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A Month

A month

Of voices;

Records none.

Clutter

Of words;

Redundant phase.

I stared at the dates

Calendar fluttered;

“A month!…hmm.”

Copyright © 2018, Deeya Nayar-Nambiar

Poems

हार का आभार

क्यूँ हर इज़हार में बस अपनी जीत के गान गाते हो तुम,
क्यूँ हर इबादत में बस अपनी खुशियों के शुक्रगुज़ार हो जाते हो तुम।
तुम्हें इस ऊँचाई तक पहुँचने में तो दोनों ने मदद् किया था ना?
फिर क्यूँ उस ज़र्द निशा को हमेसा भूल जाते हो तुम।।

याद है!
चढ़ते दिन ने तो तुम्हें और व्यस्त बनाया था।
हासिल हुई उम्मीदों ने तो और त्रस्त बनाया था।
मगर वो काली रात ही तो थी,
जिसने एकांत में शयन के न्यौते पर बुलाया था।।

तुमने अपनी हर जीत के दीये जलाए, खुशियाँ मनाई।
क्या कभी किसी हार का शुक्रिया किया?

नहीं ना!
भूल गए ना कि इन त्राशद के लम्हों ने ही तुम्हें उस जीत के लिए सजाया था।
इन पराजय के पत्थर पर ही तुमने अपने साहस का स्तम्भ बनाया था।
अगर वो ढलती शामों ने तुम्हें रुलाया ना होता ना,
तो शायद ये सुबह तुम्हें इतना खिला ना पाती।।

तो कभी भी ज़िन्दगी की अटकलों से ना रूठना,
ना कभी इन रास्तों की रूकावटो से टूटना।
खुशियाँ इनके पीछे ही चलकर आती हैं,
बस पलभर इनके भी आभार में आँखें मूंदना।।

-शिवम झा

Soldier- Born To Die

If I die fighting in a war zone,
If possible make it known .

Sorry motherland couldn’t serve you more,
Will be born again to complete my swore . 73 more words

Poem

Fresh Start

A new beginning

Exciting and enlighting

A new journey filled with possibilities

Thankful for the opportunities

Just hoping for the best

Great things in progress

CassFrotastic

Poetry

A Time of Reminiscence

Do you have the time to look back
and see what we’ve been through?
I don’t think we can move on
without the loses. 123 more words

Poem

Passé

 I

came with

nothing.

Why should I?

Look behind

Or ahead

Moments pass…

                                           Copyright© 2018 Deeya Nayar-Nambiar

Poems