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Cricket

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ODI

Bangladesh outplayed India

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Sports

कहीं राजनीति से तो नहीं हार रहे हैं धोनी?

BY शशांक शेखर

क्रिकेट में या यूँ कहे खेल के मैदान में खेल का मैदान ही क्यों? हर जगह. किस्मत कभी इतनी धनी नहीं होती जितनी रांची से निकले और दुनिया भर में मशहूर हुए महेंद्र सिंह धोनी की रही है.

किस्मत की बात इसलिए क्योंकि एक किताबी क्रिकेटर की तरह धोनी कभी नहीं खेले. हर जगह उन्होंने बाजी लगयी और बड़े मंचों पर कामयाबी मिली. लेकिन हर कामयाबी की एक हार जरूर होती है और वो धोनी को बांग्लादेश में मिली है. 3 मैचों की सीरीज में 2 मैच वो हार गए. हारी तो टीम है लेकिन इस बार धोनी खुद हारे हैं और इस हार का दर्द साफ़ देखने को मिला था धोनी के चेहरे पर मैच के बाद.

लेकिन क्या ये सिर्फ धोनी की हार है? क्यों ये हार टीम के डायरेक्टर और अगले संभावित कोच रवि शास्त्री और ‘प्रेम पुजारी’ कप्तान विराट कोहली की नहीं है? दो दो दोहरे शतक लगा चुके रोहित शर्मा की नहीं है? मूछों पर ताव देने वाले शिखर धवन की नहीं है ?

क्या धोनी के इस हाल के पीछे कोई कहानी रची जा रही है ? अब कहाँ है बीसीसीआई के अधिकारी? कहाँ हैं टीम की बड़े अधिकारी जो धोनी को सब कुछ मानते थे? इस शर्मनाक हार का गम धोनी के ऊपर इतना था कि वो टीम की कप्तानी छोड़ कर एक खिलाडी की तरह खेलते रहने की इक्षा सार्वजनिक कर गए.

लेकिन सवाल ये उठता है कि अभी अगर धोनी टीम की कप्तानी छोड़ते भी हैं तो उनके बाद टीम को कौन आगे ले जायेगा? क्या विराट कोहली अभी उस लायक हैं? विश्व कप के पहले मैच के बाद उनके बल्ले से क्या आया है? अगर वो टीम के उपकप्तान हैं तो अब तक मैदान पर धोनी को कितना सहयोग कर रहे थे? क्यों धोनी को पहले मैच के बाद रवि शास्त्री से कहना पड़ा कि कोहली मैदान पर एक्टिव रहें ?

जिस तरह से मैदान पर धोनी का हाल हुआ है(टीम का नहीं) उसके पीछे किसी तरह की राजनीति तो नहीं है? जगमोहन डालमिया और धोनी के रिश्ते वैसे नहीं हैं जैसे धोनी के श्रीनिवासन के साथ थे. दूसरी तरफ रवि शास्त्री भी धोनी से ज्यादा कोहली के पीछे रहते हैं. आने वाले कोच के लिए कोहली ने रवि शास्त्री का नाम सुझाया था.

कोहली को अगर कप्तानी देने की बात होती तो उसके लिए धोनी और टीम को हारने की ही जरुरत थी. वो काम बांग्लादेश में हो
गया है. पूरी टीम ने शर्मनाक खेल दिखाया है तो इसका खामियाज़ा धोनी क्यों उठाये? कोहली एक अच्छे बल्लेबाज हैं लोग उन्हें सचिन की तरह मानते हैं. लेकिन सचिन अपनी जिम्मेदारी समझते थे. कोहली को भी समझना होगा.

दूसरी तरफ हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि धोनी ने देश को क्रिकेट में क्या दिया है. हर जगह धोनी ने कामयाबी के झंडे गाड़े हैं. हार जीत खेल का नियम है. ये हो गया अब यहाँ से आगे बढ़ना है. धोनी के ही शब्दों में कहे तो दुनिया खत्म नहीं हुई अभी. धोनी देश के सबसे बड़े कप्तान हैं और उन्हें बीसीसीआई से एक बेहतर विदाई की उम्मीद होगी. अगर राजनीति नहीं हुई तो…

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Cricket

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