Tags » Philosophical Poems

In the Wake

Time brought us here
To the morning of your first steps
To the places where the change happened
To your arms around his neck
Time brought us here… 82 more words

KD DeFehr

'IF...' - For Pete

So, recently, I was at a wonderful play in West London and at the after party I was introduced to a charming, intelligent, thoughtful man called Pete. 666 more words

All Poems

Live what YOU like about yourself, irrespective

7th Oct 2013 – 3:45 AM – Imperial Castle 205

People are the same wherever you go

Irrespective of their cultures, Irrespective of their creed, Irrespective of their religion, Irrespective of their color… 115 more words

Poems

Ascent

Resplendent in regal white,
Notwithstanding
the inconsolable tears
Of those near and dear-
She took to the skies,
Beginning the ultimate flight-
That was but destined… 78 more words

Poetry

कहते हैं तारे गाते हैं !

सन्नाटा वसुधा पर छाया,
नभ में हमने कान लगाया,
फिर भी अगणित कंठों का
यह राग नहीं हम सुन पाते हैं !
कहते हैं तारे गाते हैं !

स्वर्ग सुना करता यह गाना,
पृथ्वी ने तो बस यह जाना,
अगणित ओस कणों में
तारों के नीरव आँसू आते हैं !
कहते हैं तारे गाते हैं !

ऊपर देव तले मानवगण,
नभ में दोनों गायन-रोदन,
राग सदा ऊपर को उठता
आँसू नीचे झर जाते हैं !
कहते हैं तारे गाते हैं !

हरिवंश राय बच्चन

Harivansh Rai Bachchan

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !

हो जाय न पथ में रात कहीं,

मंज़िल भी तो है दूर नहीं-

यह सोच थका दिन का पंथी भी

जल्दी-जल्दी चलता है !

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। 6 more words

Harivansh Rai Bachchan

साथी, सब कुछ सहना होगा !

मानव पर जगती का शासन,
जगती पर संसृति का बंधन,
संसृति को भी और किसी के
प्रतिबंधों में रहना होगा !
साथी, सब कुछ सहना होगा !

हम क्या हैं जगती के सर में !
जगती क्या, संसृति सागर में !
एक प्रबल धारा में हमको
लघु तिनके-सा बहना होगा !
साथी, सब कुछ सहना होगा !

आओ, अपनी लघुता जानें,
अपनी निर्बलता पहचानें,
जैसे जग रहता आया है
उसी तरह से रहना होगा !
साथी, सब कुछ सहना होगा !

हरिवंश राय बच्चन

Harivansh Rai Bachchan