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Download: Microsoft’s Parchi Is A Beautiful Note-Taking App For Android

While many keep complaining about the lack of apps in Microsoft’s Windows Phone (soon to be Windows 10) eco-system, the company strangely keeps coming up with some brilliant apps for other mobile platforms like iOS and Android; and the new Parchi app is one of them. 259 more words

Latest IT News

Giardinaggio

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Agraria Pangallo 
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19038 Sarzana, SP – Italy
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Agraria Pangallo

Incontri creativi e stimolanti - in Val di Cornia

Incontri creativi e stimolanti –  si parla di scambi culturali fotografici tra la Toscana e la Ruhr e del patrimonio storico e naturalistico della città di Piombino e della Val di Cornia, convinti che networking e scambi di esperienze sono una risorsa irrinunciabile per lo sviluppo. 35 more words

Giornata dei Parchi Letterari - 18 ottobre 2015

Giornata dei Parchi letterari 2015 in Toscana
Domenica 18 ottobre si svolgerà la prima edizione della giornata mondiale dei Parchi Letterari. Spettacoli, letture, percorsi naturalistici, itinerari gastronomici ed eventi gratuiti anche in Toscana.“ 17 more words

Eventi Toscana Natura

पर्ची

परचून की दुकान से समान लाना था|
चूँकि,  याद्दाश्तपर भरोसा हमेशा नहीं किया जा सकता, सोचा की उसे मात देने के लिए एक पर्ची बना लूँ|
२ दर्जन अंडे, १ किलो दूध, ३ पॅकेट बिस्कुट..मैं लिखती गयी|
क्यूँकी पन्ने और स्याही पर हमेशा भरोसा किया जा सकता है, उनसे राहत का एक रिश्ता बन गया
और मैं बिना किसी हिचकिचाहट किसी और दुनिया में पोहोच गयी|
लिखते लिखते जी हुआ की १ पाव प्यार भी मॅंगा लूँ|
५ किलो ज़ज़्बा और ३ कीलो हिम्मत|
इतनी कीमती ज़रूरतें, दुकानो पर नहीं बिकती, बड़ी अजीबो ग़रीब बात है| इन चीज़ों की भ्रपूर माँग भी है, तो फिर इनकी आपूर्ति क्यूँ नहीं होती?

सब कुछ धड़ल्ले से बिक रहा है| फिर ऐसा क्या है जो हमें इनकी बिक्री करने से रोक रहा है?
मुनाफ़ा भी बड़ा अच्छा होगा| आटे चीनी की तरह, समय समय पर ये भी ख़तम हो जातें हैं|

किसी दुकान पर मिलती हो, जिसका पता मालूम हो; रास्ता आसान हो, तो कितनी सहूलियत हो जाए|

‘बुरी’ चीज़ें फिर भी हर शहर की किसी गंदी, अकेली, अंधेरी गली में बिकती  हैं|
हर प्रकार की दवा और दारू|

‘अच्छी’ चीज़ें पता नहीं क्यूँ, भारी माँग के बावजूद, बेची नहीं जाती|

ढाबों में केवल खाना क्यूँ मिलता है?
एक कोठे की दीवरों के भीतर सिर्फ़ एक ही तरह की प्यास ही क्यूँ बेची जाती हैं?
बाकी भूखे प्यासे कहाँ जायें?

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