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A Man Called Ove -- A Wonderful Swedish Novel

I loved everything about A Man Called Ove, a wonderful novel by the Swedish writer Fredrik Backman.  Ove is an elderly man struggling with grief.  Ove is his own greatest enemy.   80 more words



There is nothing like the beauty of a good storm. I was actually hoping for one today. I watched in anticipation as the clouds began to over take the sky. 138 more words

Forever in faded blue jeans

Someday when I’m old
I’ll be the only one
Who remembers you young and beautiful
Your dark hair falling on that pillowcase
All the lovers’ secrets we shared, 502 more words


Mid Life Crisis

Middle age is when you first suspect your body of betrayal..

Middle age is when everyone else suddenly becomes younger.

Middle age is when you refuse a senior discount because you’re not old enough. 224 more words


Withered Petals

Withered Petals have a strange fascination, don’t they? Several years ago, I had written a poem with the same name, “The Withered Petals.”

Read it by clicking here… 13 more words

तीन लफ़्ज़ काफ़ी है

तीन लफ़्ज़ काफ़ी है

जब मेरी डोली दरवाज़े पर सज जाए
जब मेरे पापा की चिरेया अँगना छोड़ उड़ जाए
जब मेरी माँ के आँसू सारे बन्धन तोड़ बह जाए
जब तेरी बहन तुझे अपना मयका सौंप चली जाए
तब भैया सबको समझाकर यह कहना” मैं हूँ ना”

जब वो काँपते हाथ पानी का गिलास ना उठा सके
जब वो लड़खड़ाते पैर कपड़े सुखाने सीढ़ियाँ ना चढ़ सके
जब वो झुकी कमर तेरे साथ तेज़ ना चल सके
जब वो धुँधलाती नज़र खाने में पड़ा कंकर ना देख सके
तब भैया मेरी उस माँ से कहना” मैं हूँ ना”

जब वो झुके कंधे अपना सामान ख़ुद ना उठा सके
जब वो बूढ़ा शरीर बाहर जाकर दो पैसे ना कमा सके
जब वो जड़ो से हिलते दाँत बिना दाल रोटी ना चबा सके
जब वो पुरानी काया तेरी नई तकनीक ना सीख सके
तब भैया मेरे उन पापा से कहना” मैं हूँ ना”

और अगर तू ये सब ना कह सके तो ये याद रखना
ये वही माँ है जो तेरे लिए रात रात भर जागी है
ये वही पिता है जिसने तेरी पढ़ाई के लिए ना जाने किस किस के आगे झोली फैलाई है
ये वही माँ है जिसने कभी तुखे खिलाए बिना खाना नहीं खाया
ये वही पिता है जिसने हर त्योहार तुझे तोहफ़ा दिलाया
ये वही माँ है जो तेरे लिए संसार से लड़ी
ये वही पिता है जिसने तेरे ख़िलाफ़ उठी एक आवाज़ भी नहीं सही
दो वाक्यों में कहु तो
ये वो है जिनसे हम है
जिनके बिना तेरा मेरा वजूद ख़त्म है।
रिया शर्मा

Biographical pain - Luke 2:22-40

I was invited to a conference on old age recently and I met Simeon and Anna there.

Because of my immersion in Luke’s gospel I was already thinking about the excluded and those without power and the discussion that day helped me realise that there is probably no group in our society that fits this description better than the elderly. 851 more words