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Fasaana ho gaya...फ़साना  हो  गया...

Jal rahey hain khet, phunk raha hai eendhan

Ki aasmaan dekhey ik zamaana ho gaya

Humney to kahi  zaraa si baat

Aur pal bhar mein fasaana ho gaya… 97 more words

Poetry

रेहमत माँ बहनों की

अंदाज़ अपना औरों से जुदा रखता हुँ।
कहता हुँ जो सच है, मैं बस “माँ” और “खुदा” लिखता हुँ।

मेरी प्यारी माँ और बहनों के लिए कुछ छोटा सा लिख पाया हुँ। इसे पढ़ते हुए आपके जेहन में उनका ख्याल आये तो बताइयेगा।

जो खुश मैं तुम्हे, सुबहो-शाम दिखता हुँ।
करम है “माँ” का, जिसे पहला सलाम लिखता हुँ।।
निशाँ है मेरे नाम का, जो आसमान छूता,
पैरों में बहनों के सर मेरा, मेरी जान उन्हीके नाम लिखता हुँ।।

मैं भी हुँ तब तक ही, वो जब तक साथ हैं मेरे,
खुदा को उनकी मैं, सलामती का पयाम लिखता हुँ।।

मेरे हिस्से को रखती हैं खुशियां, और, दुःख अपने लिए,
ख़ुशी उनके दामन में लो अब तमाम लिखता हूँ।।

सुहास वैश्विक

Wow...What a Line ?!

It’s Friday night and in a slinky black dress and heels too high, for anything other than considered steps, I head up to the private function room of the Aagrah restaurant in Bradford. 952 more words