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Timeline: How India's largest foreign investor decided to pull back

Even the darling among investors could not salvage India’s largest foreign-funded project.

For Narendra Modi, who swept the Indian elections last year promising to revive the country’s business climate, it was always going to be a difficult task to get South Korea’s Posco—the… 749 more words

प्रेम से बोलिए, एंटी करप्शन मूवमेंट स्वाहा - Dilip C Mandal

अब ऊपर मोदी और नीचे केजरीवाल हैं और इस समय भारतीय जेलों में कौन कौन से भ्रष्टाचारी बंद हैं, आप बताएं. रॉबर्ट वाड्रा या शीला दीक्षित या कोई उद्योगपति या कोई बड़ा अफसर? कौन है जेल में?

वहीं,

मनमोहन ने राज चाहे जैसा चलाया, लेकिन उनके समय में जो करप्शन में जेल गए, उनमें कुछ नाम ये हैं:
सुरेश कलमाडी
ए राजा
कनिमोई
ललित भनोट
ए. के. मट्टू
सार्थक बेहूरिया
आर के चंडोलिया
संजय चंद्रा
गौतम दोशी
हरि नायर
विनोद गोयनका
शाहिद बलवा
करीम मोरानी
रशीद मसूद….

और राज्यों के मामलों में जेल जाने वालों का हिसाब इसमें नहीं है. मतलब कि केंद्र में कैंबिनेट मंत्री से लेकर सेक्रेटरी लेबल के अफसर और सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी की नेता से लेकर यूनिटेक जैसी उस समय की भारी कंपनी के मालिक तक जेल गए. बिना लोकपाल के प्रपंच के ही जेल गए. कानून ने जेल भेजा.

इन दोनों के नकारेपन में, मनमोहन जैसा करप्शन का सरताज भी संत दिखने लगा है. मनमोहन के समय जेल जाने का डर तो होता था. आज है क्या?

प्रेम से बोलिए, एंटी करप्शन मूवमेंट स्वाहा -2

– केंद्रीय मंत्री तिहाड़ में
– देश के सबसे बड़े खेल प्रशासक और सत्ताधारी पार्टी के सांसद जेल गए
– देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी में से एक के मालिक तिहाड़ में
– शीर्ष नौकरशाह जेल में.
– सत्ता पक्ष की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी की नेता जेल में
– देश की सबसे बड़ी फाइनैंस कंपनी में से एक के मुखिया तिहाड़ में

तथाकथित भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की सफलता के बाद और ऊपर मोदी और नीचे केजरीवाल के आने के बाद अब तो ऐसी कोई हेडलाइंस यानी शीर्षक नहीं सुनते आप? इसका दो ही मतलब है:

1. या तो देश से भ्रष्टाचार खत्म हो चुका है और पिछली सरकार का भी कोई भ्रष्टाचार पेंडिंग नहीं है.
2. नई सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने में पिछली सरकार से भी ज्यादा निकम्मी और निठल्ली है या फिर करप्शन में उसके हाथ भी सने हुए हैं.

प्रेम से बोलिए, एंटी करप्शन मूवमेंट स्वाहा -3

ऊपर मोदी है,
नीचे केजरीवाल है.
भ्रष्टाचार मुक्त जंबूद्वीप में जनता प्रसन्न है.
देश के भ्रष्ट नेता-अफसर-उद्योगपति बोरिया विस्तर बांधकर देश से प्रस्थान कर चुके हैं.
जिन्होंने मनमोहन राज में करप्शन किया था, वे सारा भ्रष्ट धन रिजर्व बैंक में जमा कर चुके हैं.

यह सुनकर देवताओं ने आसमान से पुष्प वर्षा की.

Narendra Modi

Coal Scam Ghost Haunts Manmohan Singh

The former prime minister, Manmohan Singh, got the dubious honour of being only the second ever Prime Minister to stand trial in a corruption case, when the special CBI court on Wednesday summoned him as an accused in connection with an illegal allocation of a coal block in Orissa. 463 more words

Reports

کوئلہ گھوٹالے میں سمن کے خلاف سپریم کورٹ گئے منموہن سنگھ

نئی دہلی. سابق وزیر اعظم منموہن سنگھ نے کول بلاک الاٹمنٹ گھوٹالہ معاملے میں سمن جاری کئے جانے کے نچلی عدالت کے فیصلے کو سپریم کورٹ میں چیلنج کیا ہے.

غور طلب ہے کہ معاملے میں عدالت نے سابق وزیر اعظم کو ملزم کے طور پر کورٹ میں پیش ہونے کے لئے سمن جاری کیا ہے. منموہن سنگھ کو 8 اپریل کو عدالت میں پیش ہونے کے لئے سمن جاری کیا گیا ہے.

Urdu

Manmohan Singh to approach Supreme Court for relief

The following article is based on my own interpretation of the said events. Any material borrowed from published and unpublished sources has been appropriately referenced. I will bear the sole responsibility for anything that is found to have been copied or misappropriated or misrepresented in the following post. 315 more words

VGSoM Current Affairs

विपक्ष की भूमिका भरने की मुद्रा में लौटी कांग्रेस

पिछले साल लोकसभा चुनावों के बाद से केंद्रीय राजनीति में विपक्ष की भूमिका खाली पड़ी थी जिसे कांग्रेस ने एकाएक भरने का प्रयास शुरू कर दिया है। दरअसल लोकसभा चुनावों के बाद कुछ राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी का कथित जादू बरकरार रहने से कांग्रेस का जो हश्र हुआ उससे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं, सभी के हौसले पस्त हो गये थे और वह केंद्र सरकार को घेरने का साहस ही नहीं जुटा पा रहे थे। ऊपर से दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की पार्टी को मीडिया में जो तवज्जो मिल रही थी उससे देशभर में विपक्ष की भूमिका में आम आदमी पार्टी ही नजर आ रही थी। तीसरा मोर्चा, चौथा मोर्चा और बाकी के मोर्चे भी लोकसभा चुनावों में हुए बुरे हश्र के बाद से पस्त पड़े थे इसलिए केंद्र की राजनीति में विपक्ष का स्थान रिक्त ही नजर आ रहा था तथा चारों ओर ‘मोदी मोदी’ ही गुंजायमान था।

विपक्षी राजनीति में दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम अहम मोड़ साबित हुए जिनमें भाजपा का भी एक तरह से सफाया हो गया और पार्टी 70 सदस्यीय विधानसभा में मात्र तीन सीटों पर सिमट गयी। यही नहीं उसकी मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी खुद अपना चुनाव भी नहीं जीत सकीं। दिल्ली चुनावों में खुद मोदी की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी लेकिन जनता ने उन्हें भी एक तरह से नकार दिया। इससे विपक्ष, खासकर कांग्रेस को यह प्रचारित करने का मौका मिला कि जनता अब मोदी सरकार की नाकामियों से वाकिफ हो चली है और मोदी का जादू उतरने लगा है। भाजपा भी इन परिणामों के बाद बचाव की मुद्रा में आ गयी और संसद में लंबित महत्वपूर्ण विधेयकों को पास कराने के लिए उसने विपक्ष से मदद की गुहार लगाई। लोकसभा चुनावों में अपने बूते बहुमत में आई भाजपा की ओर से यह पहली बार था कि वह विपक्ष से मदद की गुहार लगा रही थी। भूमि अधिग्रहण विधेयक पर सत्तारुढ़ राजग में मतभेद होना भी विपक्ष को संजीवनी प्रदान कर गया। कांग्रेस ने जब यह देखा कि इस मुद्दे पर सरकार अंदर और बाहर, दोनों ही मोर्चों पर घिरी हुई है तो उसने सरकार को घेरने की रणनीति बनाई।

इसी बीच कोयला ब्लॉक आवंटन में हुए कथित घोटाले के सिलसिले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को अदालती सम्मन भी कांग्रेस के लिए एक तरह से राहत बनकर आया। कांग्रेस जानती है कि डॉ. मनमोहन सिंह की बेदाग छवि आज भी बरकरार है इसलिए सहानुभूति के लिए खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी नेताओं के साथ कांग्रेस मुख्यालय से लेकर डॉ. सिंह के आधिकारिक निवास तक मार्च निकाला और उन्हें पूरे समर्थन का भरोसा दिलाया। इसके बाद कांग्रेस से जुड़े संगठनों की भी डॉ. मनमोहन सिंह के यहां जाकर समर्थन जताने की होड़ लग गयी।

इसके बाद कांग्रेस ने भूमि अधिग्रहण विधेयक पर सरकार के लिए परेशानी का सबब बनते हुए विपक्षी दलों को एकजुट किया और संसद भवन परिसर से राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकाला। सोनिया गांधी के नेतृत्व में 26 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को विधेयक पर अपनी आपत्तियां बताईं। इस मार्च को रोकने की सरकार की ओर से कोशिश करने की भी खबरें आईं लेकिन विपक्ष के कड़े तेवरों के आगे उसे झुकना पड़ा।

कांग्रेस जोकि पिछले एक साल में विभिन्न चुनावों में बुरी तरह पिछड़ने के बाद पस्त पड़ी थी, को गति प्रदान करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने बेमौसम बारिश से प्रभावित हुए किसानों की हालत का जायजा लेने का निर्णय किया और इससे पहले कि सरकार के प्रतिनिधि वहां तक पहुंचें, सोनिया गांधी ने राजस्थान और हरियाणा के उन क्षेत्रों का दौरा कर किसानों का हाल जाना जोकि बेमौसम वर्षा के कारण बर्बादी की कगार पर पहुंच गये हैं। हरियाणा के बारे में तो यह भी खबर आई कि अपने दौरे में दो गांवों के छूटने पर सोनिया ने नाराजगी भी जताई। खैर, सोनिया का यह दौरा कांग्रेस में जान फूंक गया क्योंकि सोनिया के दौरे के समय किसानों से ज्यादा कांग्रेसी उत्साहित नजर आ रहे थे। सोनिया ने अपने संसदीय क्षेत्र की भी सुध ली और वहां हुई रेल दुर्घटना में घायल हुए लोगों का हालचाल जानने पहुंचीं।

बहरहाल, ऐसे समय में जबकि कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें जोरों पर हैं, सोनिया ने मोर्चा संभाल कर संकेत दिया है कि फिलहाल वह ही पद पर बनी रहेंगी। उनकी पार्टी लोकसभा में विपक्ष का दर्जा हासिल करने लायक सीटें भले हासिल नहीं कर पाई हो लेकिन सोनिया ने एक तरह से अपने नेतृत्व में विपक्ष को एकजुट कर सशक्त विपक्ष का अहसास सरकार को करा दिया है। सरकार को अब तक यह समझ आ चुका होगा कि उसकी आगे की राह आसान नहीं होने वाली है, सिर्फ इसलिए नहीं कि वह राज्यसभा में अल्पमत में है बल्कि इसलिए भी कि विपक्ष भी अब भीड़ जुटा पाने में सफल हो रहा है और विभिन्न मुद्दों पर सरकार की कथित नाकामियों को जनता के बीच सफलतापूर्वक पहुंचा रहा है।

National

Modi wins a little and Sonia blossoms, while Rahul’s on a trip that maybe shouldn’t end

The Modi government has at last had a couple of parliamentary successes with two urgent pieces of legislation covering auctions of coal and other mining leases being passed on March 20 at the end of the first part of the Budget session.  996 more words

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