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inspirational quote of poor parenting

Because the enormous narcissism of their parents deprived Will and Tom of suitable role models, both brothers learned to identify with absence. Consequently, even if something beneficial fortuitously entered their lives they immediately treated it as temporary.

43 more words
Inspirational Quotes

Bad Parenting: the Epitome of the Standard Trump Supporter (and the only time I'll get a little "political")

I know, I know. President Trump is now President Trump and not “President-Elect” or that shitty quasi-Republican ultimate menace human that’s running but no way in hell is he going to win come November so it’s basically just funny. 655 more words

Blog

Dear neighbors who hate me and my wild monkey spawn;

Dear neighbor,

I’m sorry that we got off to a bad start. Despite my best efforts to be in the good graces of all who reside in this beautiful slice of what would otherwise be considered hillbilly town, my children’s bus stop being at your corner home and your seemingly low tolerance for anything under four feet tall has doomed us from the get go. 930 more words

Bus Stop

Bratty-arsed children....

Sunday we always have a metric ton of children at renfaire, but this last Sunday was probably the worst one on the books for badly behaved children. 605 more words

Rants

Emotional Paramedics by Susan Barton Book Tour Spotlight and Character Interview


  • Paperback:200 pages
  • Publisher:CreateSpace Independent Publishing Platform (August 7, 2016)
  • Language:English
  • ISBN-10:1536960322
  • ISBN-13:978-1536960327

ABOUT THE BOOK:

August Gallagher is a sweet and intelligent Brooklyn girl just trying to find her place in the world during the turbulent 1960s. 1,088 more words

Book Tours

Challenges of Raising Children in Nuclear Families

Nuclear families have a structure consisting of two parents and their children, i.e., immediate family. This system is very different from a joint family, where non-immediate family members, such as uncles, aunts, grandparents, etc., may be included. 1,164 more words

Health

माता-पिता है आईना, और बच्चे उनका अक्स

(एक साधारण सी बात, विशेष तौर पर युवा पता-पिता के लिए..)

(A food for thought, specially for young parents..)

हम माता पिता को अक्सर शिकायत करते सुनते है कि हमारा बच्चा बहुत टीवी देखता है या वो दिनभर मोबाइल पर गेम खेलता रहता है. प्रश्न ये है कि किसने बताया उसे टीवी क्या होती है और मोबाइल क्या है? जबसे उसका जन्म हुआ तब से उसने आपको और परिवार के बाकि सदस्यों को टीवी देखते देखा. याद कीजिये क्या कोई दिन ऐसा गया जब आपने टीवी नहीं देखी हो? जब वो थोड़ा बड़ा हुआ, आपने ही उसे कार्टून दिखाया. आप टीवी देखते है नियम से रोज, यही अब वो भी करना चाहता है, तो अब आप कैसे रोकेंगे? आप खुद टीवी नहीं छोड़ सकते, तो उससे ऐसा करने को कैसे कहेंगे, और वो क्यों मानेगा? ऐसे ही मोबाइल का उदहारण है, जब से उसने आँख खोली है, सभी को वो मोबाइल मैं कुछ न कुछ करते देख रहा है. कोई फोटो ले रहा है, तो कोई चैट कर रहा है. ये दृश्य भी आम है कि माता या पिता अपने साल भर या उसे भी छोटे बच्चे को स्ट्रोलर मे ले कर घूमने निकले है और मोबाइल पर बात कर रहें है, बच्चा अपनी गाडी मे बैठा चुप चाप. वो चाहता है आप उससे बात करे, पर आप मोबाइल मे लीन है. जब वो थोड़ा समझने लायक हुआ तो आपने ही उसे मोबाइल पकड़ा दिया कि वो मोबाइल मे व्यस्त रहे और आप अपना काम या आराम कर सके. यदि ऐसा है तो और बड़े होने पर जब वो मोबाइल मे गेम खेलेगा तो आप कैसे मना करेंगे?

बच्चों के लिए माता–पिता एक आईने के समान होते है जिनमे वो अपना अक्स देखते है. जरा सोचिए यदि आईने में दाग हो तो क्या होगा? स्वावभिक है अक्स मैं भी दाग दिखेगा. उसी प्रकार यदि माता–पिता मैं अवगुण है, तो उनका असर बच्चों पर भी आएगा. जब माता–पिता सुलझे विचारों के हो, सुखी हो, संतुष्ट हो, तो बच्चों में भी सकारात्मकता आएगी. लेकिन यदि माता–पिता ही चिड़चिड़े हो, क्रोध, लालच, अहंकार, घृणा से भरे हो, तो वे अपने बच्चों से ऐसी उम्मीद कैसे कर सकते है? यदि आप चाहते है की आपके बच्चे संस्कारी बने, तो पहले आपको सही संस्कार सीखने होंगे, अपनाने होंगे. याद रखे बच्चों के पास देखने समझने की अद्भूत क्षमता है. वो ज्यादातर व्यवहार अपने आस–पास से देख कर सीखते है. हो सकता है आप का बच्चा थोड़ा चिड़चिड़ा हो, जिद्दी हो. आप सोचेंगे हम तो इससे हमेशा प्यार से बात करते है, डांटते भी नहीं. फिर ये ऐसा क्यों करता है? आप ये याद करे क्या आप हमेशा उसके सामने खुश रहते है? कहीं आप उसके सामने अपनी चिड़चिड़ाहट तो नहीं निकालते? कहीं आप पति–पत्नी आपस मैं तो झगड़ा नहीं करते? आप के घर का वातावरण कैसा है? आप के पास से नकारात्मक ऊर्जा तो नहीं निकलती? (नकारत्मक ऊर्जा हमारे मस्तिष्क मैं आने वाले नकारात्मक विचारो से उत्पन्न होती है ) और ऐसा बहुत कुछ हो सकता है! सोचिये ! बच्चे शब्दो से ज्यादा मन की भावनाओं को समझते है, आपके मस्तिष्क से निकलने वाली ऊर्जा को समझते है. आप को देख के, आप से ही वो सीखता है. जैसी आदतें आप में हैं, वैसी ही उसमे भी आएँगी. खुद अच्छी आदतों को अपनाएं, अच्छे संस्कारों को अपनाएं. साफ़ मन से, सकारात्मक विचारो के साथ बच्चे के साथ समय बिताएं. अपने मन दर्पण को चमकाए, देखिये कैसे आपका अक्स, आपका बच्चा भी झिलमिला उठेगा..

भवदीय

तपन पंडित

काउन्सलिंग  साइकोलोजिस्ट, गाइडपोस्ट

(सेण्टर  फॉर  काउन्सलिंग एंड  पर्सनलाइज्ड  ट्रेनिंग)

http://www.guidepost.in

Child Behaviour