Tags » Mandawa

Havelis of Mandawa and Fatehpur: A Mural Symphony from Rajasthan

Our tryst with Havelis started when, inadvertently, we reached Mandawa on our way to Bikaner. Mandawa is a part of Shekhawati region of Rajasthan which is recognized as the Open-Air Art Gallery of The World due to the largest concentration of the frescos in this region. 549 more words

Travel Stories

Mandawa

This is a longer excursion from Jaipur than Abhaneri, the 168km journey will take you at least 3 hours. Whilst it can be easily achieved with an early start from Jaipur, I would recommend an overnight stay so you have plenty of time to wander around the streets and back alleys of this small town, and have time to look and truly appreciate what the town has to offer. 752 more words

India

India photo gallery

To look My India photo gallery click here

https://www.flickr.com/photos/marcodileo/sets/72157628878309159/

Photos are taken: New Delhi – Agra – Jaipur – Pushkar – Jodhpur – Fatehpur Sikri – Jaisalmer – Mandawa – Fatehpur – Bikaner – Udaipur – Ranakpur

Travel Photos

Mandawa, a historical merchant town.

On our way west we stopped off in this little town, which is famous for its Havelis. Back in the days the caravans used to stop here, which resulted in a lot of merchants with too much money. 97 more words

7weeks in India- Mandawa: Hawelis, kites and clever sales

Before leaving for Mumbai I spend one day in Mandawa, a small town in Rajasthan, ca 260 km away from Delhi and completely different from the South of India. 320 more words

Social Business

जेड प्लस के बहाने PART 2 - कमांडो और राजा साहब

कई फिल्में बनती हैं और जिनमें कई श्रेष्ठ कलाकार होते हैं । कई बार उनका काम तो सामने आता है लेकिन नाम कहीं पीछे छूट जाता है । जेड़ प्लस की सबसे काबिलेगौर बात ये है कि ये फिल्म ‘हीरो- इमेज और इमेजिनेशन से आपको बाहर लाती है । इसका हर कलाकार किरदार है – असरदार है ।

अब जैसे आप इनस्पेक्टर राजेश को ही लें । इस भूमिका को अभिनेता राहुल सिंह ने निभाया है । लंबे कद के राहुल को लोग मंडावा में कई बार सच में कमांडों समझ लेते थे । कई विदेशी सैलानी तो उन्हें देख रास्ता छोड़ देते थे । कई बार ऐसा हुआ कि वो और उनके साथ कलाकार जो कमांडों की भूमिकाओं मे थे जब सड़क पर अपनी नकली बंदूकों को लेकर , वर्दी में चलते तो लोग और ट्रैफिक इन्हें देखने के लिये रुक जाते ।

खैर इस सबके बीच दिलचस्प बात ये हुई कि एक कमांडो सदस्य ने मुझसे आकर ये शिकायती लहज़े मे कहा कि मंडावा जैसे छोटे कस्बे में उन्हें जिम जैसे सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा तो ऐसे में अपने रोल के मुताबिक वो सब कैसे चुस्त-दुरुस्त रहेंगे ?

कारण वाजिब था , महीने भर पहले फिल्म में कमांडो की कास्टिंग के लिये ऐसे सशक्त और फिट लोगों को चुना गया था । जो सच में जब वर्दी पहनें तो कमांडो दिखें । कड़क, चुस्त और बुलंद ।

ये सवाल परेशान कर ही रहा था कि अगली सुबह कस्बे के लोग आपस में बातें कर रहे हैं । शॉट की व्यस्तताओं से दूर ,जब लोगों की बातचीत पर ध्यान गया तो पता चला कि हमारे कमांडोज़ के सरगना मतलब ‘राहुल सिंह’ को लोग सुबह जल्दी उठ कर दौड़ लगाते देख आये थे । उस दिन से राहुल सबके लिये , राहुल भाई हो गये , हम उन्हें एक कमांडो की तरह कई बार साथी कलाकारों के साथ या दूसरे कमांडोस के साथ टैंट मे सुस्ताते , गप्पे लड़ाते या तस्वीरें खींचते देखे । कुछ लोगों ने उन्हें हार्स राइडिंग करते हुए भी देखा । जब उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने साफदिली से कहा कि ये तो उनका रोज़ का नियम है । सच में कई बार जिन लोगों की अदाकारी और शरीर को देख कर हम मंत्रमुग्ध हो जाते हैं , उनकी तकलीफ मेहनत और जुझारुपन से हम अछूते रह जाते हैं ।

बाकी कमांडो कलाकारों को भी फिट रहने का तरीका मिल गया था । जो जिम से ज्यादा दिल से जुड़ा था । वही करो जिसमें मन लगे , एक्टीविटी करते रहो ।

उस दिन के बाद से किसी ने शिकायत नहीं की । सभी लड़के क्रिकेट खेलते , दौड़ लगाते , या पैदल सैर पर निकल जाते । उनके आपसी मनमुटाव खेलकूद से कम होने लगे और हम लोगों की परेशानी भी मुस्कराहट में बदल गई ।

राहुल सिंह- राहुल भाई हो गये और राजस्थानी संस्कृति से जुड़े उनके व्यक्तित्व के कारण लोग उन्हें राजा साहब भी कहने लगे ।

Tushar Upreti