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सबसे सस्ता काम है किसी लिखने वाले को दलाल कह देना

एक टीवी जर्नलिस्ट का ट्विटर पढ़ रहा था, बड़े पत्रकार हैं एक बड़े मीडिया हाउस के । पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी एक चिट्ठी का जिक्र था जिसमें उन्होंने मोदी से कई मुद्दों पर इत्तेफ़ाक़ न रखने की बात कही । पोस्ट लिखे और ट्विटर पर पब्लिश होने के कुछ ही घंटो के भीतर कई राजनीतिक रूचि वाले लोगों की जमात जुट गयी और टीवी जर्नलिस्ट साहब की सरकार विरोधी बातों पर लानत की जाने लगी । आपिये हो तुम, अम्मा के चमचे हो, जीजा के बारे में कुछ क्यों नहीं बोलते और ना जाने क्या क्या । जर्नलिस्ट साहब को निजी तौर पर जानता था, कुछ दिन बाद मिले तो ये बात उठ गयी । मैंने भी माना कि राजनीतिक समर्थन और विरोध की आड़ में हर जगह भाषा की मर्यादा खत्म हो गयी है । किसी के किसी भी वजह से किसी के साथ होने या न होने का मतलब यह नहीं होता कि वह दलाल है ।

Aap

मुद्दा राधे-माँ, नीशाना संत समाज!

“राधे-माँ” एक बकवास हैं जीसे पैसों ने भक्ती का चोंगा पहनाया व अन्य पुँजीपतीयों ने या तो अपनी मुर्खता से या स्वयं के स्वार्थ के लिये सिर बैठाया| 8 more words

Society

How to Gauge the ROI of Your Paid Traffic Channels

This post originally appeared in Outbrain’s blog on March 19, 2012. Since it’s still relevant in the context of today’s changing media landscape, I thought I’d repost it here now. 710 more words

Social Media

मिडीया जगत में बडा बदलाव

सुदर्शन न्युज के साथ अब जीन्युज भी राष्ट्रहीत की राहपर

#ZeeNews पर #DNA में सुधीर चोधरी एक बडी मुहीम चला रहे हैं जीसके अंतर्गत मिडीया इंडस्ट्री में जितने भी भांड पत्रकार व भांड मिडीया चेनल हैं उनको बेनकाब करना शुरू किया हैं| 29 more words

Society

Instagram's Total Ad Sales Projected

Instagram’s the bomb
Ad sales in five hundred mill
Projected to rise

Instagram

Shops Built Into Pages

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Oh that looks pretty nifty
I think I shall buy

Paid Media