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Dikkat

Aake keh gaya mujhse,kya takleef hai tujhe ?

Bhool ja mujhe, isme kya dikkat ho rahi hai tujhe ?

Mai puchhna chaahti hu ye aaj sabhi se – … 80 more words

Love

जीना चाहु ( Jeena Chahun )

First Song Composed by me,

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http://awesong.in/jeena-chahoon-original-devershi-mehta-tanmay-choubisa-prachi-nagda/

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Lyrics:

मैं तुझको जीना चाहु, 43 more words

Devershimehta

तुमको याद किया हैं मैंने (Tumko Yaad Kiya Hai Maine )

याद करो वो सावन के दिन,

याद करो एक दुझे के बिन,

एक पल नही चला करता था,

मावस हो या पूनम हर दिन,

जीवन नही कटा करता था,

अब इस क्षण विलक्षण तुम बिन,

तुमको बहुत जिया हैं मैंने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

मेरी छोडो अपनी बतलाओ,

कुछ अपना संसार बताओ,

मुझसे अलग  रहकर  तुमने  क्या,

खुद अपना जीवन है  सवारा,

सांझ को मेरे गीत सुने क्या,

आंखों से क्या रुक गई धारा,

फिर भी आगे बढ़े हैं हम तुम,

बिना तुम्हारे व्यथित था ये मन,

इतना समय अब निकल चुका हैं,

रंग दिखाए कैसे रब ने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

मुझको बस इतना बतलाओ,

क्या हैं ये जीवन समझाओ,

अभी भी रातों को जागना,

बिना वजह फिर राह ताकना,

अब भी क्या वो शब्द तुम्हारे,

जिनसे खत थे रोशन सारे,

इतना निकला इतना बिता,

जीवन तुम बिन ऐसे रीता,

हम दोनो में जो होता था,

हर संवाद जीया हैं मैंने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

देख पूराना कागज़ खत का,

आंख मेरी भर आईं  हैं अब,

वही पुराना सपना अपना,

आंखों के घेरो में हैं अब,

उगल सका ना निगल सका में,

सृष्टि का था खेल अनोखा,

मानो एक दिन में लिख डाला,

मेरे जीवन का लेखा जोखा,

तेरे तन पर मन दर्पण पर,

कुछ आघात किया क्या मैंने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया हैं मैंने।

कुछ तो जीवन का सार मिले अब,

जीने का आधार मिले अब,

सहते सहते थका बढ़ा हूँ,

खुशियो का संसार मिले अब,

झझोड़े है मुझको अब तो,

मेरे मन की उन्मुक्त वेदना,

मालूम मुझको तो सब पड़ता है,

पर ना चाहे अब मन ये समझना,

जीना तो तुम बिन भी चाहा,

पर पक्षघात किया हैं रब ने,

जीवन के हर पल हर क्षण में,

तुमको याद किया है मैंने।

© देवर्षि मेहता “जुगनू”

Devershimehta

तुझसे मोहब्बत हो गई

जिस तरह रब की इबादत हो गई,

उस तरह तुझसे मोहब्बत हो गई।

इश्क़ मेरा एक तरफ़ा न रहा,

मैं दीवाना तू दीवानी हो गई।

Devershimehta

Main jis tarah ke bhi khwaab likhun – Mohsin Naqvi (میں جس طرح کے بھی خواب لکھوں - محسن نقوی)

​میں آڑھے ترچھے خیال سوچوں

کہ بے ارادہ ۔ ۔ ۔ کتاب لکھوں؟

کوئی ۔ ۔ ۔ شناسا غزل تراشوں

کہ اجنبی ۔ ۔ ۔ انتساب لکھوں ؟

Poetry

#29 Shayari

नफरत नहीं,बस मोहब्बत उससे ज्यादा है,
इसलिए आज भी पूछ लिया,
वो खैरियत से तो हैं ना वहां.

Hindi/Urdu Poetry