Tags » Molest

Oh, come on, Annie Lane. You can do better than that!

Dear Annie: We have some new neighbors, and our backyards are adjoining. We enjoy sitting out on our deck on nice evenings and enjoying the weather with a drink and snack.

761 more words

Man arrested for molest on Dhoby Ghaut-Raffles Place train

(Source: www.channelnewsasia.com)

SINGAPORE: A man was arrested for molesting a woman on a train during Monday morning rush hour, police said on Tuesday (Jul 11). 62 more words

Current Affairs

Skittish and Untamed

“Bang”, I heard the front door.  Getting up I heard Harold say “Charlie you need, ‘Bang” (softer) to repent.” By now, I was flying. “Bang” went the front door a third time. 409 more words

Douglas's Weekly Blog

Accusation / molest

My life from the very childhood has been quite hard especially living with really strict parents that control you without any boundaries , and deny you of many things is not quite a unique story to tell. 1,472 more words

Life

Escapade bursts

Been having more nightmares recently. The types that linger even though you’re dog tired daily and forget important details of your everyday waking life regularly. 144 more words

Writing

Day After Day As A Woman

Day after day, year after year;
More am I molested as more do I wear.

They say we are developing, they say we are growing. 73 more words

Poem

पुरुष

बस रोज़ की तरह खचाखच भरी थी. एक लड़के ने जो वास्तव में पुरुष था अपनी सीट नहीं छोड़ी बल्कि खूब सिमट कर उसके लिये एक सीट बनाई. वह बैठ गयी. बस चली ही थी कि लड़के की जाँघ का दबाव उसे महसूस हुआ. लड़के की उम्र लगभग उसके बेटे की जितनी थी. बस की गति के साथ यह पुरुषनुमा लड़का उसकी ओर ढलने लगा. उसने अपना ध्यान हटाने की कोशिश की.
बस में केवल तीन औरतें और थी. उंनके साथ के पुरुषों ने उन तीनों को अपने हाथों और देह की दीवार में सुरक्षित किया हुआ था. उन तक केवल बहुत सी आँखें पहुँच रही थी. उसे अचानक औरत कि बहुमूल्यता का एह्सास हुआ तो उसने अपने पैर की सहमी हुई मासंपेशी को ढीला कर पुरुषनुमा लड़के की लंपटता के लिए छोड़ दिया.
वह रोज़ के अपने सफर में इस से कहीं ज़्यादा देख चुकी थी- अपने ऊपर ढहता हुआ आदमी, अपने वक्ष में चुभती हुई मर्दाना कुहनी, और इस से भी कहीं ज्यादा. उसे अचानक उस बस में आड़े टेढ़े बैठे खड़े सभी पुरुषों पर तरस आ गया. पुरुषनुमा लड़के पर भी. अपने पुरुष बन रहे बेटे पर भी. ख़ास तौर से अपने पति पर, जो घर पहुँचते ही उस से, क्या रहा, कैसा रहा, जैसे कुछ सवाल पूछेगा, इस मक़सद से कि किसी पुरूष से तो मुलाकात नहीं हुई थी.
वह बस से उतरी तो उसके चेहरे पर हँसी जैसा कुछ था,जो हँसी नहीं थी.

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