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पाकिस्तान समुंदर-ए-कुफ्र में एक रोशन जज़ीरा है!

यहां के लोग कुदरत की तमाम नेअमतों से अरास्ता हैं। खूबसूरत झीलें, खुले मैदान, धूल, मिट्टी, शोर-ओ-गुल, सब कसरत से पाए जाते हैं। कोयला इतना है कि जब दुनिया के ज़खीरे खत्म हो जाएंगे, तो तब भी मुमलिकत-ए-खुदादाद में चूल्हे जलते रहेंगे, गाड़ियां चलती रहेंगी, कारख़ानों में रोज़गार होगा, बिजली होगी, खुशहाली होगी। अभी क्यूंकि दुनिया के ज़खीरे खत्म नहीं हुए, इसलिए ये चीज़ें यहां मौजूद नहीं। 103 more words

The Feminist

GUEST Post by Arvind Passey

Three hundred and seventy-seven pages of perceptive brilliance cannot be easily handled by all writers. Well, most readers too would stumble and fall in their inability to get a firm hold on all the nuances that the pages overturn on you mercilessly. 1,921 more words

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