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Flatliners (Self-Forgiveness)

Dying for a minute or two? Seeing the world of the afterlife? Coming back to life with improved cognition? Who doesn’t want that? I bet everybody would at least want to try it right? 240 more words

Flatliners

Royal Commission’s work needs careful policy making

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THE release of the

Bill Shorten

Judge temporarily blocks new Trump rules on birth control

(Source: sg.news.yahoo.com)

FILE – In this July 24, 2017, file photo, President Donald Trump speaks about healthcare in the Blue Room of the White House in Washington. 561 more words

Current Affairs

Daily Prompt: Meager "Stone Soup"

via Daily Prompt: Meager

   

Have you ever heard of the story; “Stone Soup?”   Well, there are different versions of the tale, but they all share something pure and heartwarming.  690 more words

Thought for today.

The greatest discovery of all time is that a person can change his future by merely changing his attitude.

Good morning.

#TwinMercury

Have a Very Merry Neitzschmas!

Reading Questions

  1. (Pref., §5) In what respect does Nietzsche disagree with Schopenhauer?

Nietzsche disagrees with his great teacher on a notion of morality. He reads Schopenhauer as having dealt too drastically with the “unegoistic”: instincts of compassion, self-sacrifice, and denial. 558 more words

A moral story : डर के आगे जीत है

एक गुंडा शेविंग और
हेयर कटिंग कराने के लिये
सैलून में गया.
,
नाई से बोला -”अगर मेरी
शेविंग ठीक से से बिना कटे
छंटे की तो मुहमाँगा दाम
दूँगा !
अगर कहीं भी कट गया तो
गर्दन उड़ा दूंगा !”
नाई ने डर के मारे मना कर दिया
,
गुंडा शहर के दूसरे नाइयों के पास गया और वही बात कही.
लेकिन सभी नाईयो ने डर के
मारे मना कर दिया.
.
अंत में वो गुंडा एक गाँव के
नाई के पास पहुँचा.
वह काफी कम उम्र का लड़का था.
उसने कहा – “ठीक है,
बैठो मैं बनाता हूँ”.
.
उस लड़के ने काफी बढ़िया
तरीके से गुंडे की शेविंग
और हेयर कटिंग कर दी.
गुंडे ने खुश होकर लड़के
को दस हजार रूपये दिए.
और पूछा – “तुझे अपनी
जान जाने का डर नहीं था क्या ?”
.
लड़के ने कहा – “डर ? डर
कैसा…?
पहल तो मेरे हाथ में थी…”.
.
गुंडे ने कहा – “‘पहल तुम्हारे हाथ में थी’ .. मैं मतलब नहीँ
समझा ?”
.
लड़के ने हँसते हुये कहा –:
“भाईसाहब, उस्तरा तो मेरे
हाथ में था…
अगर आपको खरोंच भी
लगती तो आपकी गर्दन
तुरंत काट देता !!!”
बेचारा गुंडा ! यह जवाब
सुनकर पसीने से लथपथ हो
गया।
.
Moral : जिन्दगी के हर मोड पर खतरो से खेलना पडता है नही खेलोगे तो कुछ नही कर पाओगे
यानि
डर के आगे ही जीत है…
बेच सको तो बेच के दिखाओ
अपने अहंकार (Ego) को
OLX पर.,
एक रुपया भी नहीं मिलेगा !!
..
तभी पता चलेगा कि क्या फालतु चीज पकड रखी थी अब तक…!

Moral