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विचार श्रृंखला - 28

लोकतंत्र और चुनाव परिणाम

देश भर में लगभग डेढ़ माह तक चले चुनावी अभियानों के बाद कल 17 वीं लोकसभा के लिए जनादेश की घोषणा कर दी गई जिसमें भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को प्रचंड बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी का अवसर मिला। ऐसा भारत के इतिहास में पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के बाद सिर्फ तीसरी बार हुआ है जब किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत के साथ लगातार दूसरी बार सरकार का नेतृत्व करने का अवसर प्राप्त हुआ है। इस बार के चुनाव में जनता ने कई प्रकार के मिथक तोड़े हैं और क्षेत्रीय क्षत्रपों के साथ साथ कांग्रेस को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। इसके अलावा विजेता गठबंधन के लिए एक बार फिर कर्नाटक और कुछ हद तक तेलंगाना को छोड़कर दक्षिण का दुर्ग दुष्कर ही साबित हुआ है। हालांकि पश्चिम बंगाल और ओडिशा के नतीजों ने भाजपा को लोकसभा में पहले से भी बेहतर स्थान प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा भाजपा ममता और पटनायक का दुर्ग दर्काने में सफल रही। भाजपा को अकेले 303 सीटें मिलना और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का एक बार फिर “सदन में विपक्ष के नेता” पद की योग्यता हासिल न कर पाना राजनीति के पंडितों को बहुत कुछ सीखने और समझने के लिए दे गया। अनेक स्थानों पर जाति और धर्म की दीवार ढह गई लेकिन कुछ सीटें ऐसी भी रहीं जहां जातिवाद और धर्म की राजनीति विकास के वास्तविक रहनुमाओं पर भारी पड़ गई और वे अपनी सीट बचाने में नाकाम रहे। यह चुनाव देश की जनता को एक तरफ सबसे ज्यादा कंफ्यूज करने वाला रहा तो दूसरी तरफ विपक्ष की लगातार गलतियों ने उसे फैसला लेने में काफी मदद की। इस चुनाव में विपक्ष की रणनीति बिना किसी जमीनी मुद्दे के सिर्फ एक व्यक्ति को सत्ता दूर रखने पर केन्द्रित रही वहीं दूसरी तरफ एनडीए जनता में अपना विश्वास कायम रखने में सफल रही। राष्ट्रवाद और लोकहित के मुद्दे पर विपक्ष का रुख उसके लिए आत्मघाती सिद्ध हुआ और भाजपा यह विश्वास दिलाने में सफल रही कि इन मुद्दों पर जनता का उनसे योग्य कोई अन्य रहनुमा नहीं है। बालाकोट और सर्जिकल स्ट्राइक पर विपक्ष के नकारात्मक रुख ने भी एनडीए को भरपूर फायदा पहुंचाया। इस चुनाव में राजनीतिक भाषा का स्तर अपने निम्नतम स्तर पर था और खुले मंच से गाली गलौज से भी परहेज नहीं किया गया। पश्चिम बंगाल में लगातार चल रहे चुनावी हिंसा का दौर इस बार भी कायम रहा जो वास्तव में अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। लोकतांत्रिक देश में संविधान की बात करने वाले जब संवैधानिक अधिकारों के हनन पर उतारू हो जाएं तो जनता को उसका जवाब देना अच्छी तरह से आता है और शायद यही काम पश्चिम बंगाल की जनता ने कर दिखाया। 89 more words

#albela

Narendra Modi, 15th Prime Minister of India

WELCOMING BACK 

“Honorable Prime Minister of  India – Narendra Modi”

Narendra Damodardas Modi better known as Narendra Modi, is the 15th Prime Minister of India… 288 more words

Indian History

Thailand's parliament meets, but military retains upper-hand

Elections took place on March 24 under a complicated new system that empowered small parties – and the military.

Bangkok, Thailand – Thailand’s newly-elected parliament sits for the first time on Friday, as pro-military and pro-democracy parties manoeuvre for power two months after… 1,021 more words

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Australia's new parliament is no more multicultural than the last one

Dramatic contrast with Canadian numbers: 56 foreign-born (44 MPs, 12 Senators, 2017), and currently 48 MPs who are visible minority:

Politicians often say Australia is the most successful multicultural country in the world – but it would seem the country’s growing diversity is failing to make its mark in the corridors of power.

680 more words
Multiculturalism

May He Rule from Sea to Sea

Reading: Psalm 72
Of Solomon
(Verses 1-11)
Endow the king with your justice, O God,
the royal son with your righteousness.
May he judge your people in righteousness,
434 more words

Psalms

Let’s get ‘Drastic on Plastic’

Friends of the Earth’s position is that recycling is not the answer, depending on the type, plastics can generally only be recycled a few times, and some types not at all. 248 more words

Article

Mallard sparks chaos and consternation, alleged Parliament predator stood down

Yesterday morning the Speaker Trevor Mallard sparked consternation when he said that the Francis report suggested there was a sexual predator in Parliament. There was widespread reaction in media, and behind the scenes party leaders Jacinda Ardern and Simon Bridges met with each other and with the Speaker. 1,096 more words

Jacinda Ardern