Tags » News Channels

Autism Life News | February Edition

Autism Life News is a monthly round up of the good news and achievements that has happened in the world and autism diagnosis. From the last month… 451 more words

Autism Life

Dear Opinion

I’m feeling very confused with so much of you floating in the airwaves around me.

My evening tv time is assailed by multiple Points of View at volumes that threaten my sanity. 297 more words

Tongue In Cheek

‘Rotten from the top’

Prelude

“Living subserviently with injustice is probably just as wrong as actually doing it; but speaking up against injustice becomes much tougher when it requires one to deal with people who do not show the slightest trace of sensitivity or compassion”- These lines, quoted by columnist Lata Jha in one of her 2013 columns pointed towards the media reportage on various issues. 1,310 more words

Opinion

Sensationalism kills Journalism

We all have developed a habit to read newspaper or e-newspaper on our high-tech smartphones early in the morning sipping our cup of tea. Apart from that, Periodicals help in polishing our language skills and increases our confidence to speak but did we realize that it is at the cost of feeding our mind with garbage of negativity that holds the potential to make one feel low the entire day. 1,243 more words

Blog

हम मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ क्यों मानें*

अमेरिका के वांशिगटन डीसी में 24-25 सितंबर को एक से तीन लाख के बीच की तादाद में नागरिकों ने इराक पर हमले के खिलाफ प्रदर्शन किया लेकिन वहां के चैनलों ने इसे महत्व नहीं दिया। एन बी सी ने मात्र 87 शब्दों में इसे निपटा दिया तो सीएनएन ने चलते चलते इसकी जानकारी भर दी। पूरी खबर नहीं देने के पीछे उसने जो वजह बताई वह उसका “राष्ट्र प्रेम” था। उसने बताया कि देश के एक हिस्से न्यू अर्लियंस में कैटरिना से भारी तबाही से जुड़ी खबरें ज्यादा महत्वपूर्ण है। राष्ट्रप्रेम से खेलना सीखना चाहें तो उसमें मीडिया से ज्यादा कोई माहिर नहीं है। एक तरफ तो राष्ट्रप्रेम की आड़ में विरोध के स्वर को दबाना होता है तो दूसरी तरफ कैटरिना से तबाह लोगों के प्रति बुश प्रशासन की उपेक्षा को अमेरिकी मीडिया भरपूर तरीके से ढकने की कोशिश करता है। चैनलों के नौकरीपेशा पत्रकार पीडितों से पूछते हैं कि क्या आपको पता है कि आपके साथ जानवरों जैसा व्यवहार क्यों हो रहा है। न्यू अर्लियंस में अमेरिकी ही रहते है लेकिन वे गरीब है। ग्रामीण है। काले हैं। अमेरिका अमीरी को सर्वोपरि मानता है। मीडिया उसके इस स्वभाव का कायल है। यही नहीं जनतांत्रिक विरोध के सामने राष्ट्रवाद को खड़ा करता है लेकिन मीडिया अपने सारे कमाऊ कार्यक्रम पूर्ववत जारी रखता है। पॉल जै ने फ्रंट लाइन में अपनी टिप्पणी में  दर्ज किया है कि सभी अमेरिकी टेलीविजन नेटवर्क और सभी गैर समाचार केबल चैनलों पर मनोरंजन के कार्यक्रमों पर कैटरिना और उससे तबाही का कोई असर नहीं पड़ा। 6 more words

Democracy

Eggs it is polls!

Afternoon on Sunday exactly a week ago in India, suddenly eggs went into short supply mode. Didn’t they all land up on the faces of psephologists and many pollster turned anchors in… 926 more words

India