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प्रिय पिंटू को ख़त

प्रिय पिंटू,

तुम को नफ़रत भरा ‘गो टू हेल‘। जबसे उ मुई तुम्हरी ज़िंदगी मे आयी है तबसे तू हमनी दुनों परानी के ऐसे भुलाए हो जैसे पूरब में कमाने के बरे गया मनसेधू अपनी मेहरारू के बिसार देता है। अखलेस की सरकार म उके भी दिन बहुर गए थे और पंचायत सिकरेटरी हो गयी थी।

प्रिय महक को ख़त

प्रिय महक,

तुम्हारे प्रेम की सुगंध आज भी मन-मंदिर में घर किये हुए है। ‘रहना है तेरे दिल में’ फ़िल्म का गाना ‘जरा-जरा महकता है ये तेरा-मेरा तन-बदन’ आज भी तुम्हारी यादों के आग़ोश में मुझको समेट लेता है। इक्कीसवीं सदी के नवजात काल में हम भी प्रेम ककहरा सीख रहे थे। वीसीआर का जमाना तब चला गया था और वीसीडी प्लेयर ने घरों में दस्तक दे दी थीं।

हम-दोनों जो भी फिल्मों की कैसेट लाते, उसकी एक-दूसरे से अदला-बदली कर लेते। फ़िर उन फ़िल्मों के नायक-नायिका सा स्वांग रचते। मेरी स्मृति में आज भी वो पल ताज़ा है, जबकि  तुम  जारा बनकर मुझे रिझाती थीं। तुम्हें याद है, मैंने भी वीर बनने का प्रयास किया था मग़र मेरी घातक अदाकारी को देखकर तुमने मुझसे दुबारा ऐसा कुछ भी न करने की सौगंध ले ली थीं।

गैंगेस्टर फ़िल्म की वीसीडी तुम्हारे भैया लाएं थे और उसे सभी घरवालों से छिपाकर रात के तीसरे पहर में देख रहे थे। देर रात जब तुम पानी पीने के लिए उठीं और कमरे के झरोखे से चुम्बन सी मद्धिम-मद्धिम आवाज़ सुनी। तो तुमने अगले दिन उस कैसेट की जासूसी करते हुए उसको अपने भैया के वार्डरोब की रहस्यमयी जगह से ख़ोज निकाला।

अब तुमने उस कैसेट को लाकर हमें दे दिया और साथ मे इस बात की हिदायत भी दे दीं कि इसको अकेले में ही देखना। तुम्हारी हिदायत के मुताबिक हमने अकेले में ही उस मूवी को देखा मग़र बीच मे ही पापा जी की नींद खुल गयी और हड़बड़ाहट में हम उसे बंद भी न कर पाएं। प्रेमातिरेक से भरा एक दृश्य प्रवाहमान था और उस एक दृश्य को देखने के साथ ही फिल्म के भीतर के प्रेम पर्व का आकलन पापा जी ने कर लिया था। साथ ही फ़िल्म के भीतर के प्रेम अनुनाद के अनुपात में मुझे दी जाने वाली सजा को भी मुकर्रर कर दिया था।

इतना ही नही अगले दिन स्कूल की प्रार्थना सभा मे मेरे द्वारा देखे गए उस पावन चलचित्र का बखान भी किया गया और साथ मे ही इतनी कम उम्र में मेरे भीतर की इस पारखी कला के लिए सभी विद्यार्थियों द्वारा तालियां भी बजवाई गईं। स्कूल के अध्यापक और स्टाफ द्वारा किये जाने वाले सेंसर बोर्डनुमा व्यवहार को देखकर मन बड़ा बेचैन था। मग़र ठीक लंच के बाद आपने मुझे स्कूल के पीछे वाले बगीचे के मध्य में स्थित आम के पेड़ के पास मिलने बुलाया।

आम के पेड़ के दरख़्त को आप अपलक निहारे जा रही थी, जब तक मैं वहां पहुंचा नही था। मुझे देखते ही आपकी आँखों ने अश्रुधारा बहा दीं। मैं कुछ समझ नही पा रहा था कि आपको क्या हुआ है। मुझे उस वीसीडी कैसेट को देने का अपराधबोध आपको भीतर ही भीतर सालता जा रहा था। आपके भीतर के इस दर्द का छुटकारा मैं कैसे करूँ, इसी सोच में मैंने आपके माथे पे एक सदाशयी चुम्बन दे दिया और अधर से दर्द निवारण का ये मरहम काम कर गया। आँसुओं के बीच से ही आपकी मद्धिम सी मुस्कराहट फूट पड़ी थीं।

आपका अपना,
प्रिंस।

प्रेम पत्र

Feelings

Hi,

I haven’t yet gotten into the ‘feelings’ part as well. It’s probably because I don’t think it’d concern you. After all, I’m just a random stranger. 131 more words

Literature

A love letter to London

London,

I love the way you bring people from all walks of life together in their everyday life regardless of ethnicity, social class, language, sexuality, gender identity or income. 756 more words

Life Abroad

Dear my love,

I have texted you this this morning, but I want to say it again. I only want my present and my future with you, wherever life takes us. 84 more words

LIFE

Sexually seductive and warmly inviting

It was an early morning swim as sunlight rose to meet the day, spreading golden red sheers across the eastern sky. The water was tepid as I dove in. 471 more words

Chick Lit

To You

I know it might sound mildly insane as you read this. I hope I am not the only one who struggles to shorten words, thoughts, and feelings into a speech I am incapable of delivering. 307 more words

Letter