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A cheesemonger runs, but he can't hide

Ludgate Hill by Camille Pissarro, 1890

John Alfred Smith worked for a cheesemonger in the City of London (who had premises on Ludgate Hill), but in October 1890 Smith was summoned before Mr Denham at Wandsworth Police Court, to answer a charge that he had deserted his wife and family. 454 more words

Poverty

Property rights, property wrongs

Biblical words on money that you never hear in church #1


The land shall not be sold in perpetuity, for the land is mine; with me you are but aliens and tenants. 2,335 more words

Poverty

पनप (Panap: Flourishing)

ए चाँद तू यहाँ मत आना,

ये बस्ती तुम्हारी नहीं है.

किसी हवेली के छत पे,

तालाब के पानी में,

समंदर के किनारे,

कई गहनों से सजी चौदवी की रात

तुम्हारा इंतज़ार कर रही होगी

तुम्हे देखकर कोई किसीको

याद कर रहा होगा,

शायरी लिख रहा होगा.

ऐ चाँद,

ये बस्ती तुम्हारी नहीं है

तुम्हारा यहाँ खिलना,

मुनासिब नहीं होगा.

यहाँ घसीटा जाता है बचपन घरसे,

निचोड़कर फेंक दिया जाता है रास्तेपर.

उसके सामने ही फाड़े जाते है माँ–बहन के कपडे,

और बेबसी थूंकती है,

मासूमियत के मुहपर.

यहाँ बचपन के झूले में,

गरीबी का अंगूठा चुसते हुए

क्या हिटलर पनप रहे है ?

बम्ब–बुलेट खेल रहे है ?

यहाँ तो पाश सपनों कि चादर बन रहा है,

ग़दर नया गीत गा रहा है,

तो कही मक्सिम गोर्की

मदर लिख रहा है.

जब सुनसान हो जाती है गली तो

दरवाजे की एक टकटकसे,

पूरा घर थरथराता है.

कांप उठती है चांदनी,

कसके बांध लेती है दुपट्टा बदनसे

और उसकी बेचैन नज़रे,

जब टकराती है दरवाजेसे

वो सन्नाटा

वो सन्नाटा शायद तुम्हे डरा देगा

तुम्हारा यहाँ खिलना

मुनासिब नहीं होगा.

यहाँ स्वाभिमान कर लेता है ख़ुदकुशी

बूढोंके पेटपर लाथ मारती है भूक

पुलिस प्रोटेक्शनमें इन्सानियतके

टुकडे किये जाते है और

गले में जलता टायर डालके

बस्ती के साथ सपनेभी

यहाँ ज़िंदा जलाए जाते है…

तुम्हे देखकर मामा नहीं

रोटी की याद आती है .

तो तू अब लौट जा,

किसी हवेली के छत पे,

तालाब के पानी में,

समंदर के किनारे,

कई गहनों से सजी चौदवी की रात

तुम्हारा इंतज़ार कर रही होगी.

ऐ चाँद,

ये बस्ती तुम्हारी नहीं है

तुम्हारा यहाँ खिलना,

मुनासिब नहीं होगा…

                                         –   आकाश दौंडे (Akash Dounde)

Justice

War Without Enemies

I first arrived in Afghanistan during the winter of 2012. I had no idea what to expect. When the bay-door of the C-130 began to drop, my heart started racing as I anticipated a barrage of incoming mortars–friendly artillery going out as I rushed to the nearest bunker, having barely arrived with my life. 2,195 more words

Politics

Impact HK

ImpactHK started with the aim of doing one kind act per month for the homeless in Hong Kong.

Many volunteers joined as they wanted an opportunity to support the needy in a meaningful and measurable way. 358 more words

Hong Kong

Rights for all, except...

Written by Kelsie De Haan, Political Intern, Opportunity International Australia

Language is one of the most powerful tools that we can employ. Words have the power to build people up or to tear them down. 556 more words

Too Evicted To Survive

“It is hard to argue that housing is not a fundamental human need. Decent, affordable housing should be a basic right for everybody in this country. 361 more words