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Day 19

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Marketing team –

We started to come up with a layout for the magazine covers today, as well as thinking about content and a list of permanent features which can become part of the template for the handover. 151 more words

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एहसास 2: वो एक लम्हा

उस दिन के बाद हम कभी नहीं मिले। कोई बातचीत भी नहीं हुई। हालांकि उसका फ़ोन नंबर लिया था मैंने मगर कभी बात करने की हिम्मत नहीं हुई मेरी। आखिर बात करता भी तो क्या? मुझे तो यह भी नहीं पता था कि उसे मैं याद भी हूँ या नहीं। उस बारिश की शाम को धीरे धीरे बुलाना चाहता था मगर जब भी कहीं अकेले बैठता था तो वही वक्त याद आ जाता था। और उस दिन को काफी वक्त बीत गया।

जिंदगी एक बार फिर से उसी पटरी पर लौट चुकी थी। मैं एक दफा फिर दुनियादारी की चिंता छोड़ अपने काम में व्यस्त था। पूरी तरह से तो नहीं मगर हाँ, उस पल के बारे में अब सोचना छोड चूका था। यह मान चुका था कि अब दुबारा उससे मुलाक़ात नहीं होगी मेरी। अचानक एक दिन व्हाट्सएप्प पर एक मैसेज आया, “क्या हाल?” इस नंबर को मैं बखूबी पहचानता था। थोड़ा सहम सा गया था कि आज अचानक इतने दिनों बाद उसे मेरी याद कैसे आयी? बिना वक्त बर्बाद किये मैंने उसका जवाब दिया, “मैं ठीक हूँ। तुम कैसी हो?” और इस तरह एक बार फिर उस पहली मुलाक़ात वाले एहसास के साथ बातें होने लगीं। वो बारिश की शाम और एक दूसरे के हाथों में हाथ को ना वो भी नहीं भूल पायी थी। चार घंटे तक चली बातचीत में उसने कम से कम दस बार पूछा था की शनिवार को क्या कर रहा हूँ। शायद मिलना चाहती थी वो मुझसे लेकिन कहने से डर रही थी। हालांकि डरने वाली कोई बात थी नहीं क्योंकि मैं खुद मिलने के लिए बेताब था। मैंने सोचा की मैं खुद ही पूछ लेता हूँ। बस, फिर क्या था। इस शनिवार हम कनॉट प्लेस में मिलने वाले थे।

शनिवार का दिन शायद वो पहला ऐसा दिन था जब मैं सभ्य इंसान लग रहा था। बाल ढंग से बनाए हुए, क्लीन शेव किया हुआ और फिर अलमारी से नए नवेले कपडे निकाल कर जब मैं तैयार हुआ तो खुद को भी नहीं पहचान पा रहा था। उसके सामने अच्छा दिखने की एक ख्वाइश सी थी जेहेन में। वो पहला ऐसा दिन था जब हौज़ खास से राजीव चौक तक मेट्रो का सफर कुछ ज्यादा ही लंबा लग रहा था मानो रफ़्तार थम सी गयी हो। आज से पहले किसी से मिलने के लिए इतना बेताब कभी नहीं हुआ था मैं।

राजीव चौक पहुँच कर मैंने उसको फोन किया तो पता चला की सेंट्रल पार्क में बैठे आधे घंटे से वो मेरा इंतज़ार कर रही थी। मैंने सोचा क्यों ना इस लम्हे को और यादगार बनाने के लिए उसके लिए तोहफा लेता जाऊं। तोहफे में तो चाँद तारे भी दे देता लेकिन परेशानी यह थी की आखिर चाँद को चाँद तोहफे में कैसे देता। उसकी खूबसूरती के आगे हर तोहफा फीका ही लग रहा था तो मैंने एक लाल गुलाब ही ले लिया।

थोड़ी ही देर में मैं सेंट्रल पार्क पहुंचा। थोड़ा इधर उधर घुमा तो देखा एक कोने में अकेले बैठ कर कुछ सोच रही थी। शायद मैंने ज्यादा ही इंतज़ार करवा दिया था। उन सफ़ेद कपड़ों में ऐसी लग रही थी मानों आसमान से अप्सरा खुद चल कर आयी हो। मैं धीरे धीरे आगे बढ़ा और उसने मुझे देखा। देखते ही उसके उस मासूम से चेहरे पर बड़ी सी मुस्कान आ गयी। ऐसा लग रहा था जैसे मेरी झलक पाते ही उसे सारे जहान की खुशियां मिल गयीं हों। मैं आगे बढ़ा और अपने हाथ में पकड़ा हुआ वो लाल गुलाब उसकी तरफ बढ़ाया। उसने झट से वो गुलाब मेरे हाथ से ले लिया और मुझे गले से लगा लिया। उस वक्त बस एक ही इच्छा हो रही थी की वक्त बस इसी मोड़ पर थोड़ा और ठेहेर जाए। अपने उन छोटे छोटे हाथों से उसने मेरे शरीर को जकड रखा था और मेरी रूह भी मुझे उसे छोड़ने की इजाजत नहीं दे रही थी। ना उसकी लबों से एक शब्द निकला और ना ही मैं कुछ कह सका। बस इस पल को हर लम्हे में जीना चाह रहा था मैं। शब्दों का मेल तो नहीं हुआ मगर जज्बात मिल रहे थे। साँसे मिल रही थीं। वक्त थम गया था। उस एक पल में मैं अपनी पूरी जिंदगी जी रहा था। फिर यह मिलन समारोह ख़त्म हुआ और हम दोनों वहीँ उन हरी हरी घासों में बैठ गए।

वो अपनी जिंदगी की कहानियां सुनाने लगी और मैं उसे देखता रहा। और इस तरह मैं धीरे धीरे उसकी हर कहानी में खोने लगा। अपने अतीत से जुडी हर बात उसने मुझे बताई और मैं उसकी हर बात सुनता गया। बैठे बैठे पता ही नहीं चला की वक्त रफ़्तार पकड़ चूका था। ना वो जाना चाहती थी ना मैं इस लम्हे को छोड़ना चाहता था। वो अपनी बातें सुनाती गयी और मैं उस लम्हे को मुस्कुरा कर जीता गया।

Love

Octombrie. Runda X, vineri 27

Luna asta, vinerea viitoare, 27 Octombrie, sunteti din nou invitati la joaca. Profitam ca putem dormi o ora in plus weekendul acesta.

Ora de incepere este… 68 more words

Game Night

Carpeted: Panic Attack in Public

This post captures real feelings. It tries to convey the physical nature of a panic attack. I have used emotions from the present and blended them with memories from the past. 712 more words

Panic

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At the second meeting, Those present were:
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Ben Gannon – Member of 1% Extravert
Luc Carroll – Member of 1% Extravert… 257 more words

October2017

Prepare for your Audition or Evaulation

Thinking about becoming a New York Actor? Here are some tips on how to make a good first impression.

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Models

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October2017