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मुजरिम...Mujarim...

My take on a very popular gazal by Jagjit ji…Lyricist Danish Aligarhi…” tere shahar ke log”…Loving someone…is it a crime…??? People prosecute without knowing…without understanding…without emotions…mercilessly…

Hindi

ABOUT LOVE...

कुछ तो रूहों का रूहों से राब्ता होता है,
मुलाकातें इत्तेफाकन नहीं होती

इश्क़ में सितारों के फैसले भी शामिल होते हैं,
मोहब्बत यूं ही सबको मयस्सर नहीं होती

Andaze Karam Hai Mere Aqa Ke Nirale, Konain Jo Mange To Kare Uske Hawale

Each time a Mumin looks at Moula, all that he/she hopes and prays for is ‘two seconds’. That’s right. ‘Aik Nazar’..

And here, I have an account to tell. 465 more words

Araz

Teri Mohabbat Ne Mujhe Tadpa Tadpa Ke Waasiq Bana Diya

Teri mohabbat ne mujhe tadpa tadpa ke waasiq bana diya,
Tune iss janwar ko ishq me duba ke insaan bana diya,

Mayuusi chaahti hai toh tujhe sochta hu, 80 more words

LOVE

"ये बरसात और तुम…"

​“ये बरसात और तुम!!”

निकल पड़ते हैं लोग लेकर कर के छतरिया,
यूँ ना निकला करो तुम गीली ज़ुल्फो मे बाहर…
चमक पड़ती हैं कई आंखो मे बिजलीया,
यूँ ना निकला करो तुम गीली ज़ुल्फो मे बाहर…

इन हवा वो की ये ठंडकता
हैं तुम्हारे साँसो की ही शितलता,
बाँधने लगे हैं अब लोग मफलर,
ना निकला करो तुम गीली ज़ुल्फो मे बाहर…

बादलो का ये घनघोर गर्जन,
हैं तुम्हारी ही धड़कन के कारण…
रुक जाते हैं लोगो के दिल उस पहर,
ना निकला करो तुम गीली ज़ुल्फो मे बाहर…

आसमान का ये काला रंग
हैं तुम्हारे ही काजल का संग,
हो जाता हैं अँधेरा भरी दोपहर,
ना निकला करो तुम गीली ज़ुल्फो मे बाहर…

मिट्टी की ये सौन्धी खुश्बु,
हैं तुम्हारी ही महक और आरज़ू…
बहकने लगे हैं लोग बेकदर,
ना निकला करो तुम गीली ज़ुल्फो मे बाहर…

बहता हुआ बारिश का ये पानी,
हैं तुम्हारी ही आंखों की रवानी…
जान दे देते हैं लोग बिन खबर,
ना निकला करो तुम गीली ज़ुल्फो मे बाहर…

लोगो के लिये बरसता पानी हैं बारिश
मुझे आता हैं उसमे तु नज़र…
ना निकला करो तुम गीली ज़ुल्फो मे बाहर…
:)
#SelfRachit

Swarachit

"मेरी शब…मेरी शहर…"

​#SelfRachit

तुम ही जानो हम कैसे हैं
हमे तो खुद की खबर नही ,
जबसे तुमसे मिला हुँ मेरे शब की सहर नही…

वो शाम अब तक याद हैं … 11 more words

Swarachit

"बन्दिशे…"

​#SelfRachit

ज़िंदगी का हर लम्हा सुहाना नही होता,
सफ़र लंबा हो तो ज्यादा आना जाना नही होता…

भीगा दे मुझे अपनी इन गीली ज़ुल्फो से,
सावन मे मुझसे यूँ सुखा रह जाना नही होता…

मत मिला कर मुझसे सबके सामने यूँ,
मेरा तुझसे नज़रे हटाना नही होता…

मत रखा कर ज़मीन पर पाँव अपने,
फूलो का यूँ नीचे आना अच्छा नही होता…

पूछने पर अकेले मे मेरे मुस्कूराने की वजह,
मुझसे तेरा नाम बताना नही होता…

ना आया करो मेरी मेह्फिल मे तुम,
शेर कितना भी अच्छा हो
तेरे सामने सुनाना नही होता…

इक बात कहू?

तुझ पर ही अटक गयी हैं ज़िंदगी मेरी,
तु जब होती हैं ना तो सब कुछ होता है
तु नही होती तो कुछ नही होता…
:)
#SelfRachit

Swarachit