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संदेसा

This is one of my Hindi poems called Sandesa.. I hope you guys like it!


अँधेरी राहों में कभी, हमारा संदेसा पढ़ लेना..

उस दिए की रौशनी से, तुम खुदको संवार लेना..

हमारी खूबसूरत यादों को याद कर,

प्यारी सी मुस्कुराहट बिखेर देना..

उस अँधेरे मकान में धुप का कोना बना लेना…

Poems

दस्तूर-ऐ-दुनिया

मै हक़ीक़त कहता हू,
लोग किस्सा समझते है,
और किस्सों की बातो को,
मेरी हक़ीक़त समझ लेते है,
ज़ालिम है ये दुनिया,
और इसका दस्तूर भी,
कोई करोड़ों लुटा देता है,
कोई दाने को मोहताज़ है,
कतरा-कतरा जमा करता है कोई,
पल भर में उसे लूट लेता है कोई,
ज़ालिम है ये दुनिया,
और इसका दस्तूर भी,
मिलती है किसी को मुकम्मल जहाँ,
तो किसी को दो गज नसीब नहीं,
है जिसके पास तन ढ़कने को,
वो शौक से नुमाइश करते है,
जिसके पास नहीं है ढ़कने को,
वो मजबूर है नुमाइश करने को,
ज़ालिम है ये दुनिया,
और इसका दस्तूर भी,

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