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An overloaded bus with multiple cartons of goods spotted on Lagos road (Photos)

An Overloaded bus with multiple cartons of goods was
spotted yesterday at around 7:30 pm on Ogudu Alapere
road.

According to an eyewitness, the driver drove past a team… 36 more words

NEWS

Support A Steady Yoga Practice: Is This Too Much?

Remember the most essential aspect of healthy yoga is going inward and growing more mindful with each breath. Let us not get distracted by “getting better” at yoga with our drive to achieve more. 260 more words

Yoga Practice

NTs Have Meltdowns and Feel Overwhelmed or Overloaded Too

As a woman who has autism/Asperger syndrome I experience meltdowns and get overwhelmed from time to time. The same thing applies to neurotypicals/NTs (people who don’t have autism). 685 more words

Autism And Asperger Syndrome

अभी हारा तो नहीं

मैं था कोई झरना बहता सा,
आज रुकी एक झील हूँ।
थका सा हूँ फिर चलूँगा ज़रूर,
चलना तो फ़ितरत है मेरी,
मैं क़दम नहीं मैं मील हूँ।
ज़रूरत नहीं ना अपने लिए,
चलता हूँ बस अपनों के लिए,
चलता हूँ उनके सपनों के लिए,
चलता हूँ लेकिन हूँ मैं आवारा नहीं,
आज गिरा ही तो हूँ ज़रा सा,
मैं अभी हारा नहीं।

देखा इस सफ़र में हर तरह के लोगों को,
कुछ दुखों के साथ भी बड़ी शान से हैं रहते,
कुछ ख़ुशियों के अभाव में ख़ुद की ही जान हैं लेते।
कुछ कह देते हैं अक्सर तो कुछ चुप होकर हैं सहते,
कुछ पी जाते हैं दुःख तो कुछ के आँसू हैं बहते।
इन दोनों कुछ में कुछ आम सा है,
ये दुःख ही तो है जो काम का है,
सुख तो बस यूँ ही है, नाम का है।
सुख तो आता है चला जाता है,
दुःख तो बस आता है,
और हमेशा के लिए घर कर जाता है।
पर ख़ुशियों का इंतज़ार नहीं है,
मुझसे हैं मेरी ख़ुशियाँ,
मैं ख़ुशियों के द्वारा नहीं।
आज गिरा ही तो हूँ ज़रा सा,
मैं अभी हारा नहीं।

ये प्यार यूँ तो सदा नहीं होता,
मिला किसी को पूरा तो किसी को आधा,
किसी को हमसफ़र मिला तो किसी को बादा।
पर साथ छोड़ते नहीं देखा किसी को दोनों का,
तो कैसे कह दूँ किसका प्यार है ज़्यादा।
चेहरे तो अक्सर दुनिया में सबके हैं दो होते,
मैंने पत्थर हैं देखे पिघलते,
और मोम से हैं देखे लोग जलते।
यक़ीन हो तो किस पर?
मैंने देखा है अपनों को अपने निगलते।
कोई समंदर में फ़ँसा किनारे तक का साथ माँगता है,
आज कल कोई किसी से एक दिन तो कोई एक रात माँगता है।
पर ये साथ वक़्त के साथ नहीं रहता साथ,
इसीलिए हूँ मैं ज़िंदगी भर का साथ,
मैं कोई सहारा नहीं।
उठूँगा फिर मैं, क्या हुआ जो आज,
ये वक़्त हमारा नहीं।
क्या हुआ जो आज,
इसे मैं गवारा नहीं।
चल सकता हूँ अभी तुम्हारी कल्पनाओं से ज़्यादा,
तो क्या हुआ जो आज,
मंज़िल का पास नज़ारा नहीं।
आज गिरा ही तो हूँ ज़रा सा,
मैं अभी हारा नहीं।

Vishal Gaur

Poetry