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Famous Photography Quote #0240

“I believe in equality for everyone, except reporters and photographers.”

Mahatma Gandhi

Photographers

Gandhi's Human Touch - A Lecture by Professor Madhu Dandwate

(Very often Gandhi was considered a very stern and uncompromising individual, one who was not willing to tolerate weaknesses in himself as well as others.Some thought him to be inhuman in his quest for freedom and perfection.In his lecture Professor Dandwate gives us ample incidences whereby one realizes that there was a very humourous and humane side to Gandhi.The authenticity of the incidents enumerated by Professor Dandwante is based on the fact that they have been narrated by Gandhi’s associates and freedom activists.) 6,885 more words

Hillele.org

Mahatma Gandhi statue unveiled in London's Parliament Square

Once a pain in the neck of the colonial Masters, the iconic Indian pacifist and independence activist was today honored with a larger-than-life statue.

The unveiling of the 9ft (2.7m) bronze statue marks 100 years since Gandhi returned to India from South Africa to begin his struggle for independence. 41 more words

NEWS

सुख-दुःख से लाभ उठाओ

Asaram ji Bapu ,asharam,bapuasharam ji,
सुख अगर अपने में फँसाता है तो वह दुःख भी खतरनाक है। दुःख अगर उद्वेग और आवेश देकर बहिर्मुख बनाता है, गलत प्रवृत्ति में घसीटता है तो वह पाप का फल है। दुःख अगर सत्संग में ले जाता है तो वह दुःख पुण्य का फल है। वह पुण्यमिश्रित पुण्य है।
जिसका शुद्ध पुण्य होता है, वह शुद्ध सुख में आता है। जिसका शुद्ध पुण्य होता है, उसको दुःख भी परम सुख के द्वार पर ले जाता है। पुण्य अगर पाप मिश्रित है तो सुख भी विकारी खड्डों में गिरता है और दुःख भी आवेश की गहरी खाइयों में गिराता है।
पुण्यात्मा सुख से भी फायदा उठाते हैं और दुःख से भी फायदा उठाते हैं। पापात्मा दुःख से ज्यादा दुःखी होते हैं और सुख में भी भविष्य के लिए बड़ा दुःख बनाने की कुचेष्टा करते हैं।
इसलिए परमात्मा को प्यार करते हुए पुण्यात्मा होते जाओ। परमात्मा के नाते कर्म करते हुए पुण्यात्मा होते जाओ। परमात्मा अपना आपा है, ऐसा ज्ञान बढ़ाते हुए महात्मा होते जाओ।
वस्त्र गेरूए बनाकर महात्मा होने को मैं नहीं कहता। एक आदमी अपने आपको विषय-विलास या विकार में, शरीर के सुखों में खर्च रहा है। वह गलत राह पर है। उसका भविष्य दुःखद और अन्धकार होगा। दूसरा आदमी सब कुछ छोड़कर निर्जन जंगल में रहता है, अपने शरीर को सुखाता है, मन को तपाता है। ‘संसार में खराब है, मायाजाल है…. यह ऐसा है… वह ऐसा है…. इनसे बचो….’ ऐसा करके जो बिल्कुल त्याग करता है… त्याग… त्याग… त्याग.. ज्ञान सहित त्याग नहीं बल्कि एक धारा में बहता चला जाता है, वह भी गलत रास्ते की यात्रा करता है।
बुद्धिमान तो वह है जो सब में सब होकर बैठा है उस पर निगाह डाले, मोह-ममता का त्याग करे, संकीर्णता का त्याग करे, अहंकार का त्याग करे, उद्वेग और आवेश का त्याग करे, विषय विकारों का त्याग करे। ऐसा त्याग तब सिद्ध होगा, जब आत्मज्ञान की निगाहों से देखोगे, ब्रह्मज्ञान की निगाहों से देखोगे।
 
Asaramji

The Great Indian Jugaad

“ Give a man a fish he would eat for a day, alternatively if you teach him to fish he would eat for the rest of his life but if you feed that person for several years he becomes lazy” …

588 more words
Through.....My Mind

Why Anna Hazare is irrelevant & not a Mahatma or Gandhian

Anna Hazare is really a Nobel & excellent person, he has given his life to many different causes and brought changes in system. In 2011 Anna started a campaign against the corruption done by UPA government, people got involved with the campaign making India against corruption(IAC) a mass movement. 929 more words

India

Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever.
- Mahatma Gandhi

Life