्पेच करने वाले कामो से होता है,रिसेप्सन का काम भी यह केतु करता है,शुक्र का राहु और सूर्य के बीच में बिराजमान होने के कारण वह शुक्र पापकर्तरी योग में भी फ़ंसा हुआ है,एक तरफ़ राहु चन्द्र की मिली भगत के कारण वह झूठी घरेलू बातों के बीच में फ़ंसी है,और दूसरी तरफ़ वह अपनी पुत्री (सप्तम भाव का बुध) तथा सूर्य अपने पिता के कारण भी अपने को असमर्थ मानती है,वह मर भी नही सकती है,और जिन्दा भी नही रह पा रही है,इस राहु का असर इस शुक्र पर चौथे घर से पड रहा है,माता,मन और मकान के कारण शुक्र परेशान है,प्लूटो तीसरे भाव का संचार की बिजली या बैटरी से चलने वाली मशीन मानी जाती है,और गुरु जो कि दूसरे भाव का मालिक है,यानी प्रश्न पूंछने वाले के कुटुम्ब से भौतिक रूप से संबन्ध रखता है,तथा पंचम का स्वामी होने के कारण वह संतान की हैसियत भी रखता है,शनि के प्रभाव में आकर उस मशीन से लिखता है,सूर्य पिता लिये राहु का प्रभाव शुक्र को बदनाम करने से और संचार को प्रसारित करने का काम शुक्र केतु यानी किसी स्त्री से मांगा गया केतु यानी टेलीफ़ोन ही माना जा सकता है.इस तरह से जिसने मोबाइल पर मैसेज किया है,वह प्रश्नकर्ता का पुत्र ही माना जाता है.

इस कुन्डली से प्रश्न कर्ता के बारे में और भी बातें निकलती है,जो इस प्रकार से है:-

प्रश्न कर्ता का जन्म तुला राशि के सूर्य में हुआ है,कारण सूर्य सप्तम में बुध के अन्दर विराजमान है.
प्रश्न कर्ता के सूर्य के साथ बुध विराजमान है,यानी प्रश्न कर्ता के एक ही पुत्री और बहिन है.
प्रश्न कर्ता के ग्यारहवें भाव में शनि विराजमान है,मित्र और बडा भाई का भाव ग्यारहवां भाव माना जाता है.
शनि ने ग्यारहवें भाव में कन्या राशि में स्थान बना रखा है,कन्या राशि बैंक और बचत के भाव के अलावा अस्पताल में कार्य करने वाले के रूप में मानते है.
गुरु का दसवें घर में होना नीच का माना जाता है,और गुरु का सूर्य से नवें भाव में होना भाग्य का दाता बतलाता है.लेकिन सूर्य और बुध दोनो मिलकर धन की गणना करने वालों के प्रति भी अपना महत्व बताते है.धन भाव का भान वृष राशि कहती है,शनि का सीधा संबन्ध सूर्य बुध और गुरु से होने के कारण जातक के बडे भाई को बैंक या किसी वित्तीय संस्था का प्रधान या मैनेजर भी माना जाता है.
सूर्य को अग्रज यानी पहले जन्मने वाला भाई और मंगल को अनुज यानी बाद में जन्मने वाला भाई मानते है,मंगल से सूर्य पहले है,इसलिये जातक का बडा भाई भी है,सूर्य से पहले बुध स्त्री जातक का बखान करने के कारण बडे भाई से पहले एक बडी बहिन भी है.बुध से पहले शुक्र है,जो सूर्य और राहु के बीच में फ़ंसी है,यानी मर चुकी है,राहु के साथ चन्द्रमा के होने से प्रश्न कर्ता का जन्म स्थान बरबाद हो चुका है,राहु चन्द्र माता को शक की बीमारी से ग्रसित भी बताता है,लगनेश मंगल के आगे केतु का होना जातक का नाना की सम्पत्ति का प्रदाता भी बताता है,केतु के आगे कन्या का शनि बक्री है,इसका मतलब है कि जातक का कोर्ट केश भी नाना की सम्पति के लिये चला है,केतु से पंचम भाव संतान में पुत्र का मालिक गुरु है,जो केतु से छठे भाव में विराजमान है,और प्लूटो से ग्रसित है,जो कि अचानक मृत्यु का प्रदाता है,यानी नाना का एक पुत्र अचानक मर चुका है,और राहु चन्द्र का सप्तम में विराजमान होना जातक की नानी को भी नाना से पहले मरने की पुष्टि करता है,केतु से नवें भाव में शुक्र का होना,नाना खानदान की एक स्त्री का लम्बे समय तक रहना भी प्रकाशित करता है,उस स्त्री के द्वारा अपनी बहिन के द्वारा एक दूसरा पति बनाने का बखान भी मिलता है.
जातक का और जातक के बडे भाई की पत्नी का स्वभाव एक सा मिलता है,जातक की पत्नी का काम भी जनता सेवा है और जातक की भाभी का काम भी जनता सेवा से जुडा है,लेकिन जातक की माता और जातक की भाभी की माता का बोलने का स्वभाव भी एक सा है,जातक की माता भी गाली गलौज से बात करने वाली और अक्समात बोलने वाली मिलती है,उसी प्रकार से जातक की भाभी की माता भी अक्समात गाली गलौज से बात करने वाली मिलती है,लेकिन जातक (प्रश्न कर्ता) के लिये लगनेश से चौथे भाव का विचार करने पर तुला राशि मिलती है,तुला के सप्तम में शुक्र का विराजमान होना बताता है,कि जातक के पिता और जातक की भाभी के पिता किसी न किसी प्रकार से दूसरी औरतों से जुडे है,और स्त्री जातकों द्वारा प्रेरित मिलते है,जातक के पिता का भी पूरा जीवन जन्म स्थान से बाहर मिलता है,और जातक की भाभी के पिता का भी जीवन पूरा जीवन जन्म स्थान से बाहर मिलता है,जातक के पिता के बडे भाई का देहान्त अक्समात होता है,और जातक की भाभी के पिता का देहान्त भी अक्समात होता है,जातक के पिता की सम्पत्ति को भी राहु देख रहा है और जातक की भाभी की सम्पत्ति को भी राहु देख रहा है,दोनो की सम्पत्ति ही किसी न किसी प्रकार से दूसरों के द्वारा भोगी जाती है,जातक को और उसके भाइयों को उसका सुख नही मिल पाता है.
लगन से सप्तम में सूर्य जातक के बडे भाई की उपस्थिति का ब्यौरा देता है,और सूर्य के साथ बुध जातक की पत्नी का बखान करता है,जातक को पत्नी सुख बडे भाई के द्वारा ही मिलता है,जातक की पत्नी का शरीर गोल और स्वभाव बातूनी मिलता है,लेकिन जातक के साथ बात करने के समय मंगल की उपस्थिति तीसरे भाव में होने से हर बात को क्रोध के साथ कहा जाता है.बुध से दसवें भाव में राहु और चन्द्र के रहने से जातक की पत्नी कार्य को करते समय एक अजीब सा माहौल बना देती है,उस माहौल के कारण जातक की पारिवारिक स्थिति का माहौल एक दम किसी भी समय बदल जाता है,और जातक तथा उसकी पत्नी किसी भी समय एक दूसरे के प्राणों के दुश्मन बन जाते है.लेकिन गुरु का सामने होने के कारण जातक का दिमाग ज्ञान में जाने के कारण थोडी देर में ही दोनो सामान्य हो जाते है.
सूर्य का सप्तम से ग्यारहवें भाव में विराजमान शनि से त्रिकोणात्मक युति होने से जातक के बडे भाई और उनके पुत्र का आपसी सामजस्य नही बैठ पाता है,साथ ही सूर्य से पंचम में शनि होने से जातक के बडे भाई के संतान भाव में अन्धेरा ही मिलता है,शनि की गुरु से युति होने के कारण संतान का ज्ञान युक्त होना भी मिलता है,सूर्य की सिंह राशि के अन्दर केतु का होना और केतु से सप्तम में चन्द्र राहु का उपस्थिति देना,सिंह का केतु इकलौते पुत्र की औकात देता है,और खुद को अपने पिता की बडी पुरुष नर संतान का होना बताता है,यह बातें जातक के बडे भाई की मिलती है,साथ ही बुध से केतु का चौथे भाव मे होना,और केतु का चन्द्र राहु से आपसी तालमेल होना,जातक के बडे भाई की स्त्री जातक संतान अपने कुल मर्यादा को त्याग कर राहु के कारण विजातीय शादी करती है,और जिससे शादी करती है,वह केतु यानी विजातीय दामाद जातक के बडे भाई और अलावा परिवार को आपस में बुराइयां देने और आपस में लडवाने का काम करता है,अपने कारणों से यह राहु जातक के बडे भाई के कारक सूर्य से बारहवें भाव में विराजमान शुक्र को जो जातक के बडे भाई की बहू का रूप है,और मेष राशि का शुक्र होने के कारण जातक के बडे भाई के निवास से पूर्व दिशा से सम्बन्ध रखती है,तथा मंगल की राशि मेष होने के कारण किसी इन्जीनियरिन्ग या दवाइयों के काम से जुडे परिवार से अपना सम्बन्ध रखती है,को दूर करवाकर आपसी विचारों का अन्धेरा देने के कारण सभी को दूर किये रहता है.वृष राशि का सूर्य धन से लगाव रखता है,और चौथे भाव में केतु का रहना सूर्य और केतु का आपसी सम्बन्ध केतु बनकर घर में रहना माना जाता है,बडा भाई तीन में से एक जगह पर रहता है,या तो वह मामा के घर रहे,या बहिन के घर रहे,या ससुराल में रहे.
प्रश्न कुन्डली से जातक और उसके परिवार के सदस्यों की उम्र का बखान मिलता है,बुध मंगल केतु राहु की डिग्री अधिक मिलती है,मंगल से प्रश्न कर्ता,प्रश्नकर्ता की भाभी,प्रश्नकर्ता की बहिन,प्रश्नकर्ता की पुत्री,प्रश्नकर्ता के पिता,प्रश्नकर्ता की माता,प्रश्नकर्ता की भाभी की माता की उम्र अधिक मिलती है,गुरु पिता और चन्द्र माता के बीच में अधिक डिग्री का अन्तर नही है,इसलिये दोनो को एक साथ या कुछ दिनो के आगे पीछे मृत्यु का होना मिलता है,प्रश्न कर्ता की सास और स्वसुर में एक साल और चार महिने का अन्तर मिलता है,पहले स्वसुर की आसामयिक मृत्यु का होना मिलता है,और मृत्यु स्थान का भाव आठवां कन्या का बक्री शनि है,बक्री शनि जब कन्या का होता है,तो जातक के अन्दर नशे वाली बीमारियां पायी जाती है,यह शनि घर से उत्तर दिशा में मृत्यु को कारित करने वाला पाया जाता है,और मृत्यु के समय शरीर को छिन्न भिन्न या तो पांच कुत्ता जाति के जानवरों के द्वारा किया जाता है,या फिर आसपास के पांच लोगों के द्वारा किया जाता है,सास की स्थिति को शुक्र के द्वारा जाना जाता है,शुक्र के आगे के भाव में सूर्य विराजमान है,इसलिये आंखों की बीमारी मिलती है,और मृत्यु का दाता मंगल माना जाता है,मंगल दवाई भी है,और मंगल भोजन भी है.जातक के बडे भाई की उम्र के लिये सूर्य और बुध की डिग्री को जोडा जायेगा,प्रश्न कर्ता की उम्र से नौ साल अधिक प्रश्न कर्ता के बडे भाई की उम्र मानी जाती है.जातक की भाभी की मृत्यु का कारक चन्द्र राहु है,वह चाहे वाहन के द्वारा माना जाये या फ़िर किसी कैमिकल युक्त पानी से या विषाक्त भोजन से माना जाये,यही कारण प्रश्न कर्ता के प्रति माना जायेगा.प्रश्नकर्ता की पत्नी की उम्र जातक के बडे भाई की उम्र के बराबर मिलती है.
इस प्रश्न कुन्डली के द्वारा जो भाव देखे जायेंगे वे इस प्रकार से है:-

  • प्रश्न कर्ता के लिये लगन और लगनेश को देखा जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता की पत्नी के लिये लगन से सप्तम और सप्तमेश को देखा जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता के पिता के लिये लगन से दसवां और दसवें भाव के मालिक से देखा जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता की माता के लिये लगन से चौथे और चौथे भाव के मालिक से देखा जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता के बडे भाई के लिये लगन से ग्यारहवें और ग्यारहवें भाव के मालिक से देखा जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता के छोटे भाई के लिये लगन से तीसरे और तीसरे भाव के स्वामी से देखा जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता की संतान के लिये लगन से पंचम और लगनेश से पंचम को देखा जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता की भाभी के लिये लगन से पंचम और पंचमेश के पंचम से देखा जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता के बडे भाई की संतान के लिये नवें भाव से और नवें भाव के मालिक से देखा जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता के नाना के लिये लगन और लगनेश के स्थान से देखा जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता के स्वसुर को लगन से चौथे और लगनेश से चौथे भाव के अनुसार जाना जायेगा.
  • प्रश्न कर्ता की सास को लगन से दसवें और दसवें के मालिक से दसवां देखा जायेगा.
HOW TO PREDICT

Learn Indian Astrology Online: Planets that are Causative

It is important to learn in Astrology that which are causative and which are uncausative planets in an acscendant. Based on this theory Astrologers is able to predict which planets will play important role in a person’s life. 205 more words

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